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जित-जित मैं निरखत हूँ question types

82 questions across 4 question groups — pick any mix to generate a हिन्दी paper with step-by-step answer keys.

82
Questions
4
Question groups
5
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Sample Questions

जित-जित मैं निरखत हूँ questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

'साफा' क्या है?
  • A
    छोटा कुरता जिसे संगीतज्ञ पहनते हैं
  • B
    बैठने के लिए आरामदायक गद्दा
  • साफ लंबा वस्व जिसे नर्तक कंधे से लेकर कमर तक लपेट लेता है
  • D
    साफ करने की एक विधि

Answer: C.

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रामपुर नवाब के महल में भी नाचा हूँ नेपाल महाराज के यहाँ भी नाचा हूँ और जमींदारों के यहाँ भी नाचा हूँ जहाँ का मैं अक्सर तमाशा सुनाता रहता हूँ कि जहाँ महफिल भी लगी है कि लड़का नाचेगा जरा चारों तरफ थोड़ा खिसककर जगह बनाओ तो सब खिसक जायें तो नीचे गलीचा गलीचे पर चांदनी और चाँदनी गलीचे के नीचे जमीन पर कहीं पर गड्ढे हैं कहीं पर खाँचा है मतलब यह सब नहीं कौन परवाह करे। आजकल हमारे नये डांसर हैं कि स्टेज बड़ा खराब है बड़ा टेढ़ा है बड़ा गड्ढा है। हम लोगों को यह सब सोचने का कहाँ मौका मिलता था। अब गर्मी के दिनों में जरा सोचो न एयरकंडीशन; न कुछ वो बड़े-बड़े पंखे लेकर जो नौकर-चाकर थे, वो हाँकते रहते थे। उनसे भी हाथ बचाना पड़ता था। नाचने में उससे न लड़ जायें कहीं। दूसरे कि गैस लाइट जल रही है उसकी भी गर्मी।
(i) बिरजूजी का नृत्य कहाँ-कहाँ हुआ है ?
(ii) उस समय स्टेज की व्यवस्था कैसे होती थी?
(iii) पहले और आज के नर्तकों में क्या अन्तर है ?
(iv) सफल नर्तक की क्या पहचान है?
(v) लेखक ने अपने नाचने के अनुभवों में किन कठिनाइयों का सामना किया और वे कैसे उनसे निपटते थे?
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बि.म:-अम्माजी का बहुत बड़ा हाथ है। अम्माजी ने तो शुरू से उन बुजुर्गों की तारीफ कर करके मेरे सामने हरदम कि, बेटा वो ऐसे थे, उनको कम-से-कम इतना नाम तो याद था उन बुजुर्गों का। अभी आप दूसरे किसी से पूछे घर में तो उन्हें नाम भी नहीं मालूम था कि कौन थे। चाची (शंभू महाराज की पत्नी) से आप पूछे महाराज बिन्दादीन के बाद पहले और कौन थे तो उनको नहीं मालूम। तुमरियाँ भी मैंने उनसे सीखीं। मेरी वाकई में गुरुवाइन थी; वो माँ तो थीं ही। गुरुवाइन भी। और जब भी मैं नाचता था तो सबसे बड़ा एक्जामिनर या जज अम्मा को समझता था। जब भी वो नाच देखती थीं तो मैं कहता था उनसे कि मैं कहीं गलत तो नहीं कर रहा हूँ। मतलब बाबूजी वाला ढंग है ना कहीं गड़बड़ी तो नहीं हो रही। तो कही नहीं बेटा नहीं। उन्हीं की तस्वीर हो। पर बैले वैले यह तो मेरा भैया क्रियेशन है। वो हरदम ऐसे ही कहती रहीं और लखनऊ के जो बुजुर्ग थे उनसे भी, गवाही ली मैंने। चेंज तो नहीं लग रहा है। “नहीं बेटा वही ढंग है। और तुम्हारा शरीर वगैरह टोटल ढंग वैसा ही है। बैठने का, उठने का, बात करने का। मतलब जैसा था उनका।
(i) बिरजू ने अपनी माँ को गुरुवाइन क्यों कहा है ?
(ii) नृत्य करते समय बिरजू अपना जज किसे मानते थे? और क्यों ?
(iii) बिरजू को गवाही लेने के लिए क्या करना पड़ता था ?
(iv) अम्माजी ने लेखक के सामने बुजुर्गों की तारीफ किस तरह की और इसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?
(v) लेखक नाचते समय अम्माजी को सबसे बड़ा जज क्यों मानता था और इससे उसकी कला में क्या सुधार हुआ?
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