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काव्य – खंड - अग्नि पथ question types

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2
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Sample Questions

काव्य – खंड - अग्नि पथ questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

अग्नि पथ
अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!
वृक्ष हों भले खडे,
हों घने, हों बडे,
एक पत्र-छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत!
अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!

तू न थकेगा कभी!
तू न थमेगा कभी!
तू न मुड़ेगा कभी!-कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ!
अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!

यह महान दृश्य है-
चल रहा मनुष्य है
अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ!
अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!

प्रश्न :-
i. कवि क्या मांगने को मना कर रहे हैं?
$\quad$ (क) छांह $\quad$ (ख) अग्नि पथ $\quad$ (ग) सहायता $\quad$ (घ) पैसे

ii. प्रस्तुत पद्यांश में पत्र शब्द का क्या अर्थ है?
$\quad$ (क) वृक्ष $\quad$ (ख) पत्ती $\quad$ (ग) फूल $\quad$ (घ) छाया

iii. प्रस्तुत पदयांश में कवि किसकी शपथ लेने को बोल रहा?
$\quad$ (क) न रुकने का $\quad \quad \quad \quad \quad$ (ख) न थकने का
$\quad$ (ग) विकल्प क और ख दोनों $\quad$ (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

iv. प्रस्तुत पदयांश में स्वेद का क्या अर्थ है?
$\quad$ (क) पसीना $\quad$ (ख) आंसू $\quad$ (ग) खून $\quad$ (घ) पानी

v. प्रस्तुत पद्यांश में "अग्नि पथ" किसका प्रतीक है?
$\quad$ (क) संघर्ष का मार्ग $\quad$ (ख) सुखद यात्रा
$\quad$ (ग) विश्राम का स्थान $\quad$ (घ) विजय का पथ
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तू न थकेगा कभी! 
तू न थमेगा कभी!
तू न मुड़ेगा कभी ! कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ ! 
अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! 
यह महान दृश्य है-
चल रहा मनुष्य है 
अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ ! 
अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! 
(क) “तू न थकेगा कभी! तू न थमेगा कभी! तू न मुड़ेगा कभी!” — इन पंक्तियों में किस गुण को प्रमुखता दी गई है?
A. करुणा
B. संघर्षशीलता
C. भय
D. आलस्य
(ख) ‘यह महान दृश्य है— चल रहा मनुष्य है’ — में ‘महान दृश्य’ किसे कहा गया है?
A. पर्वतों को
B. युद्ध को
C. निरंतर संघर्ष करते मानव को
D. नदी की धार को
(ग) ‘अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ’ होने का तात्पर्य क्या है?
A. व्यक्ति का नाचना
B. परिश्रम, पीड़ा और संघर्ष से भरे जीवन का चित्रण
C. व्यक्ति का स्नान करना
D. त्यौहारों की खुशी
(घ) ‘अग्निपथ’ शब्द कविता में किसका प्रतीक है?
A. अग्नि में जलती हुई सड़क
B. सरल जीवन
C. संघर्षों और कठिनाइयों से भरी जीवन-यात्रा
D. खेल का मैदान
(ङ) इस कविता का मूल संदेश क्या है?
A. जीवन में सुख की तलाश करनी चाहिए
B. कठिनाइयों से डरकर पीछे हट जाना चाहिए
C. जीवन में दृढ़ संकल्प, साहस और निरंतरता से सफलता मिलती है
D. आराम को प्राथमिकता देना चाहिए
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अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! 
वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने, हों बड़े,
एक पत्र-छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत !
अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ !
तू न थकेगा कभी!
तू न थमेगा कभी!
तू न मुड़ेगा कभी !- कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ !
अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! 
(क) ‘अग्निपथ’ कविता में ‘अग्निपथ’ का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
A. जंगल में जलती हुई राह
B. जीवन की कठिनाइयों से भरी राह
C. त्योहार की शोभायात्रा
D. गर्मी में यात्रा करने का मार्ग
(ख) कविता में ‘एक पत्र-छाँह भी माँग मत’ कहने का तात्पर्य क्या है?
A. वृक्ष की छाया लेना गलत है
B. जीवन में आराम की इच्छा नहीं करनी चाहिए
C. पेड़ से छाया माँगना बुरा है
D. जंगल में चलना सरल है
(ग) ‘तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी’ — इन पंक्तियों से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
A. यात्रा बंद कर देनी चाहिए
B. थक कर बैठ जाना ठीक है
C. निरंतर संघर्ष करते रहो
D. पीछे मुड़कर देखना ज़रूरी है
(घ) कविता में किस मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई है?
A. सरल और आरामदायक
B. कांटों और संघर्ष से भरा
C. मनोरंजक और हर्षोल्लासपूर्ण
D. खेलों से युक्त
(ङ) कविता का मूल उद्देश्य क्या है?
A. डर से भागने की प्रेरणा देना
B. आलस्य अपनाने की सलाह
C. जीवन में साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ना
D. दुखों से बचने का तरीका बताना
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“अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ!” पंक्ति का अर्थ अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए?
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