Question types

दूसरी इकाई - 10. अपराजेय question types

40 questions across 14 question groups — pick any mix to generate a हिन्दी लोकभारती paper with step-by-step answer keys.

40
Questions
14
Question groups
5
Question types
01

शब्द का शब्दभेद पहचानकर लिखिए : [1M]

3 Q
02

अव्यय का अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए: [1M]

3 Q
03

तालिका पूर्ण कीजिए : [संधि विच्छेद/संधि भेद][1M]

2 Q
04

सहायक क्रिया को पहचानकर उसका मूल रूप लिखिए : [1M]

2 Q
05

क्रिया का प्रथम तथा द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए: [1M]

3 Q
06

मुहावरे का अर्थ लिखकर अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए :[1M]

2 Q
07

अधोरेखांकित वाक्यांश के लिए उचित मुहावरे का चयन करके वाक्य फिर से लिखिए: [1M]

2 Q
08

वाक्य में प्रयुक्त कारक पहचानकर उसका भेद लिखिए।

2 Q
09

यथास्थान उचित विरामचिह्नों का प्रयोग करके वाक्य फिर से लिखिए: [1M]

2 Q
10

सूचना के अनुसार कालपरिवर्तन कीजिए: [1M]

2 Q
11

रचना के आधार पर भेद पहचानकर लिखिए: [1M]

3 Q
12

वाक्य का अर्थ के आधार पर दी गई सूचना के अनुसार परिवर्तन कीजिए: [1M]

2 Q
13

वाक्यों को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए: [1M]

2 Q
14

पठित गद्यांश - सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : [8M]

10 Q
Sample Questions

दूसरी इकाई - 10. अपराजेय questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

1. आकलन कृती :
(१) एक शब्द में उत्तर दीजिए :
(i) उनके चेहरे पर दीपता था।
(ii) वे आँखें बंद करके सुनते थे।
(iii) क्रूर रोमन बादशाह।
(iv) संगीतज्ञों की इसका लाभ तो ले सकता हैं।

2.आकलन कृती :
(१) कथनों के सामने सत्य/असत्य लिखिए :
(i) अमरनाथ की दिनचर्या नहीं बदली।
(ii) अपनी व्हीलचेयर पर बाहर खुले में बगीचे में बैठ जाते।
(iii) जिन्होंने अपनी साधना पूरी की, उनकी सिद्धि का लाभ तो ले सकता हैं।
(iv) आँखें बंद करके ख्याल, ठुमरी गाते।

     उनके कहने पर शास्त्रीय संगीतज्ञों के कैसेट और डिस्क, उनका म्यूजिक सिस्टम उनके कमरे के साइन बोर्ड पर रख दिया गया। उनके कमरे की सज्जा नए सिरे से उनकी सुविधानुसार कर दी गई। उन्होंने इशारों से बताया था, 'मैंने संगीत सीखा, पर सुना तो था ही नहीं। मेरी साधना अधूरी रही। जिन्होंने अपनी साधना पूरी की, उनकी सिद्धि का लाभ तो ले सकता हूँ।' उनकी दिनचर्या बदल गई थी। वे मुसकराते, इशारों में जैसे कहते हों, 'मैं आनंद में हूँ। वे सुबह उठते, अपनी व्हीलचेयर पर बाहर खुले में बगीचे में बैठ जाते । पक्षियों का कलरव सुनते। सूखे पत्तों के झरने की आवाज, कलियों के चटखने की आवाजें उन्हें सुनाई देतीं। उन्हें ओस की टिपटिप पत्तियों के खुलने की, धीमी हवा के सरसराने की सूक्ष्म ध्वनियाँ बहुत स्पष्ट सुनाई पड़ने लगी थीं। उनके चेहरे पर एक उजास दीपता था। आँखें बंद करके कजरी की तान सुनते । दिन में वे अपनी रुचि और समय की अनुकूलता से शास्त्रीय गायन की सी. डी. सुनते। घर के लोग चाहते थे, जैसे भी हो, वे जो चाहते हों करे वे उन्हें इतनी खुशी तो दे ही सकते थे ।
     इस समय अलवैर कामू का 'कालिगुला नाटक' उनके भीतर मंचित होता है। ईश्वर क्रूर रोमन शहंशाह कालिगुला बन गया है। अपनी इच्छा से वह मेरे अंगों को कटवाता जा रहा है। जैसे-जैसे उसे जरूरत पड़ती है, उसी क्रम से वह एक-एक अंग-भंग कर मुझे मरवा रहा है। मुझे कालिगुला के विरुद्ध एक शांत संघर्ष करना है क्योंकि मैं जानता हूँ जीवन का विकास पुरुषार्थ में है, आत्महीनता में नहीं ।

3. शब्द संपदा:
(१) निम्नलिखित शब्दों का वचन बदलकर लिखिए :
(i) पत्ते -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) ध्वनियाँ -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iii) आँखें -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) खुशी। -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

4.स्वमत :
• समाज के जरूरतमंद लोगों की मैं सहायता करूँगा विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में प्रकट कीजिए।

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1. आकलन कृती :
(१) आकृति पूर्ण कीजिए :
Image

2.आकलन कृती :
(१) कथनों के सामने सत्य/असत्य लिखिए :
(i) अमरनाथ की दिनचर्या नहीं बदली।
(ii) अपनी व्हीलचेयर पर बाहर खुले में बगीचे में बैठ जाते।
(iii) जिन्होंने अपनी साधना पूरी की, उनकी सिद्धि का लाभ तो ले सकता हैं।
(iv) आँखें बंद करके ख्याल, ठुमरी गाते।

     उनके कहने पर शास्त्रीय संगीतज्ञों के कैसेट और डिस्क, उनका म्यूजिक सिस्टम उनके कमरे के साइन बोर्ड पर रख दिया गया। उनके कमरे की सज्जा नए सिरे से उनकी सुविधानुसार कर दी गई। उन्होंने इशारों से बताया था, 'मैंने संगीत सीखा, पर सुना तो था ही नहीं। मेरी साधना अधूरी रही। जिन्होंने अपनी साधना पूरी की, उनकी सिद्धि का लाभ तो ले सकता हूँ।' उनकी दिनचर्या बदल गई थी। वे मुसकराते, इशारों में जैसे कहते हों, 'मैं आनंद में हूँ। वे सुबह उठते, अपनी व्हीलचेयर पर बाहर खुले में बगीचे में बैठ जाते । पक्षियों का कलरव सुनते। सूखे पत्तों के झरने की आवाज, कलियों के चटखने की आवाजें उन्हें सुनाई देतीं। उन्हें ओस की टिपटिप पत्तियों के खुलने की, धीमी हवा के सरसराने की सूक्ष्म ध्वनियाँ बहुत स्पष्ट सुनाई पड़ने लगी थीं। उनके चेहरे पर एक उजास दीपता था। आँखें बंद करके कजरी की तान सुनते । दिन में वे अपनी रुचि और समय की अनुकूलता से शास्त्रीय गायन की सी. डी. सुनते। घर के लोग चाहते थे, जैसे भी हो, वे जो चाहते हों करे वे उन्हें इतनी खुशी तो दे ही सकते थे ।
     इस समय अलवैर कामू का 'कालिगुला नाटक' उनके भीतर मंचित होता है। ईश्वर क्रूर रोमन शहंशाह कालिगुला बन गया है। अपनी इच्छा से वह मेरे अंगों को कटवाता जा रहा है। जैसे-जैसे उसे जरूरत पड़ती है, उसी क्रम से वह एक-एक अंग-भंग कर मुझे मरवा रहा है। मुझे कालिगुला के विरुद्ध एक शांत संघर्ष करना है क्योंकि मैं जानता हूँ जीवन का विकास पुरुषार्थ में है, आत्महीनता में नहीं ।

3. शब्द संपदा:
(१) हीन' शब्द का प्रयोग करके कोई तीन अर्थपूर्ण शब्द तैयार करके लिखिए :
(i) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙हीन
(ii) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙हीन
(iii) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙होन।

4.स्वमत :
• समाज के जरूरतमंद लोगों की मैं सहायता करूँगा विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में प्रकट कीजिए।

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1. आकलन कृती :
(१) जोड़ियाँ बनाइए :

‘अ’

‘ब’

(i) शास्त्रीय

लहरियाँ

(ii) स्वर

सूक्ष्म

(iii) मन

गायन

(iv) स्थूल

प्राण

2.आकलन कृती :
(१) एक शब्द में उत्तर लिखिए :
(i) सुबह का समय अमरनाथ का इसका समय था -
(ii) स्वर-साधना में वे आह्वान करते -
(iii) टूट गई थीं सूक्ष्म और स्थूल की सारी -
(iv) घर के लोग दुख से थे -

      शास्त्री जी आ गए थे। अमरनाथ ने शास्त्रीय गायन सीखना शुरू कर दिया । सुबह का समय उनके रियाज का समय था । दिन में शास्त्री जी आते थे। शाम को फिर अभ्यास करते। पहले रंग और रेखाएँ थीं, अब स्वर लहरियाँ थीं। स्वर-साधना में वे ध्वनियों का आह्वान करते । कभी ध्रुपद की गायकी की खुली खेलते अवतरित होते । शास्त्री जी कभी-कभार खयाल में तान अलापते तो कभी ठुमरी के उनके शब्दों के भाव स्वरों में बँधकर मन-प्राण तक पहुँच जाते ।
      जहाँ लौकिक और अलौकिक, भौतिक और आत्मिक तथा स्थूल और सूक्ष्म की सारी सीमाएँ टूट गई थीं। मानों स्वर जीवन का एक नया बोध, एक नया अर्थ उद्घाटित कर रहे हों।
       इस सबके साथ भी अमरनाथ की डॉक्टरी जाँच अपने निश्चित समय पर होती थी। वे फिर बीमार पड़े, वही तेज बुखार । डॉक्टर के चेहरे पर वही चिंता । घर के लोग दुख से व्याकुल । 'अब क्या होगा डॉक्टर ?' उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वे सप्ताह भर बाद लौट आए थे। उनकी आवाज जा चुकी थी। पर उनकी आँखें हँस रही थीं वैसी ही हँसी जैसे कह रही हों, देखो, मैं जीवित हूँ। मुझे चुनौती मत दो ।' जीवनानुभव और कला के अनुभव की एकात्मता का खौलता सच ।

3. शब्द संपदा:
(१)निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखिए :
(i) सुबह x ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) सीखना x˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iii) लौकिक x˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) जीवित x˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

4.स्वमत :
• 'कला की साधना जीवन के दुखमय क्षणों को भुला देती है', विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

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1. आकलन कृती :
(१) सही विकल्प चुनकर वाक्य फिर से लिखिए :
(i) पहले रंग और रेखाएँ थीं,˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
    (अ) अब कैसेट और डिस्क थीं।
    (ब) अब स्वर लहरियाँ थीं।
    (क) अब ठुमरी और तान थीं।
(ii) मानो स्वर जीवन का एक नया बोध, ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
    (अ) एक नया रंग दे रहे हों।
    (ब) एक नया रूप दे रहे हों।
    (क) एक नया अर्थ उद्घाटित कर रहे हों।

2.आकलन कृती :
(१) एक शब्द में उत्तर लिखिए :
(i) सुबह का समय अमरनाथ का इसका समय था -
(ii) स्वर-साधना में वे आह्वान करते -
(iii) टूट गई थीं सूक्ष्म और स्थूल की सारी -
(iv) घर के लोग दुख से थे -

       शास्त्री जी आ गए थे। अमरनाथ ने शास्त्रीय गायन सीखना शुरू कर दिया । सुबह का समय उनके रियाज का समय था । दिन में शास्त्री जी आते थे। शाम को फिर अभ्यास करते। पहले रंग और रेखाएँ थीं, अब स्वर लहरियाँ थीं। स्वर-साधना में वे ध्वनियों का आह्वान करते । कभी ध्रुपद की गायकी की खुली खेलते अवतरित होते । शास्त्री जी कभी-कभार खयाल में तान अलापते तो कभी ठुमरी के उनके शब्दों के भाव स्वरों में बँधकर मन-प्राण तक पहुँच जाते ।
       जहाँ लौकिक और अलौकिक, भौतिक और आत्मिक तथा स्थूल और सूक्ष्म की सारी सीमाएँ टूट गई थीं। मानों स्वर जीवन का एक नया बोध, एक नया अर्थ उद्घाटित कर रहे हों।
       इस सबके साथ भी अमरनाथ की डॉक्टरी जाँच अपने निश्चित समय पर होती थी। वे फिर बीमार पड़े, वही तेज बुखार । डॉक्टर के चेहरे पर वही चिंता । घर के लोग दुख से व्याकुल । 'अब क्या होगा डॉक्टर ?' उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वे सप्ताह भर बाद लौट आए थे। उनकी आवाज जा चुकी थी। पर उनकी आँखें हँस रही थीं वैसी ही हँसी जैसे कह रही हों, देखो, मैं जीवित हूँ। मुझे चुनौती मत दो ।' जीवनानुभव और कला के अनुभव की एकात्मता का खौलता सच ।

3. शब्द संपदा:
(१)निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखिए :
(i) सुबह x ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) सीखना x˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iii) लौकिक x˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) जीवित x˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

4.स्वमत :
• 'कला की साधना जीवन के दुखमय क्षणों को भुला देती है', विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

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1. आकलन कृती :
(१) कथनों के सामने सत्य/असत्य लिखिए :
(i) धीरे-धीरे बाँह हिलाना आसान हो गया।
(ii) पहले से भी भयावह स्थिति, बाँह काटनी पड़ेगी।
(iii) घर और बाहर के लोग उन्हें देखकर हँसते।
(iv) वे हँसते, में जीवन का व्याकरण बना रहा हैं।

2.आकलन कृती :
(१) सही शब्द चुनकर वाक्य फिर से लिखिए :
(i) उन्होंने ऋतुओं के क्रम से फूलों/फलों/बेलों के पौधे लगवाए थे।
(ii) घर और बाहर के लोग क्रोध से / आश्चर्य से / घृणा से उनकी ओर देखते।
(iii) अमरनाथ घर के भीतर कैनवास पर हरियाली / चिड़ियों/नदियों के चित्र बनाते।
(iv) खून की जाँच की रिपोर्ट आई तो डॉक्टर खुश / स्तब्ध/परेशान हो गया था।

      अमरनाथ घर के भीतर कैनवास पर फूलों, पत्तों झरने और हरियाली के चित्र बनाते, वहीं घर के बाहर की जितनी खुली जमीन थी, माली के साथ उन्होंने उस जमीन को तैयार करवाया था । सामने की जमीन में बगीचा बनाया था, जिसमें रंग-बिरंगे मौसम के फूल क्यारियों में लगाए थे। उन्होंने ऋतुओं के क्रम से फूलों के पौधे लगवाए थे। गरमी के बाद बरसात और बरसात के बाद सरदी के पौधों में फूल खिलते। घर के पीछे की जमीन में उन्होंने फलों के पेड़ लगा दिए थे। घर की चारदीवारी के साथ फूलों और फलों की बेलें चढ़ा दी थीं। घर और बाहर के लोग आश्चर्य से उनकी ओर देखते। वे हँसते, मैं जीवन का व्याकरण बना रहा हूँ। जीवन के अछूते सच के शिखर पर चढ़ने के लिए सीढ़ियाँ लगा रहा हूँ,' कहकर हँसने लगते ।
      डॉक्टर ने खून की फिर से जाँच करवाई थी। खून की जाँच की रिपोर्ट आई तो वह परेशान हो गया था। घर के लोग चिंतित थे, अब क्या हो गया ? डॉक्टर ने बताया था, 'बीमारी फिर से पसर रही है।' उनकी दाईं बाँह में खून की गर्दिश बंद हो गई थी। धीरे-धीरे बाँह हिलाना भी मुश्किल हो गई । बाँह निर्जीव होकर काठ-सी हो गई थी। बहुत सारी दवाइयाँ दी जा रही थीं। घर पर ही नर्स रख ली थी। घर का कोई-न-कोई सदस्य भी आस-पास ही रहता। डॉक्टर ने बताया, 'जहर फैल गया है। अब और रुका नहीं जा सकता। पहले से भी ज्यादा भयावह स्थिति । बाँह काटनी पड़ेगी।' घर के लोग सन्न थे। लेकिन फैसला तो बाबू जी को ही लेना था। वे वैसी हँसी हँसे थे ।

3. शब्द संपदा:
(१) निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानिए :
(i) घर -
(ii) जमीन -
(iii) बेलें -
(iv) शिखर। -

4.स्वमत :
• 'कला में अभिरुचि होने से जीवन का आनंद बढ़ता है।' अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

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