ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै।
गरीब निवाजु गुसईआ मेरा माथै छत्रु धेरै ।।
जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै।
नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै ।।
नामदेव कबीरु तिलोचनु सधना सैनु तरै।
कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरिजीउ ते सधै सरै ।।
(क)"ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै" – इस पंक्ति में 'लाल' शब्द का क्या अर्थ है?
(A) लाल रंग
(B) प्रिय या ईश्वर
(C) राजा
(D) धन
(ख)"गरीब निवाजु गुसईआ मेरा माथै छत्रु धेरै" – इस पंक्ति से क्या भाव प्रकट होता है?
(A) ईश्वर केवल अमीरों की सहायता करता है
(B) कवि को राजसी सम्मान चाहिए
(C) ईश्वर गरीबों का उद्धार करता है और उसकी कृपा कवि पर है
(D) कवि युद्ध चाहता है
(ग) "नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै" – इस पंक्ति का क्या अभिप्राय है?
(A) ईश्वर डरता है
(B) ईश्वर ऊँच को नीच करता है
(C) ईश्वर जात-पात, ऊँच-नीच से परे है और सबको समान दृष्टि से देखता है
(D) कवि डर गया है
(घ) कविता में किन संतों के नाम का उल्लेख हुआ है?
(A) तुलसीदास और सूरदास
(B) कबीर, नामदेव, तिलोचन, सधना, सैन
(C) मीरा, तुलसी, रवि
(D) शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद
(ङ)"कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरिजीउ ते सधै सरै" – इस अंतिम पंक्ति का आशय क्या है?
(A) ईश्वर से कुछ नहीं होता
(B) साधु-संतों को भगवान से डरना चाहिए
(C) ईश्वर के भरोसे ही सब कार्य सिद्ध होते हैं
(D) भगवान केवल साधु की सहायता करते हैं
गरीब निवाजु गुसईआ मेरा माथै छत्रु धेरै ।।
जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै।
नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै ।।
नामदेव कबीरु तिलोचनु सधना सैनु तरै।
कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरिजीउ ते सधै सरै ।।
(क)"ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै" – इस पंक्ति में 'लाल' शब्द का क्या अर्थ है?
(A) लाल रंग
(B) प्रिय या ईश्वर
(C) राजा
(D) धन
(ख)"गरीब निवाजु गुसईआ मेरा माथै छत्रु धेरै" – इस पंक्ति से क्या भाव प्रकट होता है?
(A) ईश्वर केवल अमीरों की सहायता करता है
(B) कवि को राजसी सम्मान चाहिए
(C) ईश्वर गरीबों का उद्धार करता है और उसकी कृपा कवि पर है
(D) कवि युद्ध चाहता है
(ग) "नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै" – इस पंक्ति का क्या अभिप्राय है?
(A) ईश्वर डरता है
(B) ईश्वर ऊँच को नीच करता है
(C) ईश्वर जात-पात, ऊँच-नीच से परे है और सबको समान दृष्टि से देखता है
(D) कवि डर गया है
(घ) कविता में किन संतों के नाम का उल्लेख हुआ है?
(A) तुलसीदास और सूरदास
(B) कबीर, नामदेव, तिलोचन, सधना, सैन
(C) मीरा, तुलसी, रवि
(D) शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद
(ङ)"कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरिजीउ ते सधै सरै" – इस अंतिम पंक्ति का आशय क्या है?
(A) ईश्वर से कुछ नहीं होता
(B) साधु-संतों को भगवान से डरना चाहिए
(C) ईश्वर के भरोसे ही सब कार्य सिद्ध होते हैं
(D) भगवान केवल साधु की सहायता करते हैं