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अपठित विभाग question types

5 questions across 1 question group — pick any mix to generate a हिन्दी लोकभारती paper with step-by-step answer keys.

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Sample Questions

अपठित विभाग questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

1:आकलन कृति :
(१) उत्तर लिखिए :
(i) लेखक ने पहली बार विमान यहाँ देखा -
(ii) लेखक का सबसे प्यारा सपना था -

      पहली बार मैंने एम. आई. टी. में निकट से विमान देखा था, जहाँ विद्यार्थियों को विभिन्न सब सिस्टम दिखाने के लिए दो विमान रखे थे। उनके प्रति मेरे मन में विशेष आकर्षण था। वे मुझे बार-बार अपनी ओर खींचते थे। मुझे वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा मेरे सपनों को पंख लगाते थे। मैंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति मैं आकर्षित था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा मेरे मन में पलती रही। मेरा सबसे प्यारा सपना यही था कि सुदूर आकाश में ऊँची और ऊँची उड़ान भरती मशीन को हैंडल किया जाए।

2 : स्वमत :
'मेरी अभिलाषा' विषय पर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

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1:आकलन कृति :
(१) कारण लिखिए :
(i) विमान के प्रति लेखक का आकर्षित होना -
(ii) लेखक का एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना -

      पहली बार मैंने एम. आई. टी. में निकट से विमान देखा था, जहाँ विद्यार्थियों को विभिन्न सब सिस्टम दिखाने के लिए दो विमान रखे थे। उनके प्रति मेरे मन में विशेष आकर्षण था। वे मुझे बार-बार अपनी ओर खींचते थे। मुझे वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा मेरे सपनों को पंख लगाते थे। मैंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति मैं आकर्षित था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा मेरे मन में पलती रही। मेरा सबसे प्यारा सपना यही था कि सुदूर आकाश में ऊँची और ऊँची उड़ान भरती मशीन को हैंडल किया जाए।

2 : स्वमत :
'मेरी अभिलाषा' विषय पर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

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1:आकलन कृति :
(१) संजाल पूर्ण कीजिए :
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       पुस्तक का मानव जीवन में बहुत महत्त्व है। मानव ने सर्वप्रथम पुस्तक का आरंभ अपने अनुभूत ज्ञान को विस्मृति से बचाने के लिए किया था। विकास के आदिकाल में पत्ते, ताड़पत्र, कांस्यपत्र आदि साधन इस ज्ञानसंग्रह के सहायक रहे हैं, ऐसा पुस्तक का इतिहास स्वयं बताता है। पुस्तकें मानव को अपना अनुभव विस्तृत करने में सहायक होती हैं, साथ ही उन्होंने अपने पूर्वजों के सभी प्रकार के कृत्यों को जीवित रखने की जिम्मेदारी भी सँभाली हुई है। आज के युग में प्राचीन वीरों, धार्मिक महात्माओं, ऋषियों, नाटककारों, कवियों आदि का पता हम इन्हीं पुस्तकों के सहारे पाते हैं। पुस्तकें ही अंतरराष्ट्रीय विचारक्षेत्र में विभिन्न देशों के दृष्टिकोणों को एक आधार पर सोचने के लिए बाध्य करती हैं।

2 : स्वमत :
पुस्तकों की उपयोगिता के बारे में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में व्यक्त कीजिए।

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1:आकलन कृति :
(१) आकृति पूर्ण कीजिए :
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       नारी ईश्वर की देन है और ईश्वर की बेटी है। भगवान के बाद हम स्त्री के ही देनदार हैं जिंदगी देने के लिए और फिर जिंदगी योग्य बनाने के लिए। वह माता के समान हमारी रक्षा करती है तथा मित्र और गुरु के समान हमें शुभ कार्यों के लिए प्रेरित करती है। नारी का त्याग और बलिदान भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है। परंतु ईश्वरीय प्रवृत्ति एवं ईश्वर द्वारा किसी भी नारी से किया गया असामयिक क्रूर मजाक वह होता है; जब नारी का सर्वेसर्वा, मार्गदर्शक, उसका भविष्य निर्माता उसे इस असीम दुनिया में नितांत अकेली छोड़कर अनायास काल-कवलित हो जाता है। विधवा हो जाने पर उसे जीवनपर्यंत दूसरों पर आश्रित रहना होता है तथा संसार की सभी बहारों, रंगीनियों से उसे वंचित किया जाता है।
       संतोष की बात है कि हमारे भारत में कुछ विधवा-विवाह होने लगे हैं। परंतु समाज ने इस पद्धति को पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं किया है। लोग विधवा को लेने व देने, दोनों में ही हिचकिचाते हैं। विधवा- विवाह एक गौरव की बात है, जो समाज की शुद्धता और देशोन्नति के लिए अत्यावश्यक है।

2 : स्वमत :
नारियों के साथ होने वाले अन्यायों के बारे में आप अपना मत 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

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1:आकलन कृति :
(१) आकृति पूर्ण कीजिए :
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       नारी ईश्वर की देन है और ईश्वर की बेटी है। भगवान के बाद हम स्त्री के ही देनदार हैं जिंदगी देने के लिए और फिर जिंदगी योग्य बनाने के लिए। वह माता के समान हमारी रक्षा करती है तथा मित्र और गुरु के समान हमें शुभ कार्यों के लिए प्रेरित करती है। नारी का त्याग और बलिदान भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है। परंतु ईश्वरीय प्रवृत्ति एवं ईश्वर द्वारा किसी भी नारी से किया गया असामयिक क्रूर मजाक वह होता है; जब नारी का सर्वेसर्वा, मार्गदर्शक, उसका भविष्य निर्माता उसे इस असीम दुनिया में नितांत अकेली छोड़कर अनायास काल-कवलित हो जाता है। विधवा हो जाने पर उसे जीवनपर्यंत दूसरों पर आश्रित रहना होता है तथा संसार की सभी बहारों, रंगीनियों से उसे वंचित किया जाता है।
       संतोष की बात है कि हमारे भारत में कुछ विधवा-विवाह होने लगे हैं। परंतु समाज ने इस पद्धति को पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं किया है। लोग विधवा को लेने व देने, दोनों में ही हिचकिचाते हैं। विधवा- विवाह एक गौरव की बात है, जो समाज की शुद्धता और देशोन्नति के लिए अत्यावश्यक है।

2 : स्वमत :
नारियों के साथ होने वाले अन्यायों के बारे में आप अपना मत 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

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