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Question 15 Marks
स्वतंत्रता का अधिकार कई अधिकारों का समूह है। चर्चा कीजिए।
Answer
स्वतंत्रता का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों में से एक है। यह छः विभिन्न अधिकारों का एक समूह है।
(1) वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता-इसके तहत नागरिकों को बैठकें आयोजित करने, प्रदर्शन करने, रैलियाँ निकालने आदि के अधिकार प्राप्त हैं।
(2) शांतिपूर्ण सभा का अधिकार-इसका तात्पर्य है कि वे लोग जो उपर्युक्त गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं उन्हें अपने साथ न तो कोई हथियार रखने चाहिये और न ही किसी हिंसात्मक गतिविधि में भाग लेना चाहिये। शांतिपूर्ण तरीकों से सभाओं आदि के आयोजन का उन्हें अधिकार है।
(3) संगठन एवं संघ निर्माण की स्वतंत्रता-इसका अर्थ है कि लोगों को अपने अधिकारों के लिये लड़ने तथा अपनी मांगों को पूरा करने के लिये इच्छित संगठन एवं संघ बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता है। किंतु इस तरह की संस्थाओं को किसी भी तरह की राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं होना चाहिए।
(4) देश के अंदर कहीं बस जाने की स्वतंत्रता-प्रत्येक नागरिक अपनी इच्छित जगह पर अपना घर बना सकता है। अर्थात् किसी भी प्रदेश का स्थायी निवासी किसी दूसरे प्रदेश में जाकर रह सकता है।
(5) देश में अबाध भ्रमण की स्वतंत्रता-भारत का प्रत्येक नागरिक अपनी इच्छित जगह पर देश में कहीं भी बिना किसी भेदभाव के भ्रमण कर सकता है।
(6) पेशे की स्वतंत्रता-लोगों को अपने इच्छित व्यवसाय, रोजगार, व्यापार आदि को बिना किसी भेदभाव के करने की स्वतंत्रता है।
अतः हम कह सकते हैं कि स्वतंत्रता का अधिकार एक अधिकार न होकर कई अधिकारों का समूह है।
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Question 25 Marks
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के बारे में आप क्या जानते हैं? उसकी शक्तियों का वर्णन कीजिये।
Answer
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग-राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग कानन द्वारा निर्मित एक स्वतंत्र आयोग है। इसकी स्थापना भारत में सन् 1993 में की गई। इसके अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इसमें अवकाशप्राप्त न्यायाधीश, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक को ही नियुक्त किया जा सकता है।
आयोग की शक्तियाँ
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की प्रमुख शक्तियाँ निम्नलिखित हैं-
यह आयोग मानवाधिकार के उल्लंघन के किसी भी मामले में स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच करता है। यह अपनी जांच रिपोर्ट को सरकार के समक्ष रखता है।
यह आयोग देश में मानवाधिकारों को बढ़ाने और उनके प्रति चेतना जागृत करने का कार्य करता है।
आयोग अन्य अदालत की तरह जांच हेतु सम्मन जारी कर सकता है।
यह किसी भी सरकारी अधिकारी से पूछताछ कर सकता है तथा आधिकारिक दस्तावेजों की माँग कर सकता
यह किसी भी जेल का निरीक्षण कर सकता है तथा घटना-स्थल पर अपनी जांच के लिए दल भेज सकता
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Question 35 Marks
मौलिक अधिकार किसे कहते हैं? भारतीय संविधान द्वारा आपको प्राप्त अधिकारों का वर्णन कीजिये।
Answer
मूल अधिकार से आशय-कुछ ऐसे अधिकार जो हमारे जीवन के लिए मूलभूत एवं परम आवश्यक हैं और उन्हें संविधान में विशेष स्थान दिया गया है। इन्हीं अधिकारों को मौलिक अधिकार कहते हैं।
भारतीय संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार
भारतीय संविधान में नागरिकों को निम्नलिखित मूल अधिकार प्रदान किये गये हैं-
(1) समानता का अधिकार-संविधान के अनुसार भारत में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता या कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता। सरकार किसी से भी उसके धर्म, वंश, जाति, लिंग और जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं कर सकती। इनके आधार पर किसी को सार्वजनिक स्थलों के प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता तथा सरकार में किसी पद पर नियुक्ति या रोजगार के मामले में सभी को अवसर की समानता है।
(2) स्वतंत्रता का अधिकार-भारतीय संविधान में प्रत्येक नागरिक को छ: स्वतंत्रताएँ प्रदान की गई हैं। ये हैं (i) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (ii) शांतिपूर्ण ढंग से एकत्रित होने की स्वतंत्रता (ii) संगठन और संघ बनाने की स्वतंत्रता (iv) देश में कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता (v) देश के किसी भी भाग में बसने की स्वतंत्रता तथा (vi) कोई भी काम-धन्धा या व्यवसाय करने की स्वतंत्रता।
किसी भी व्यक्ति को जीवन के अधिकार व निजी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जायेगा तथा सभी को निवारक नजरबंदी के अधिकार दिये गये हैं।
(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार-संविधान ने कमजोर वर्ग के शोषण को समाप्त करने के लिए यह अधिकार प्रदान किया है कि (i) संविधान मनुष्य जाति के अवैध व्यापार का निषेध करता है। (ii) संविधान किसी किस्म की बेगार का निषेध करता है। (iii) संविधान बाल मजदूरी का भी निषेध करता है।
(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार-भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है। यहाँ प्रत्येक व्यक्ति को अपना धर्म मानने, उस पर आचरण करने और शांतिपूर्वक उसका प्रचार करने का अधिकार है।
(5) सांस्कृतिक और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार-नागरिकों को अपनी भाषा तथा संस्कृति को बचाने का अधिकार है। सरकारी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए धर्म के आधार पर निषेध नहीं किया जा सकता तथा सभी अल्पसंख्यकों को अपनी निजी शिक्षण संस्थाएँ खोलने का अधिकार है।
(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार-संवैधानिक उपचारों के अधिकार के अन्तर्गत उक्त मूल अधिकारों को न्यायालय में वादयोग्य बनाया गया है।
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Question 45 Marks
मूल अधिकारों का विस्तार से उल्लेख करें जो संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये गये हैं।
Answer
मूल अधिकार से आशय-कुछ ऐसे अधिकार जो हमारे जीवन के लिए मूलभूत एवं परम आवश्यक हैं और उन्हें संविधान में विशेष स्थान दिया गया है। इन्हीं अधिकारों को मौलिक अधिकार कहते हैं।
भारतीय संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार
भारतीय संविधान में नागरिकों को निम्नलिखित मूल अधिकार प्रदान किये गये हैं-
(1) समानता का अधिकार-संविधान के अनुसार भारत में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता या कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता। सरकार किसी से भी उसके धर्म, वंश, जाति, लिंग और जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं कर सकती। इनके आधार पर किसी को सार्वजनिक स्थलों के प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता तथा सरकार में किसी पद पर नियुक्ति या रोजगार के मामले में सभी को अवसर की समानता है।
(2) स्वतंत्रता का अधिकार-भारतीय संविधान में प्रत्येक नागरिक को छ: स्वतंत्रताएँ प्रदान की गई हैं। ये हैं (i) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (ii) शांतिपूर्ण ढंग से एकत्रित होने की स्वतंत्रता (ii) संगठन और संघ बनाने की स्वतंत्रता (iv) देश में कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता (v) देश के किसी भी भाग में बसने की स्वतंत्रता तथा (vi) कोई भी काम-धन्धा या व्यवसाय करने की स्वतंत्रता।
किसी भी व्यक्ति को जीवन के अधिकार व निजी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जायेगा तथा सभी को निवारक नजरबंदी के अधिकार दिये गये हैं।
(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार-संविधान ने कमजोर वर्ग के शोषण को समाप्त करने के लिए यह अधिकार प्रदान किया है कि (i) संविधान मनुष्य जाति के अवैध व्यापार का निषेध करता है। (ii) संविधान किसी किस्म की बेगार का निषेध करता है। (iii) संविधान बाल मजदूरी का भी निषेध करता है।
(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार-भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है। यहाँ प्रत्येक व्यक्ति को अपना धर्म मानने, उस पर आचरण करने और शांतिपूर्वक उसका प्रचार करने का अधिकार है।
(5) सांस्कृतिक और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार-नागरिकों को अपनी भाषा तथा संस्कृति को बचाने का अधिकार है। सरकारी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए धर्म के आधार पर निषेध नहीं किया जा सकता तथा सभी अल्पसंख्यकों को अपनी निजी शिक्षण संस्थाएँ खोलने का अधिकार है।
(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार-संवैधानिक उपचारों के अधिकार के अन्तर्गत उक्त मूल अधिकारों को न्यायालय में वादयोग्य बनाया गया है।
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Question 55 Marks
मूल अधिकारों की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
Answer
मूल अधिकारों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
सार्वभौमिक-ये अधिकार सार्वभौमिक हैं अर्थात् ये बिना किसी भेदभाव के भारत के सभी नागरिकों के लिये हैं। प्रतिबंध-हमारे अधिकार पूर्ण नहीं हैं। प्रत्येक अधिकार पर कुछ प्रतिबंध लगाये गये हैं।
न्यायपूर्ण-मूल अधिकार न्यायपूर्ण हैं अर्थात् यदि कोई व्यक्ति अथवा सरकार उसके अधिकारों का उल्लंघन करती है तो नागरिक न्यायालय की शरण में जा सकते हैं।
व्यापक-ये अधिकार व्यापक होते हैं। वे हमारे सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक हितों की सुरक्षा करते हैं। रोक के योग्य-राष्ट्रीय आपातकालीन स्थिति में इन अधिकारों को रोका जा सकता है।
लोकतंत्र का आधार-इन अधिकारों को हमारे लोकतंत्र का आधार माना जाता है।
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