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लघु उत्तरीय प्रश्न (4 गुण) - इतिहास

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Question 14 Marks
महात्मा गांधी के द्वारा छुआछूत निवारण के क्या उपाय किये गये?
Answer
महात्मा गांधी ने अछूतों और दलितों को ‘हरिजन’ का नाम दिया । इनका उत्थान गाँधीजी का प्रमुख उद्देश्य था। उनके उद्धार के लिए गाँधीजी के द्वारा अनेक रचनात्मक कार्यक्रम चलाये गये । इन प्रयासों से छुआछूत की प्रथा कमजोर पड़ी। 1932 में गाँधीजी ने हरिजन सेवक संघ स्थापित किया जो उन्हें चिकित्सा और तकनीक संबंधी जानकारी एवं सुविधा पहुँचा सके।

1933 में उन्होंने ‘हरिजन’ नामक साप्ताहिक पत्रिका निकाली, जिसमें कई.. संवेदनशील विषय जैसे हरिजनों का मंदिर प्रवेश, जलाशयों को हरिजन के लिए उपलब्ध कराना शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश आदि का समर्थन किया गया। गाँधीजी ने जाति प्रथा में सुधार के प्रयासों के साथ छुआ-छूत के विरोध, महिलाओं की स्थिति में सुधार और हिन्दू-मुस्लिम एकता को बढ़ाने के महत्त्वपूर्ण उपाय किये।
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Question 24 Marks
श्री नारायण गुरु का समाज सुधार के क्षेत्र में क्या योगदान रहा?
Answer
केरल में ऐझावा निम्न जाति में जन्में नान आसन जो बाद में श्री नारायण गुरु के नाम से जाने गये, एक धार्मिक गुरु के रूप में उभरे । इन्होंने अपने लोगों के बीच एकता का आदर्श रखा । उन्होंने प्रेरणा दी कि उनके पंथ में जाति का भेदभाव नहीं होना चाहिए और सभी को एक गुरु में विश्वास रखना चाहिए । इनके द्वारा श्री नारायण धर्म परिपालन योगम की स्थापना 1902 में हुई। इस संगठन के समक्ष दो उद्देश्य थे, एक छुआ-छूत का विरोध और दूसरा पूजा, विवाह और मृतक के अंतिम संस्कार की सरल विधि ।

इन पंथों की स्थापना चूँकि उन लोगों ने की जो स्वयं निम्न जातियों से थे और उनके बीच ही काम करते थे अतः उन्होंने निम्न जातियों के बीच प्रचलित आदतों और तौर-तरीकों को बदलने का प्रयास किया और उच्च वर्ण के तौर-तरीकों को अपनाने का प्रयास किया, ताकि निम्न जातियों में स्वाभिमान पैदा किया जा सके।
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Question 34 Marks
वीरशेलिंगम के योगदान की चर्चा करें।
Answer
वीरशेलिंगम का पूरा नाम कुंडुकरि वीरशेलिंगम था। दक्षिण भारत में उन्होंने सामाजिक असमानता के विरोध में सशक्त आंदोलन चलाया । एक निर्धन परिवार में जन्मे, स्कूल शिक्षक, वीरशेलिंगम ने तेलुगु भाषा में कई लेख लिखें जिसके लिए उन्हें आधुनिक तेलुगु गद्य साहित्य का जनक कहा जाता है। दक्षिण भारत में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक थी । अत: इनके द्वारा महिला उत्थान के प्रति जागरूकता पैदा की गयी।

विधवा पुनर्विवाह नारी शिक्षा, महिला मुक्ति जैसी सामाजिक बुराइयों के जैसे विषयों के प्रति उनके । उत्साह ने उन्हें आंध्र के समाज सुधारकों की अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया। उनके द्वारा चलाया गया जातीय आंदोलन एक प्रेरणा स्रोत के रूप में स्वीकार किया जाता है जिसने दक्षिण भारत में ऐसे दूसरे महत्त्वपूर्ण संगठनों एवं आंदोलनों को आगे बढ़ाने में सहायता की । इसका परिणाम बीसवीं सदी में चलाये गये आंदोलनों में देखा जाता है।
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