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2 अंक वाले प्रश्न

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Question 12 Marks

20 kg द्रव्यमान की एक 3 m लंबी सीढ़ी एक घर्षणविहीन दीवार के साथ झुका कर टिकाई गई है। जैसा चित्र में दर्शाया गया है, इसका निचला सिरा फर्श पर दीवार से 1 m की दूरी पर है। दीवार और फर्श के प्रतिक्रिया बल ज्ञात कीजिए।
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Question 22 Marks
70 सेंटीमीटर लंबी और 4.00 kg द्रव्यमान की धातु की छड़ के दोनों सिरों से 10 सेंटीमीटर दूर रखे दो क्षुर-धारों पर टिकी है। इसके एक सिरे से 40 सेंटीमीटर की दूरी पर 6.00 kg द्रव्यमान का एक भार लटकाया गया है। क्षुर-धारों पर लगने वाले प्रतिक्रिया
बलों की गणना कीजिए। (छड़ को समांग और समान अनुप्रस्थ काट वाली मान सकते हैं।)
Answer
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Question 32 Marks
मूल बिन्दु के परितः, बल 7$\hat{\mathbf{i}}$ + 3$\hat{\mathbf{j}}$ - 5$\hat{\mathbf{k}}$ का बल आघूर्ण ज्ञात कीजिए। बल जिस कण पर लगता है उसका स्थिति सदिश $\hat{\mathbf{i}}-\hat{\mathbf{j}}+\hat{\mathbf{k}}$ है।
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Question 42 Marks

एक दिए गए L-आकृति के फलक (एक पतली चपटी प्लेट) का द्रव्यमान केन्द्र ज्ञात कीजिए, जिसका विभिन्न भुजाओं को चित्र में दर्शाया है। फलक का द्रव्यमान 3 kg है।
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Question 52 Marks
मूल सिद्धांत के आधार पर समीकरण $\omega = \omega_0 + \alpha t$ व्युत्पन्न कीजिए।
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Question 62 Marks
एक वृत्ताकार चकती का जड़त्व आघूर्ण इसके किसी व्यास के परितः क्या होगा?
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Question 72 Marks
एक कण जिसके स्तिथि सदिश $\vec{r}$ के $x , y , z$ अक्षों के अनुदिश अवयव क्रमशः $x , y , z$ है और रेखीय संवेग सदिश $\vec{p}$-के अवयव $p _x, p _{ y }, p _{ z }$ हैं, के कोणीय संवेग $\vec{L}$ के अक्षों के अनुदिश अवयव ज्ञात कीजिए। दर्शाइये, कि यदि कण केवल $x-y$ तल में गतिमान हो तो कोणीय संवेग का केवल $z$-अवयव ही होता है।
Answer
माना $O X, O Y$ तथा $O Z$ तीन परस्पर लम्बवत् अक्ष हैं। माना $x-y$ तल में स्थिति सदिश
$\vec{O} P=\vec{r}$ एक बिन्दु P है।
माना रेखीय संवेग $\vec{P}$ का $\hat{r}$ से कोण $\theta$ है व कोणीय संवेग $\vec{L}$ है।
$\therefore \vec{L}=\hat{r} \times \hat{p}$
यह एक संवेग राशि है जिसकी दिशा दाएँ हाथ के नियम से दी जा सकती है। चूँकि $\hat{r}$ व $\hat{p}$ तल OXY में हैं। अतः
$\vec{r}=x \hat{i}+y \hat{j}+z \hat{k}$
तथा
$\vec{P}=p_x \hat{i}+p_y \hat{j}+p_z \hat{k}$
$\therefore$ समी० (i) व (ii) से,
$\vec{L}=(x \hat{i}+y \hat{j}+z \hat{k}) \times$
$\left(p_x \hat{i}+p_y \hat{j}+p_z \hat{k}\right)$
$\vec{L}=(x \hat{i}+y \hat{j}+z \hat{k}) \times\left(p_x \hat{i}+p_y \hat{j}+p_z \hat{k}\right)$
$=\left|\begin{array}{ccc}\hat{i} & \hat{j} & \hat{k} \\ x & y & z \\ p_x & p_y & P_z\end{array}\right|$
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या $L_x \hat{i}+l_y \hat{j}+L_z \hat{k}=\hat{i}\left(y p_z-z p_y\right)$
$+\left(z p_x-x p_z\right)+\hat{k}\left(x p_y-y p_x\right)$
PxP, P.
तुलना करने पर,
$L_x=y P_z-z P_y$
$L_y=z p_x-x P_z$
$L_z=x P_y-y P_x$
समी० (iii) से, $x, y$ व $z$ - अक्षों के अनुदिश - के अभीष्ट घटक प्राप्त होते हैं।
हम जानते हैं कि $x y$ - तल में गतिमान कण पर लगने वाला बलाघूर्ण
$i_{z}=xF F_{y^{\prime}}-yF_{z^{\prime}}$
जहाँ $\hat{i}_z=x y$ तल में गतिमान गण- अक्ष के अनुदिश लगने वाले बलाघूर्ण का घटक है।
माना xy - तल में $\vec{v}$ वेग से गतिमान कण का द्रव्यमान $=m$ इस वेग के $v_x$ व $v_y$, घटक क्रमश: $x$ व - दिशा में हैं। न्यूटन के गति के दूसरे समी० से,​​​​​​​
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अतः समीकरण (vii) से यह निष्कर्ष निकलता है, कि. xy – तल में गतिमान कण का कोणीय वेग ($\overrightarrow { L } $) का केवल एक घटक अर्थात् z – अक्ष के अनुदिश है।
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Question 82 Marks
लोटनिक गति करते समय संपर्क बिंदु की तात्क्षणिक चाल शून्य होती है।
Answer
सत्य, चूँकि लोटनिक गति, सम्पर्क बिन्दु पर सी गति 1 के समाप्त होने पर प्रारम्भ होती है। इस प्रकार परिशुद्ध लोटनिक । गति में सम्पर्क बिन्दु की तात्क्षणिक चाल शून्य होती है।
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Question 92 Marks
लोटनिक गति करते समय घर्षण बल उसी दिशा में कार्यरत होता है जिस दिशा में पिण्ड का द्रव्यमान केंद्र गति करता है।
Answer
सत्य, चूँकि स्थानान्तरीय गति घर्षण बल के कारण ही उत्पन्न होती है। इसी बल के कारण पिंड का द्रव्यमान आगे की ओर बढ़ता है।
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Question 102 Marks
कोई बच्चा किसी चिकने क्षैतिज फर्श पर एकसमान चाल v से गतिमान किसी लम्बी ट्रॉली के एक सिरे पर बैठा है। यदि बच्चा खड़ा होकर ट्रॉली पर किसी भी प्रकार से दौड़ने लगता है, तब निकाय (ट्रॉली + बच्चा) के द्रव्यमान केन्द्र की चाल क्या है?
Answer

प्रश्नानुसार, ट्राली एक चिकने क्षैतिज फर्श पर गति कर रही है। इसलिए फर्श के चिकना होने के कारण निकाय पर क्षैतिज दिशा में कोई बाह्य बल नहीं लगता है। परन्तु जब बच्चा दौड़ता है तब बच्चे द्वारा ट्राली पर व ट्राली द्वारा बच्चे पर लगाए गए दोनों ही बल आन्तरिक बल होते हैं।
∴ $\overrightarrow { F_{ ext } } $ = 0
संवेग संरक्षण के नियमानुसार M $\overrightarrow { V_{ cm } } $ = नियतांक
∴ $\overrightarrow { V_{ cm } } $ = नियतांक
अतः द्रव्यमान केन्द्र की स्थित चाल होगी।
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Question 112 Marks
एक ठोस गोला, भिन्न नति के दो आनत तलों पर एक ही ऊँचाई से लुढ़कने दिया जाता है
  1. क्या वह दोनों एकसमान चाल से तली में पहुँचेगा।
  2. क्या उसको एक तल पर लुढ़कने में दूसरे से अधिक समय लगेगा?
  3. यदि हाँ, तो किस पर और क्यों?
Answer

माना तल – 1 पर निम्न बिन्दु से शिखर तक चली दूरी व झुकाव क्रमश: $l _1$ व $\theta_2$ है।
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$\therefore \sin \theta_1>\sin \theta_2$
या $\frac{\sin \theta_1}{\sin \theta_2}>1$
प्रत्येक झुके तल की ऊँचाई,
$\lambda=I_1 \sin \theta_1=I_2 \sin \theta_2$, (a) है।
तल के शिखर पर, गोले में केवल स्थितिज ऊर्जा होगी। i. e., $P E=m g h$
जहाँ $m =$ गोले का द्रव्यमान है।
जब गोला शिखर से निम्न बिन्दु तक लुढ़कता है, तो स्थितिज
ऊर्जा, रैखिक ऊर्जा $\left(\frac{1}{2} I \omega^2\right)$ गतिज ऊपरिवर्तित हो जाती है। जहाँ। गोले का जड़त्वाघूर्ण है।
माना तल के निम्न बिन्दु पर रेखीय वेग $v$ व कोणीय चाल $\omega$ है।
माना $v_1$ व $_2$ क्रमश: दोनों तलों (1 व 2) पर निम्न बिन्दु पर रेखीय वेग है।
अतः
$m g h =\frac{1}{2} m v_1^2+\frac{1}{2} I \omega^2$
$=\frac{1}{2} m v_2^2+\frac{1}{2} I \omega^2$
$=\left(\frac{1}{2} m v_1^2+\frac{1}{2} m K^2 \frac{v_1^2}{R^2}\right)$
$=\frac{1}{2} \cdot \frac{1}{2} m v_2^2+\frac{1}{2} m K^2 \frac{v_2^2}{R^2}$
या $2 g h=v_1^2\left(1+\frac{K_2}{R^2}\right)$ $(\therefore v=R \omega)$
तथा $\left(I=m K^2\right)$
तथा $2 g h=v_2^2\left(1+\frac{K^2}{R^2}\right)$
या $v_1^2=\frac{2 g h}{\left(1+\frac{K^2}{R^2}\right)}$
तथा $v_2^2=\frac{2 g h}{1+\frac{K^2}{R^2}}$
जहाँ $K$ घूर्णन त्रिज्या है।
समी० (ii) व (iii) से स्पष्ट है कि प्रत्येक स्थिति में गोला निम्न बिन्दु पर समान वेग से लौटता है।
(b) हाँ, यह तल -1 पर तल -2 से अधिक समय लेगा। यह समय कम झुकाव वाले तल के लिए अधिक होगा। व्याख्या: माना तल -1 व तल -2 पर फिसलने में लिया गया समय क्रमशः $t_1$, व $t_2$ है।
ठोस गोले के लिए,
$1+\frac{K^2}{R^2}=\frac{1+\frac{2}{5} R^2}{R^2}=\frac{7}{5}$
हम जानते हैं कि, झु़ेके तल पर वस्तु का त्वरण निम्न है -
$a=\frac{g \sin \theta}{1+\frac{K^2}{R^2}}$
जहाँ $\theta=$ झुकावाव
माना झुके तल -1 व 2 पर गोले के त्वरण क्रमशः $a_1$ व $a_2$
अतः
$a_1=\frac{g \sin \theta_1}{7 / 5}$
$=\frac{5}{7} g \sin \theta_2$
पुनः माना तल 1 व 2 पर फिसलने का समय क्रमश: $t_1$ व $t_2$ है। अतः
सूत्र $S=u t+\frac{1}{2} a t^2$ से,
$t_1=\frac{2 l_1}{a_1} \quad(\therefore$ यहाँ $u=0)$
$=\frac{2 h / \sin \theta_1}{\frac{7}{5} g \sin \theta_1}=\frac{14 h}{5 g\left(\sin \theta_1\right)^2}$
तथा
$t_2 =\frac{2 l_2}{a_2}=\frac{2 h / \sin \theta_2}{\frac{7}{5} g \sin \theta_2}$
$=\frac{14 h}{7 g\left(\sin \theta_2\right)^2}$
समी० (iv) को (v) से भाग देने पर,
$\frac{t_1}{t_2}=\frac{\left(\sin \theta_2\right)^2}{\left(\sin \theta_1\right)^2}=\left(\frac{\sin \theta_2}{\sin \theta_1}\right)^2$
समी० (i) से $\frac{\sin \theta_1}{\sin \theta_2}>1$
या $\frac{\sin \theta_2}{\sin \theta_1}>1$
$\therefore\left(\frac{\sin \theta_2}{\sin \theta_1}\right)^2<1$
$\therefore$ समी० (vi) व (vii) से,
$\frac{t_1}{t_2}<1$ या $t_1 समय $t$, झुकाव कोण $\theta$ पर निर्भर करता है। अतः झुकाव कोण जितना कम होगा, गोला लुढ़कने में उतना ही अधिक समय लेगा।
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