Question 16 Marks
जिस देश का अन्न$-$जल ग्रहण कर हम बढ़ते हैं और जीवित रहते हैं, उस देश की सेवा करना तथा उसका हितचिंतन करना हमारा पहला कर्तव्य है । तन$-$मन$-$धन से अपने देश की सेवा करने का नाम ही स्वदेश सेवा है । स्वदेश$-$सेवा में सर्वस्व लगाना ही जीवन की सफलता है । यह विवादरहित है कि किसी भी देश की सेवा का भार उसी देश के रहनेवालों पर होता है । देश पर जब किसी प्रकार की आपत्ति आती है, तब कायर भी वीर बन जाते हैं । हमें तब यह विचार आता है कि वे सब वस्तुएँ जिनकी हम प्रतिष्ठा करते हैं, जिनका नाम लेते हैं, जिनको पवित्र समझते हैं, जिनसे प्रेम करते हैं $-$नष्ट$-$भ्रष्ट हो जायेंगी और यही विचार देशवासियों को चंडी के जैसा प्रचंड रूप धारण करने के लिए बाध्य कर देता है । जब देश किसी प्रकार विपद्ग्रस्त होता है, उस समय जो लोग जीवन को तृणवत् जानकर, स्वार्थ त्यागकर देश की रक्षा को ही अपना कर्तव्य समझते हैं, उनके नाम इतिहास में अमर हो जाते हैं । उनको महापुरुष नहीं, देवता मानकर लोग पूजते हैं ।प्रश्न :
$\text{Q}.1.$ स्वदेश सेवा से क्या तात्पर्य है ?
$\text{Q}.2.$ देश के प्रति हमारा परम कर्तव्य क्या है ? क्यों ?
$\text{Q}.3.$ किनके नाम इतिहास में अमर हो जाते हैं ?
$\text{Q}.4.$ इस गद्यखंड के लिए उचित शीर्षक दीजिए ।
View full question & answer→Question 26 Marks
मानव के व्यक्तित्व का निर्माण करनेवाले विभिन्न तत्त्वों में चरित्र का सबसे अधिक महत्त्व है । चरित्र एक ऐसी शक्ति है जो मानवजीवन को साफल बनाती है । चरित्र की शक्ति ही आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता उत्पन्न करती है । चरित्र मनुष्य के क्रिया-कलाप और आचरण के समूह का नाम है । चरित्ररूपी शक्ति के सामने पाशविक शक्ति भी नष्ट हो जाती है । चरित्र की शक्ति विद्या, बुद्धि और संपत्ति से भी महान होती है । इतिहास इस बात का साक्षी है कि कई चक्रवर्ती सम्राट धन, पद, वस्तु और विद्या के स्वामी थे, चरित्र के अभाव में अस्तित्वविहीन हो गए ।प्रश्न:
$\text{Q}.1.$ चरित्र का क्या महत्त्व है ?
$\text{Q}.2.$ चरित्र का मानवजीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
$\text{Q}.3.$ चरित्र किसे कहते हैं ?
$\text{Q}.4.$ इस गद्यखंड को उचित शीर्षक दीजिए ।
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प्रेम एक ऐसी अलौकिक शक्ति है, जिससे मनुष्य को अनंत लाभ होते हैं । प्रेम से मानसिक विकार दूर होते हैं, विचारों में कोमलता आती है, सदद्गुणों की सृष्टि होती है, दुःखों का नाश और सुखों की वृद्धि होती है और तक कि मनुष्य की आयु भी बढ़ती है । प्रेम ही मनुष्य को साहसी, धीर और सहनशील बना देता है । बिना प्रेम के अच्छी सुख$-$सामग्री भी हमें तनिक भी प्रसन्न नहीं कर सकती, पर प्रेम की सहायता से हम बिना और किसी सुख$-$सामग्री के भी परम सुखी हो सकते हैं । अतः प्रत्येक मनुष्य को अपना को स्वभाव मिलनसार और प्रेमपूर्ण बनाना चाहिए ।प्रश्न :
$\text{Q}.1.$ प्रेम से क्या लाभ होते हैं ?
$\text{Q}.2.$ मनुष्य का स्वभाव कैसा होना चाहिए ?
$\text{Q}.3.$ प्रेम के बिना मनुष्य का जीवन कैसा हो जाता है ?
$\text{Q}.4.$इस गद्यखंड के लिए एक उचित शीर्षक दीजिए ।
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पुस्तक का मानवजीवन में बहुत महत्त्व है । मानव ने सर्वप्रथम पुस्तक का आरंभ अपने अनुभूत ज्ञान को विस्मृति से बचाने के लिए किया था। विकास के आदिकाल में पत्ते, ताड़पत्र, कांस्यपत्र आदि साधन इस ज्ञानसंग्रह के सहायक रहे हैं, ऐसा पुस्तक का इतिहास स्वयं बताता है । पुस्तकें मानव को अपना अनुभव विस्तृत करने में सहायक होती हैं, साथ ही उन्होंने अपने पूर्वजों के सभी प्रकार के कृत्यों को जीवित रखने की जिम्मेदारी भी सँभाली हुई है । आज के युग में प्राचीन वीरों, धार्मिक महात्माओं, ऋषियों, नाटककारों, कवियों आदि का पता हम इन्हीं पुस्तकों के सहारे पाते हैं । पुस्तकें ही अंतरराष्ट्रीय विचारक्षेत्र में विभिन्न देशों के दृष्टिकोणों को एक आधार पर सोचने के लिए बाध्य करती हैं ।प्रश्न:
$\text{Q}.1.$ मानव ने पुस्तक का आरंभ किसलिए किया था ?
$\text{Q}.2.$ विकास के आदिकाल में ज्ञानसंग्रह के कौन$-$से साधन थे ?
$\text{Q}.3.$ पुस्तकों से हमें किनकी जानकारी मिलती है ?
$\text{Q}.4.$ उपर्युक्त गद्यखंड के लिए उचित शीर्षक दीजिए ।
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मैं नहीं जानता कि 'पढ़ाई में सुंदर लेखन आवश्यक नहीं है', यह गलत ख्याल मुझे कैसे हो गया था, पर ठेठ विलायत जाने तक यह बना रहा । बाद में और खास करके दक्षिण अफ्रीका में, जब मैंने वकीलों के तथा दक्षिण अफ्रीका में जन्मे और पढ़े$-$लिखे नवयुवकों के मोती के दानों जैसे अक्षर देखे, मैं शरमाया और पछताया । मैंने अनुभव किया कि खराब अक्षर अधूरी शिक्षा की निशानी मानी जानी चाहिए । बाद में मैंने अक्षर सुधारने का प्रयत्न किया, पर पक्के घड़े पर कहीं गला जुड़ता है ? जवानी में मैंने जिसकी उपेक्षा की, उसे मैं आज तक सुधार नहीं सका ।प्रश्न :
$\text{Q}.1.$ गांधीजी को कौन$-$सा गलत ख्याल हो गया था ? वह कब तक जारी रहा ?
$\text{Q}.2.$ दक्षिण अफ्रीका के वकीलों और नवयुवकों के अक्षरों का गांधीजी पर क्या असर पड़ा था ?
$\text{Q}.3.$ गांधीजी प्रयत्न करने पर भी अपने अक्षर क्यों न सुधार सके ?
$\text{Q}.4.$ इस परिच्छेद के लिए एक उचित शीर्षक दीजिए ।
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गौतम बुद्ध का जीवन परम पवित्र और परम दिव्य था । उनके विचारों में अपूर्व उज्ज्वलता थी और वाणी में माधुर्य था । उनके उपदेशों में एक ऐसा आकर्षण था कि राजा$-$रंक सभी उनकी ओर खिंच जाते । अशोक, कनिष्क, हर्ष आदि शक्तिशाली राजाओं ने उनके धर्म को ग्रहण किया । उन्होंने संसार को स्नेह और शांति का संदेश दिया । बुद्ध के उपदेशों का भारत और देशांतरों पर अच्छा प्रभाव पड़ा । सर्वत्र प्राकृत का प्रचार हुआ, और भारतीय कला तथा साहित्य का प्रसार हुआ ।प्रश्न :
$\text{Q}.1.$ गौतम बुद्ध के उपदेशों का राजा और रंक पर क्या प्रभाव पड़ा ?
$\text{Q}.2.$ बुद्ध के विचार तथा वाणी के बारे में क्या कहा गया है ?
$\text{Q}.3.$ गौतम बुद्ध ने संसार को कौन$-$सा संदेश दिया ?
$\text{Q}.4.$ इस गद्यखंड के लिए उचित शीर्षक दीजिए ।
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भावी नागरिक निर्माण करने की जिम्मेदारी शिक्षक के ऊपर है । वह उसके शारीरिक, मानसिक तथा नैतिक विकास का जनक है; जिस पर व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र निर्भर है । शिक्षक के ही द्वारा कोई योग्य सैनिक बन सकता है । आज शिक्षक ने सैनिक धाराओं में क्रांति पैदा कर दी है । हमारे अहिंसक आंदोलन ने दुनिया को दिखा दिया है कि शिक्षक सैनिकों से कहीं श्रेष्ठ है । इसे बनावटी शस्त्रों की जरूरत नहीं है । इसका आत्मिक बल सब शस्त्रों से बड़ा है ।प्रश्न:
$\text{Q}.1.$ शिक्षक के ऊपर कौन$-$सी जिम्मेदारी है ?
$\text{Q}.2.$ योग्य सैनिक किसके द्वारा बन सकता है ?
$\text{Q}.3.$ हमारे अहिंसक आंदोलन ने दुनिया को क्या दिखा दिया है ?
$\text{Q}.4.$ शिक्षक का शस्त्र कौन$-$सा है ?
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झाँसी में अनेक रानियाँ हुई हैं, किन्तु वे केवल झाँसी के राजा की रानियाँ थीं, झाँसी की नहीं । झाँसी की तो केवल एक ही रानी थी, जिसे लक्ष्मीबाई के नाम से पढ़े$-$लिखे लोग जानते हैं । वे भले ही उसे महारानी लक्ष्मीबाई के उदात्त नाम से पुकारें, परंतु महारानी का सबसे अधिक उपयुक्त नाम 'झाँसी की रानी' ही है । इसी नाम से उनके शत्रुओं ने उन्हें जाना, इसी नाम से उन्हें भारतवर्ष का बच्चा$-$बच्चा जानता है और इसी नाम से भारत की भावी संतान भी उन्हें पहचानेगी ।प्रश्न :
$\text{Q}.1.$ कुछ पढ़े$-$लिखे लोग किस रानी को जानते हैं ?
$\text{Q}.2.$ महारानी का सबसे अधिक उपयुक्त नाम क्या है ?
$\text{Q}.3.$ लक्ष्मीबाई को 'झाँसी की रानी' के नाम से कौन$-$कौन जानते हैं ?
$\text{Q}.4.$ इस गद्यखंड को उचित शीर्षक दीजिए ।
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बापू का स्पष्ट मत था कि स्वर्ग का राज्य बच्चों के लिए है, बच्चों के सिवा उसमें कोई प्रवेश नहीं कर पाता, क्योंकि बच्चे निर्दोष हुआ करते हैं । उनके जैसा छलरहित, निष्पाप और भोला$-$भाला संसार में हुआ दूसरा कोई नहीं । अगर किसी बच्चे में अवगुण हैं, कोई बुराई है तो यह उसका दोष नहीं, उसके आसपास रहनेवाले व्यक्तियों का दोष है, क्योंकि बच्चा जो कुछ सीखता है अपने आसपास के वातावरण से ही सीखता है । बच्चों को पीटना बापू की दृष्टि में एक महापाप है । कारण कोई भी हो, कैसा भी अपराध हो गया हो, भय दिखाकर या मार$-$पीटकर बच्चे के साथ दुर्व्यवहार करना कभी उचित नहीं । बच्चों की गलतियों को उन्हें प्रेम$-$स्नेह से समझा देना चाहिए । ऐसा करने से उनमें सुधार हो जाता है ।प्रश्न :
$\text{Q}.1.$ बापू की दृष्टि से क्या करना महापाप है ?
$\text{Q}.2.$ बापू बच्चों के सुधार के लिए कौन$-$सा मार्ग बताते हैं ?
$\text{Q}.3.$ बापू के मतानुसार बच्चे किसके अधिकारी हैं ? क्यों ?
$\text{Q}.4.$ इस गद्यखंड के लिए एक उचित शीर्षक दीजिए ।
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उन्नति के पथ पर चलनेवाला छात्र प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व ही उठ जाता है । नित्यकर्म से निवृत्त होकर वह स्नान करता है । तत्पश्चात भगवान से प्रार्थना करता है कि वह सदा उसका पथ$-$प्रदर्शक रहे । पूजन के बाद व्यायाम करना उत्तम छात्र के लिए आवश्यक है । इसके बिना शरीर सबल, सुंदर और सुगठित नहीं हो सकता । जिस मंदिर में सुंदरता न हो, उसमें विराजमान होनेवाली मूर्ति कभी सुंदर नहीं हो सकती । व्यायाम के बाद थोड़ा जलपान करना अत्यंत हितकर होता है । उसके बाद दैनिक समाचारपत्र भी देखना चाहिए, ताकि संसार, देश, नगर तथा पड़ोस की गतिविधियों का परिचय मिल जाए । इसका ज्ञान न होने से कभी$-$कभी बड़ी हानि होती है ।समाचार पठन के पश्चात् विद्यार्थी अपने पाठ्यविषय का अध्ययन करता है, उस पर विचार तथा नवीन अभ्यास का प्रयत्न करता है ।
प्रश्न :
$\text{Q}.1.$ उन्नति के पथ पर चलनेवाला छात्र प्रातःकाल में कब उठता है ?
$\text{Q}.2.$ स्नान करने के बाद उसे भगवान की प्रार्थना क्यों करनी चाहिए ?
$\text{Q}.3.$ छात्र के लिए व्यायाम क्यों आवश्यक माना गया है ?
$\text{Q}.4.$ उपर्युक्त गद्यखंड के लिए उचित शीर्षक दीजिए ।
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महाराष्ट्र में औरंगाबाद शहर से $110$ किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में अजंता की जगप्रसिद्ध गुफाएँ हैं । यहाँ कुल तीस गुफाएँ हैं । विद्वानों के मतानुसार यहाँ की गुफाओं का निर्माण कार्य ई. स. दूसरी से ई. स. सातवीं शताब्दी तक चला होगा । शिल्प तथा चित्र अधिकांशतः सभी भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित हैं । कार्य इतना अनूठा है कि सभी दर्शक देखकर दंग रह जाते हैं । अपनी दर्शनीयता के साथ$-$साथ वे प्राचीन भारतीय संस्कृति की सुंदर झाँकी भी प्रस्तुत करते हैं । उदाहरणार्थ$-$ स्त्रियों की केशभूषा, वेषभूषा, उनके नानाविध अलंकार इत्यादि । यहाँ के चित्रों के रंगों के बारे में कुछ कह पाना भी असंभव है । वे अब भी ऐसे चमकते हैं, जैसे आज ही रंगे गए हों ।
प्रश्न : $\text{Q}.1.$ अजंता की कला किसकी जीवन$-$कथा प्रस्तुत करती है ?
$\text{Q}.2.$ अजंता के चित्र किसकी झाँकी प्रस्तुत करते हैं ?
$\text{Q}.3.$ अजंता की गुफाओं का निर्माण कब हुआ ?
$\text{Q}.4.$ इस गद्यखंड के लिए उचित शीर्षक दीजिए ।
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विद्यार्थी के लिए शिक्षक ही उसका आदर्श होता है, लेकिन भीड़ भरी कक्षाओं में शिक्षक के लिए यह संभव नहीं हो पाता कि वह अपने प्रत्येक विद्यार्थी और उसकी समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से जान सके । कार्य में अत्यधिक बोझ और शिक्षापद्धति की औपचारिकताओं को पूरा करने में ही उसकी संपूर्ण शक्ति व समय समाप्त हो जाता है । विद्यार्थी केवल इस कुंठा से ही ग्रसित नहीं रहते कि उनका शिक्षक उनका नाम तक नहीं जानता, बल्कि अपनी संपूर्ण असुविधाओं के कारण भी शिक्षकों की उदासीनता ही समझते हैं । शिक्षा के क्षेत्र में संपूर्ण देश के लिए कोई समान नीति न होने से भी विद्यार्थियों के आक्रोश में वृद्धि होती है । वर्तमान शिक्षा नौकरशाही बाबू तैयार करती है । लेकिन तब अपनी आयु का आधा भाग डिग्री प्राप्त करने के पश्चात् दर-दर भटकने के बाद भी उसे कहीं रोजगार प्राप्त नहीं होता तो वह उग्र रूप धारण कर लेता है ।प्रश्न:
$ \text{Q}.1.$ शिक्षक विद्यार्थी की ओर व्यक्तिगत रूप से क्यों ध्यान नहीं दे पाता ?
$\text{Q}.2.$ डिग्री प्राप्त विद्यार्थी आज उग्र रूप क्यों धारण कर लेता है ?
$\text{Q}.3.$ वर्तमान शिक्षा की क्या नीति है ?
$\text{Q}.4.$ इस परिच्छेद के लिए एक उचित शीर्षक दीजिए ।
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मनुष्य तो मनुष्य है । पशु$-$पक्षी जहाँ जन्म लेते हैं, अपने उस देश को प्रेम करते हैं । जंगल में पैदा हुए किसी जानवर को आप पिंजड़े में बंद कर सकते हैं, उसे लाख आराम पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं, पर वह सुखी नहीं हो सकता । उसे तो अपने जंगल का देश ही प्यारा लगता है । उसी तरह मुक्त आकाश में उड़नेवाले पक्षी को पिंजड़े में बंद कर सब तरह का सुख पहुँचाना चाहें, तो भी वह कदापि सुखी नहीं हो सकता । उसका देश खुला आकाश, पेड़ों की शाखाएँ और घोंसला है । वहाँ वह धूप, वर्षा और ठंड के कष्ट सहकर भी सुखी रह सकता है ।
प्रश्न : $\text{Q}.1.$ पिंजड़े में बंद जंगली जानवर सुखी क्यों नहीं हो सकता ?
$\text{Q}.2.$ पक्षी का देश कौन$-$सा है ?
$\text{Q}.3.$ इस गद्यखंड से हमें क्या सीख मिलती है ?
$\text{Q}.4.$ इस गद्यखंड को उचित शीर्षक दीजिए ।
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