23 मई, 1984 के दिन दोपहर के एक बजकर सात मिनट पर मैं एवरेस्ट की चोटी पर खड़ी थी। एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाली मैं प्रथम भारतीय महिला थी। एवरेस्ट शंकु की चोटी पर इतनी जगह नहीं थी की दो व्यक्ति साथ-साथ खड़े हो सकें। चारों तरफ हजारों मीटर लंबी सीधी ढलान को देखते हुए हमारे सामने प्रश्न सुरक्षा का था। हमने पहले बर्फ के फावड़े से बर्फ की खुदाई कर अपने आपको सुरक्षित रूप से स्थिर किया। इसके बाद, मैं अपने घुटनों के बल बैठी, बर्फ पर अपने माथे को लगाकर मैंने 'सागरमाथे' के ताज का चुबनं लिया। बिना उठे ही मैंने अपने थैले से दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा निकाला। मैंने इनको अपने साथ लाए लाल कपड़े में लपेटा, छोटी-सी पूजा-अर्चना की और इनको बर्फ में दबा दिया। आनंद के इस क्षण में मुझे अपने माता-पिता का ध्यान आया।
(i) लेखिका ने एवरेस्ट पर पहुँचकर सबसे पहले क्या किया?
क) अपने भाग्य को सराहा
ख) अपने साथियों का धन्यवाद किया
ग) एवरेस्ट की बर्फ को माथे से लगाया
घ) झंडा फहराया
(ii) एवरेस्ट के शिखर की क्या स्थिति थी?
क) वहाँ हवा अधिक ठंडी नहीं थी
ख) वहाँ इतना कम स्थान था कि दो व्यक्ति एक साथ खड़े नहीं हो सकते थे
ग) वहाँ बहत विस्तृत स्थान था
घ) वहाँ बहुत सी झाड़ियाँ खड़ी थीं
(iii) लेखिका एवरेस्ट पर चढ़ने वाली कौन-सी महिला बनी?
क) चौथी
ख) पहली
ग)तीसरी
घ) दूसरी
(iv) लेखिका ने हनुमान चालीसा को कहाँ रखा?
क) बेस कैंप में रख दिया
ख) अपने झंडे के ऊपर रख दिया
ग) तेनजिंग के कमरे में रख दिया
घ) बर्फ के नीचे दबा दिया
(v) आनंद के क्षण में लेखिका को किसका ध्यान आया?
क) अपने मित्र का
ख) अपने गुरु का
ग) अपने माता-पिता का
घ) अपने सहयोगी का
