ल्यूकास अभिकर्मक किसे कहते हैं तथा इसका उपयोग भी बताइए।
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निर्जल ZnCl2, तथा सान्द्र HCI के मिश्रण को ल्यूकास अभिकर्मक कहते हैं तथा इससे $1^{\circ}, 2^{\circ}$ तथा $3^{\circ}$ ऐल्कोहॉलों में विभेद किया जाता है।
एक कार्बनिक यौगिक X (C4H10O) की HCI से क्रिया कराने पर यौगिक Y (C4H9CI) बनता है जिसके अपचयन से ब्यूटेन प्राप्त होता है। यौगिक X के ऑक्सीकरण से पहले एक कार्बोनिल यौगिक (Z) प्राप्त होता है इसके पश्चात् उतने ही कार्बन का कार्बोक्सिलिक अम्ल (P) बनता है। X, Y, Z तथा P का सूत्र बताइए तथा अभिक्रिया अनुक्रम भी लिखिए।
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प्रश्नानुसार यौगिक X, n - ब्यूटिल ऐल्कोहॉल है क्योंकि इसके ऑक्सीकरण का अन्तिम उत्पाद उतने ही कार्बन का कार्बोक्सिलिक अम्ल है। इन अभिक्रियाओं के समीकरण निम्नलिखित हैं-
$CH _3 OC _2 H _5$ की HI से क्रिया द्वारा बने उत्पाद बताइए।
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(i) $CH _3 O C _2 H _5+ HI \longrightarrow$$CH _3 OH + C _2 H _5 I$ (ii) $CH _3 O C _2 H _5+2 HI \longrightarrow$$CH _3 I + C _2 H _5 I + H _2 O$ $\qquad$$\qquad$आधिक्य
एक कार्बनिक यौगिक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है तथा यह सोडियम धातु के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन गैस भी देता है तथा इसके ऑक्सीकरण का अन्तिम उत्पाद एथेनॉइक अम्ल है तो यह यौगिक कौनसा है? समीकरणों सहित व्याख्या कीजिए।
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प्रश्नानुसार यौगिक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है अतः यह ऐल्कोहॉल या कार्बोनिल यौगिक होना चाहिए लेकिन कार्बोनिल यौगिक सोडियम धातु के साथ क्रिया नहीं करते तथा इस यौगिक के ऑक्सीकरण का अन्तिम उत्पाद एथेनॉइक अम्ल है अतः यह यौगिक एथेनॉल होगा। अभिक्रियाओं के समीकरण निम्न हैं-
सल्फोनीकरण (Sulphonation) - कक्ष ताप पर फीनॉल की सान्द्र H2SO4 से क्रिया कराने पर o- तथा p- फीनॉल सल्फोनिक अम्लों का मिश्रण बनता है। इस अभिक्रिया में उच्च ताप $(100^{\circ} C )$ पर p- समावयवी तथा निम्न ताप $(25^{\circ} C)$ पर o समावयवी अधिक मात्रा में बनता है।
एक मिश्रित ईथर जिसमें प्राथमिक या द्वितीयक ऐल्किल समूह उपस्थित हैं, की एक मोल HI से क्रिया कराने पर आयोडाइड आयन (1) कौनसे ऐल्किल समूह से जुड़ता है तथा क्यों?
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प्राथमिक या द्वितीयक ऐल्किल समूह युक्त मिश्रित ईथर की क्रिया HI के साथ कराने पर आयोडाइड आयन कम प्रतिस्थापित कार्बन या छोटे ऐल्किल समूह पर जुड़ता है क्योंकि इस अभिक्रिया की क्रियाविधि SN2 होती है जिसमें संक्रमण अवस्था बनती है। आयोडाइड के बड़े आकार के कारण यह बड़े या अधिक प्रतिस्थापित ऐल्किल समूह से नहीं जुड़ता क्योंकि उस पर त्रिविम विन्यासी बाधा के कारण प्रतिकर्षण होता है।