तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।
किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले-
अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।
(i) कवि के अनुसार आज प्रत्येक व्यक्ति क्या करने में लगा हुआ है?
(क) स्वयं अपना समय व्यतीत करने
(ख) दूसरे की दुर्बलताओं का मज़ाक में बनाने में
(ग) अपने घर जाने में
(घ) दूसरों के साथ खुश होने में
(ii) कवि की जीवनकथा किससे भरी हुई है?
(क) सुख व निराशा से
(ख) प्रसन्नता व हताशा से
(ग) प्रसन्नता व निराशा से
(घ) निराशा व हताशा से
(iii) यह गागर रीती में गागर शब्द का सांकेतिक अर्थ है-
(क) जीवन रूपी घड़ा
(ख) घड़ा रूपी जीवन
(ग) निराशा रूपी घड़ा
(घ) ख़शशी रूपी घड़ा
(iv) कवि के जीवन के आनंद रूपी रस को किसने खाली किया था?
(क) किसी ने नहीं
(ख)इनमें से कोई नहीं
(ग) कवि के मित्रों ने
(घ) स्वयं कवि ने
(v) पद्यांश की अंतिम पंक्तियों में कवि की कोन-सी चारित्रिक विशेषता प्रकट होती हे?
क) प्रसन्न रहना
ख) जागरूकता
ग) दुखी रहना
घ) मित्रों के प्रति विनम्रता