Question 13 Marks
अपने मित्र को साङकेन के बारे में पूरे दिन का आँखों देखा वर्णन अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखकर बताइए। आपकी सहायता के लिए कुछ मुख्य संकेत बिंदु नीचे दिए गए हैं-
स्वागत, पकवान, शोभायात्रा, मूर्तियाँ, मंदिर, एक-दूसरे पर पानी डालना, मिल-जुलकर खुशी मनाना, पालकी, बाँस की खपच्चियाँ, भगवान बुद्ध का मंदिर, बौद्ध भिक्षु, होली, आशीर्वाद, घर, फूल
आप इन शब्दों के अतिरिक्त अन्य शब्दों की भी सहायता ले सकते हैं। ये शब्द आपकी अपनी भाषा से भी हो सकते हैं।
स्वागत, पकवान, शोभायात्रा, मूर्तियाँ, मंदिर, एक-दूसरे पर पानी डालना, मिल-जुलकर खुशी मनाना, पालकी, बाँस की खपच्चियाँ, भगवान बुद्ध का मंदिर, बौद्ध भिक्षु, होली, आशीर्वाद, घर, फूल
आप इन शब्दों के अतिरिक्त अन्य शब्दों की भी सहायता ले सकते हैं। ये शब्द आपकी अपनी भाषा से भी हो सकते हैं।
Answer
View full question & answer→प्रिय मित्र,
सप्रेम नमस्कार
हम यहाँ अरुणालच प्रदेश में कुशलपूर्वक हैं। आशा करती हूँ कि तुम भी वहाँ कुशल से होंगे ।
आज मैं तुम्हें अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध त्योहार साङकेन के बारे में बता रही हूँ, जिसे मैंने यहाँ के लोगों के साथ मिलकर मनाया। इस दिन यहाँ नववर्ष के रूप में मनाते हैं। यह तीन दिनों तक मनाया जाने वाला त्योहार है।
इसमें पहले दिन यहाँ के लोग बुद्ध व बौद्ध भिक्षुओं की मूर्तियाँ पालकी में लेकर शोभायात्रा निकाली। गाँव के लोगों ने मूर्तियों का स्वागत बड़ी धूम-धाम से किया । मूर्तियों को एक मंदिर में रखा गया, जिसे बाँस की खपच्चियों और फूलों से सजाया गया था। सभी लोगों ने भगवान बुद्ध के मंदिर में पूजा की तथा उन पर जल चढ़ाया। इसके बाद मैंने देखा की होली के जैसे ही ये लोग एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे। इस दिन यहाँ के घरों में स्वादिष्ट पकवान बनाए गए थे। सभी लोग मिल-जुलकर एक साथ खुशी मना रहे थे। तीसरे दिन मूर्तियों को बौद्ध विहार में वापस पालकी में लेकर रखा गया । बोद्ध भिक्षुओं ने गाँव के लोगों को खुशहाल व नया साल अच्छे से मनाने का आशीर्वाद दिया।
यह त्योहार बहुत शांति और भक्ति से भरा हुआ था। मुझे यह अनुभव बहुत अच्छा लगा। काश तुम भी यहाँ होती और यह आनंद ले पाती !
तुम्हारी सखी,
वल्लरी
सप्रेम नमस्कार
हम यहाँ अरुणालच प्रदेश में कुशलपूर्वक हैं। आशा करती हूँ कि तुम भी वहाँ कुशल से होंगे ।
आज मैं तुम्हें अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध त्योहार साङकेन के बारे में बता रही हूँ, जिसे मैंने यहाँ के लोगों के साथ मिलकर मनाया। इस दिन यहाँ नववर्ष के रूप में मनाते हैं। यह तीन दिनों तक मनाया जाने वाला त्योहार है।
इसमें पहले दिन यहाँ के लोग बुद्ध व बौद्ध भिक्षुओं की मूर्तियाँ पालकी में लेकर शोभायात्रा निकाली। गाँव के लोगों ने मूर्तियों का स्वागत बड़ी धूम-धाम से किया । मूर्तियों को एक मंदिर में रखा गया, जिसे बाँस की खपच्चियों और फूलों से सजाया गया था। सभी लोगों ने भगवान बुद्ध के मंदिर में पूजा की तथा उन पर जल चढ़ाया। इसके बाद मैंने देखा की होली के जैसे ही ये लोग एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे। इस दिन यहाँ के घरों में स्वादिष्ट पकवान बनाए गए थे। सभी लोग मिल-जुलकर एक साथ खुशी मना रहे थे। तीसरे दिन मूर्तियों को बौद्ध विहार में वापस पालकी में लेकर रखा गया । बोद्ध भिक्षुओं ने गाँव के लोगों को खुशहाल व नया साल अच्छे से मनाने का आशीर्वाद दिया।
यह त्योहार बहुत शांति और भक्ति से भरा हुआ था। मुझे यह अनुभव बहुत अच्छा लगा। काश तुम भी यहाँ होती और यह आनंद ले पाती !
तुम्हारी सखी,
वल्लरी