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2 Marks Question(पद्य)

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Question 12 Marks
कवि इस कविता में मनुष्य से क्या अपेक्षा कर रहा है?
Answer
कवि इस कविता के माध्यम से मनुष्य को उपदेश देते हुए बता रहे हैं कि हे मनुष्य चाहे तेरी जिंदगी में जितनी भी विपत्तियां आए तुझे किसी की सहायता लिए बिना और बिना पीछे मुड़े ही उन सभी विपत्तियों का साहस पूर्वक सामना करना है।
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Question 22 Marks
“अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ!” पंक्ति का अर्थ अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए?
Answer
कवि ने अश्रु स्वेद रक्त शब्द मनुष्य के जीवन के तीन प्रमुख स्थितियों और भाव के बारे में इस्तेमाल किया है।
कवि कहते हैं कि हे! मनुष्य तू इस अग्निपथ पर चलते हुए शपथ खा कि तू कभी रुकेगा नहीं, ना कभी थकेगा न ही तू पीछे मुड़कर देखेगा। इस महान अग्निपथ में जो भी साहसी मनुष्य आंसू, पसीना और खून से लथपथ होकर अपने पथ में आगे बढ़ता है वही सफलता प्राप्त करता है।
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Question 32 Marks
कवि ने अग्निपथ शब्द किसके लिए इस्तेमाल किया है?
Answer
कवि ने अग्निपथ शब्द मनुष्य के जीवन में आने वाली कठिनाइयों के लिए इस्तेमाल किया है।
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Question 42 Marks
अग्निपथ कविता का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए?
Answer
कवि ने अग्निपथ कविता के माध्यम से जीवन रूपी अग्नि से युक्त पथ की व्याख्या की है और बताया है कि चाहे जितनी बड़ी समस्याएं हो और चाहे जो भी आपकी सहायता के लिए खड़ा हो लेकिन आपको उन सभी समस्याओं को पार करना है और किसी की भी सहायता नहीं लेनी है।
हे! मनुष्य तू इस अग्निपथ पर चलते हुए शपथ खा कि तू कभी रुकेगा नहीं, ना कभी थकेगा न ही तू पीछे मुड़कर देखेगा। इस महान अग्निपथ में जो भी साहसी मनुष्य आंसू, पसीना और खून से लथपथ होकर अपने पथ में आगे बढ़ता है वही सफलता प्राप्त करता है। कवि के अनुसार यही जीवन का सबसे बड़ा और महान दृश्य है।
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Question 52 Marks
कवि महान दृश्य किसको बोल रहा है?
Answer
जीवन के अग्निपथ में दृढ़ता से चलता हुआ मनुष्य आंसू, पसीना और खून से लथपथ है लेकिन फिर भी हार नहीं मान रहा है। कवि इसी दृश्य को महान दृश्य बोल रहा है। 
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Question 62 Marks
कवि ने मनुष्य को किस की शपथ लेने के लिए कहा है?
Answer
कवि ने मनुष्य को कभी न थकने कभी न रुकने और कभी पीछे न मुड़ने की शपथ लेने के लिए कहा है। 
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Question 72 Marks
कवि ने इस कविता का नाम अग्निपथ क्यों रखा है?
Answer
कवि ने इस कविता का नाम अग्निपथ इसलिए रखा है क्योंकि यह कविता मनुष्य के जीवन में आने वाले संकट और इस संकट में दृढ़ता से खड़े होने का उपदेश देती है। 
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Question 82 Marks
एक पत्र-छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत! पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए?
Answer
प्रस्तुत पंक्ति में कवि यह बताना चाह रहे हैं कि हे मनुष्य तुझे चाहे जितनी विपत्ति आ जाए तू किसी से एक पत्ते की छाया बराबर भी सहायता नहीं मांगेगा। 
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Question 92 Marks
“एक पत्र-छाँह भी माँग मत’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer
इस पंक्ति का आशय है-मनुष्य जीवन के कष्ट भरे रास्तों पर चलते हुए थोड़ा-सा भी आराम या सुविधा न माँगे। वह निरंतर कष्टों से जूझता रहे।
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Question 102 Marks
‘माँग मत’, ‘कर शपथ’, ‘लथपथ’ इन शब्दों का बार-बार प्रयोग कर कवि क्या कहना चाहता है?
Answer
“माँग मत’, ‘कर शपथ’ तथा ‘लथपथ’ शब्दों का बार-बार प्रयोग करके कवि मनुष्य को कष्ट सहने के लिए तैयार करना चाहता है। वह चाहता है कि मनुष्य आँसू, पसीने और खून से लथपथ’ होने पर भी राहत और सुविधा न माँगे। वह कष्टों को रौंदता हुआ आगे बढ़ता जाए और संघर्ष करने की शपथ ले।
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Question 112 Marks
कवि ने ‘अग्नि पथ’ किसके प्रतीक स्वरूप प्रयोग किया है?
Answer
कवि ने ‘अग्नि पथ’ जीवन के कठिनाई भरे रास्ते के लिए प्रयुक्त किया है। कवि का मानना है कि जीवन में पग-पग पर संकट हैं, चुनौतियाँ हैं और कष्ट हैं। इस प्रकार यह जीवन संघर्षपूर्ण है।
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2 Marks Question(पद्य) - HINDI - B (स्पर्श) STD 9 Questions - Vidyadip