Question 15 Marks
आपने हाल में ही किसी पर्वतीय स्थल की यात्रा की, जिसका आपको काफी रोचक अनुभव हुआ। इस अनुभव को बताते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए।
Answer
View full question & answer→p-275 पालम,
नई दिल्ली।
27 फरवरी, 2019
प्रिय मोहित,
तुम्हारा पत्र मिला। तुम सपरिवार सकुशल हो, यह जानकर प्रसन्नता हुई। तुमने मुझसे मेरी यात्रा के बारे में जानना था, उसी यात्रा का अनुभव में इस पत्र में लिखकर भेज रहा हूँ।
मित्र, मैंने नवंबर महीने के अंतिम सप्ताह में जम्मू स्थित वैष्णों देवी की यात्रा का कार्यक्रम बनाया, जिसके लिए मैंने करीब एक माह पूर्व ही आरक्षण करा लिया था। ट्रेन से जम्मू और वहाँ से बस द्वारा हम सात बजे तक कटरा पहुँच गए। वहाँ से ग्यारह बजे रात्रि में कुछ कपड़े लेकर वैष्णों देवी पैदल चलना प्रारंभ किया। बाण गंगा पार करते ही चढ़ाई में हम अर्धक्कारी, हाथी मत्था, सांझीछत की कठिन चढ़ाई पार करते हुए प्रातः काल वैष्णों देवी पहुँच गए। वहाँ के शीतल जल में स्नान करने से सारी थकान दूर हो गयी। वहाँ दर्शन कर हम दो घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद भैंरो धाम गए। वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य ने मन हर लिया। चारों ओर ऊँचे-ऊँचे पहाड़, उनके पास उड़ते बादल, हरे-भरे पेड़ किसी और ही दुनिया में होने का एहसास करा रहे थे। वहाँ से लौटने की मन नहीं था पर लौटना तो था ही। प्रकृति की गोद में बसे इस स्थान की यात्रा हेतु तुम यदि जाओ तो इसका प्रत्यक्ष अनुभव कर
सकोगे। शेष सब ठीक है।
अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
राहुल
नई दिल्ली।
27 फरवरी, 2019
प्रिय मोहित,
तुम्हारा पत्र मिला। तुम सपरिवार सकुशल हो, यह जानकर प्रसन्नता हुई। तुमने मुझसे मेरी यात्रा के बारे में जानना था, उसी यात्रा का अनुभव में इस पत्र में लिखकर भेज रहा हूँ।
मित्र, मैंने नवंबर महीने के अंतिम सप्ताह में जम्मू स्थित वैष्णों देवी की यात्रा का कार्यक्रम बनाया, जिसके लिए मैंने करीब एक माह पूर्व ही आरक्षण करा लिया था। ट्रेन से जम्मू और वहाँ से बस द्वारा हम सात बजे तक कटरा पहुँच गए। वहाँ से ग्यारह बजे रात्रि में कुछ कपड़े लेकर वैष्णों देवी पैदल चलना प्रारंभ किया। बाण गंगा पार करते ही चढ़ाई में हम अर्धक्कारी, हाथी मत्था, सांझीछत की कठिन चढ़ाई पार करते हुए प्रातः काल वैष्णों देवी पहुँच गए। वहाँ के शीतल जल में स्नान करने से सारी थकान दूर हो गयी। वहाँ दर्शन कर हम दो घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद भैंरो धाम गए। वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य ने मन हर लिया। चारों ओर ऊँचे-ऊँचे पहाड़, उनके पास उड़ते बादल, हरे-भरे पेड़ किसी और ही दुनिया में होने का एहसास करा रहे थे। वहाँ से लौटने की मन नहीं था पर लौटना तो था ही। प्रकृति की गोद में बसे इस स्थान की यात्रा हेतु तुम यदि जाओ तो इसका प्रत्यक्ष अनुभव कर
सकोगे। शेष सब ठीक है।
अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
राहुल