Question 15 Marks
अपने विद्यालय के नाट्य उत्सव के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करने के लिए एक प्रतिष्ठित नाटककार को आमंत्रित करने आप उनसे मिलते हैं। आप दोनों के बीच हुए संवाद को लगभग 50 शब्दों में लिखिए।
Answer
View full question & answer→मैं: नमस्कार सर, क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?
रविनारायण : हाँ बेटे, अंदर आओ।
मैं: धन्यवाद सर।
रविनारायण : बैठो बेटा, बताओ कैसे आना हुआ?
मैं: श्रीमान, हमारे विद्यालय में अगले सप्ताह शनिवार को नाट्य उत्सव समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसमें मुझे आपकी सहायता की आवश्यकता है।
रविनारायण : बोलो बेटे, मैं किस प्रकार तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ?
मैं : श्रीमान, हमारे प्रधानाचार्य महोदय और हम सभी विद्यार्थी चाहते हैं कि इस अवसर पर उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता हेतु आप विद्यालय में पधारें।
रविनारायण : ठीक है बेटा, मैं अवश्य आऊँगा। यह बताओ कि तुम सब विद्यार्थी इस अवसर पर विद्यालय में कौन से नाटक का मंचन कर रहे हो?
मैं: श्रीमान, हमारे विद्यालय में महाकवि कालिदास द्वारा रचित नाटक अभिज्ञान शाकुंतलम का मंचन किया जा रहा है।
रविनारायण : अरे वाह ! ये तो बहुत सुंदर नाटक है।
मैं: जी श्रीमान, तो आप इस अवसर पर पधार रहे हैं?
रविनारायण : जी बेटा, मैं जरुर आऊँगा।
मैं : ठीक है श्रीमान, अब मुझे आज्ञा दीजिए, नमस्कार श्रीमान।
रविनारायण : हाँ बेटे, अंदर आओ।
मैं: धन्यवाद सर।
रविनारायण : बैठो बेटा, बताओ कैसे आना हुआ?
मैं: श्रीमान, हमारे विद्यालय में अगले सप्ताह शनिवार को नाट्य उत्सव समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसमें मुझे आपकी सहायता की आवश्यकता है।
रविनारायण : बोलो बेटे, मैं किस प्रकार तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ?
मैं : श्रीमान, हमारे प्रधानाचार्य महोदय और हम सभी विद्यार्थी चाहते हैं कि इस अवसर पर उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता हेतु आप विद्यालय में पधारें।
रविनारायण : ठीक है बेटा, मैं अवश्य आऊँगा। यह बताओ कि तुम सब विद्यार्थी इस अवसर पर विद्यालय में कौन से नाटक का मंचन कर रहे हो?
मैं: श्रीमान, हमारे विद्यालय में महाकवि कालिदास द्वारा रचित नाटक अभिज्ञान शाकुंतलम का मंचन किया जा रहा है।
रविनारायण : अरे वाह ! ये तो बहुत सुंदर नाटक है।
मैं: जी श्रीमान, तो आप इस अवसर पर पधार रहे हैं?
रविनारायण : जी बेटा, मैं जरुर आऊँगा।
मैं : ठीक है श्रीमान, अब मुझे आज्ञा दीजिए, नमस्कार श्रीमान।