वीरशेलिंगम का पूरा नाम कुंडुकरि वीरशेलिंगम था। दक्षिण भारत में उन्होंने सामाजिक असमानता के विरोध में सशक्त आंदोलन चलाया । एक निर्धन परिवार में जन्मे, स्कूल शिक्षक, वीरशेलिंगम ने तेलुगु भाषा में कई लेख लिखें जिसके लिए उन्हें आधुनिक तेलुगु गद्य साहित्य का जनक कहा जाता है। दक्षिण भारत में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक थी । अत: इनके द्वारा महिला उत्थान के प्रति जागरूकता पैदा की गयी।
विधवा पुनर्विवाह नारी शिक्षा, महिला मुक्ति जैसी सामाजिक बुराइयों के जैसे विषयों के प्रति उनके । उत्साह ने उन्हें आंध्र के समाज सुधारकों की अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया। उनके द्वारा चलाया गया जातीय आंदोलन एक प्रेरणा स्रोत के रूप में स्वीकार किया जाता है जिसने दक्षिण भारत में ऐसे दूसरे महत्त्वपूर्ण संगठनों एवं आंदोलनों को आगे बढ़ाने में सहायता की । इसका परिणाम बीसवीं सदी में चलाये गये आंदोलनों में देखा जाता है।