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पठित पद्यांश - सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :[6M]

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Question 16 Marks

1. आकलन कृती :
(१) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
(i) आकाश में ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ झूम रही हों।
(ii) घास के दुपट्टे हों और वायु उनमें ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ दे।
(iii)  ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙में लोग आपस में लड़ रहे हों।
(iv) कितनी ही आँधियाँ ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙  मचा रही हों।

               तीन-चार फूल हैं,
               आस-पास धूल है,
               बाँस हैं - बबूल हैं,
                घास के दुकूल हैं,
               वायु भी हिलोर दे,
                फूंक दे, चकोर दे,
कब्र पर, मजार पर, यह दिया बुझे नहीं,
यह किसी शहीद का पुण्य प्राण दान है।
               झूम-झूम बदलियाँ
               चूम-चूम बिजलियाँ,
               आँधियाँ उठा रहीं,
                हलचलें मचा रहीं,
               लड़ रहा स्वदेश हो,
               लड़ रहा स्वदेश हो,
                यातना विशेष हो,
क्षुद्र जीत-हार पर, यह दिया बुझे नहीं,
यह स्वतंत्र भावना का स्वतंत्र गान है।

2. शब्द संपदा
(१) निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए :
(i) फूल =
(ii) गान =
(iii) स्वतंत्र =
(iv) हार =

3. स्वमत :
• पद्यांश की प्रथम आठ पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।

Answer

1. आकलन कृती :
(१)
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
(i) आकाश में बदलियाँ झूम रही हों।
(ii) घास के दुपट्टे हों और वायु उनमें हिलोर दे।
(iii) स्वदेश में लोग आपस में लड़ रहे हों।
(iv) कितनी ही आँधियाँ हलचल मचा रही हों।

2. शब्द संपदा
(१) निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए :
(i) फूल = सुमन
(ii) गान = गाना गीत
(iii) स्वतंत्र = आजाद
(iv) हार = पराजय ।

3. स्वमत :
• चाहे तीन-चार ही फूल हों। आसपास धूल भरी हो। चाहे ऊँचे बाँस हो या फिर बबूल ही क्यों न हो। चारों ओर घास की चादर फैली हो। वायु चले तो उस घास में लहर पैदा हो जाए। वायु चाहे फूंक मारे या तेजी से झकझोर दे। चाहे किसी की कब्र हो या फिर मजार हो। किसी भी स्थान पर यह दिया बुझना नहीं चाहिए। यह दिया अनेक वीरों ने शहीद होकर देश के लिए मानो अपने प्राणों का पुण्य दान इस दिये के रूप में दिया है।

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Question 26 Marks

1. आकलन कृती :
(१)
उकथनों के सामने सत्य / असत्य लिखिए :
(i) कब्र पर मजार पर, यह दिया बुझे नहीं।
(ii) यह किसी नेता का पुण्य प्राण दान है।
(iii) यह परतंत्र भावना का स्वतंत्र गान है।
(iv) क्षुद्र जीत-हार पर, यह दिया बुझे नहीं।

               तीन-चार फूल हैं,
               आस-पास धूल है,
               बाँस हैं - बबूल हैं,
                घास के दुकूल हैं,
               वायु भी हिलोर दे,
                फूंक दे, चकोर दे,
कब्र पर, मजार पर, यह दिया बुझे नहीं,
यह किसी शहीद का पुण्य प्राण दान है।
               झूम-झूम बदलियाँ
               चूम-चूम बिजलियाँ,
               आँधियाँ उठा रहीं,
                हलचलें मचा रहीं,
               लड़ रहा स्वदेश हो,
               लड़ रहा स्वदेश हो,
                यातना विशेष हो,
क्षुद्र जीत-हार पर, यह दिया बुझे नहीं,
यह स्वतंत्र भावना का स्वतंत्र गान है।

2. शब्द संपदा
(१) पद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए :

(i) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iiI) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

3. स्वमत :
• पद्यांश की प्रथम आठ पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।

Answer

1. आकलन कृती :
(१)
उकथनों के सामने सत्य / असत्य लिखिए :
(i) सत्य
(ii) असत्य
(iii) असत्य
(iv) सत्य

2. शब्द संपदा
(१) पद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए :
(i) आस - पास
(ii) झूम - झूम
(iii) चूम - चूम
(iv) जीत - हार।

3. स्वमत :
• चाहे तीन-चार ही फूल हों। आसपास धूल भरी हो। चाहे ऊँचे बाँस हो या फिर बबूल ही क्यों न हो। चारों ओर घास की चादर फैली हो। वायु चले तो उस घास में लहर पैदा हो जाए। वायु चाहे फूंक मारे या तेजी से झकझोर दे। चाहे किसी की कब्र हो या फिर मजार हो। किसी भी स्थान पर यह दिया बुझना नहीं चाहिए। यह दिया अनेक वीरों ने शहीद होकर देश के लिए मानो अपने प्राणों का पुण्य दान इस दिये के रूप में दिया है।

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Question 36 Marks

1. आकलन कृती :
(१)
उत्तर लिखिए :
(i) यह दिया इसका स्वतंत्र गान है
(ii) शहीद का पुण्य प्राण दान दिया यहाँ नहीं बुझना चाहिए

               तीन-चार फूल हैं,
               आस-पास धूल है,
               बाँस हैं - बबूल हैं,
                घास के दुकूल हैं,
               वायु भी हिलोर दे,
                फूंक दे, चकोर दे,
कब्र पर, मजार पर, यह दिया बुझे नहीं,
यह किसी शहीद का पुण्य प्राण दान है।
               झूम-झूम बदलियाँ
               चूम-चूम बिजलियाँ,
               आँधियाँ उठा रहीं,
                हलचलें मचा रहीं,
               लड़ रहा स्वदेश हो,
               लड़ रहा स्वदेश हो,
                यातना विशेष हो,
क्षुद्र जीत-हार पर, यह दिया बुझे नहीं,
यह स्वतंत्र भावना का स्वतंत्र गान है।

2. शब्द संपदा
(१) पद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए :

(i) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iiI) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

3. स्वमत :
• पद्यांश की प्रथम आठ पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।

Answer

1. आकलन कृती :
(१)
उत्तर लिखिए :
(i) भारतीयों की स्वतंत्र भावना का।
(ii) कब्र और मजार पर।

2. शब्द संपदा
(१) पद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए :
(i) आस - पास
(ii) झूम - झूम
(iii) चूम - चूम
(iv) जीत - हार।

3. स्वमत :
• चाहे तीन-चार ही फूल हों। आसपास धूल भरी हो। चाहे ऊँचे बाँस हो या फिर बबूल ही क्यों न हो। चारों ओर घास की चादर फैली हो। वायु चले तो उस घास में लहर पैदा हो जाए। वायु चाहे फूंक मारे या तेजी से झकझोर दे। चाहे किसी की कब्र हो या फिर मजार हो। किसी भी स्थान पर यह दिया बुझना नहीं चाहिए। यह दिया अनेक वीरों ने शहीद होकर देश के लिए मानो अपने प्राणों का पुण्य दान इस दिये के रूप में दिया है।

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Question 46 Marks

1. आकलन कृती :
(१)
सही शब्द चुनकर वाक्य फिर से लिखिए :
(i) देश पर, समाज पर, ज्योति का ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ है।
                            (विहान, वितान, विमान)
(ii) यह ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ का दिया प्राण के समान है।
                            (परदेश, परिवेश, स्वदेश)

            घोर अंधकार हो,
            चल रही बयार हो,
आज द्वार-द्वार पर यह दिया बुझे नहीं,
यह निशीथ का दिया ला रहा विहान है।
            शक्ति का दिया हुआ,
            शक्ति को दिया हुआ,
            भक्ति से दिया हुआ,
            यह स्वतंत्रता दिया हुआ,
            रुक रही न नाव हो,
           जोर का बहाव हो,
आज गंगधार पर यह दिया बुझे नहीं,
यह स्वदेश का दिया प्राण के समान है।
            यह अतीत कल्पना,
            यह विनीत प्रार्थना,
            यह पुनीत भावना,
            यह अनंत साधना,
            शांति हो, अशांति हो,
            युद्ध, संधि, क्रांति हो,
तीर पर, कछार पर, यह दिया बुझे नहीं,
देश पर, समाज पर, ज्योति का वितान है।

2. शब्द संपदा
(१) निम्नलिखित शब्दों के अर्थवाले शब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए :
(i) हवा -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) दीपक -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iii) प्रभात -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) किनारा -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

3. स्वमत :
• पद्यांश की अंतिम आठ पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।

Answer

1. आकलन कृती :
(१) सही शब्द चुनकर वाक्य फिर से लिखिए :
(i) देश पर, समाज पर, ज्योति का वितान है।
(ii) यह स्वदेश का दिया प्राण के समान है।

2. शब्द संपदा
(१) निम्नलिखित शब्दों के अर्थवाले शब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए :
(i) हवा - बयार
(ii) दीपक - दिया
(iii) प्रभात - विहान
(iv) किनारा - कछार

3. स्वमत :
• हमने इस स्वतंत्रता की कल्पना न जाने कितनी सदियों पूर्व की थी। हम विदेशी आततायियों के समक्ष विनीत प्रार्थना करते रहे कि हमें स्वतंत्र कर दें। हमारी यह स्वतंत्रता की भावना बड़ी पुनीत है। इस स्वतंत्रता के लिए हम भारतीयों ने अनंत समय से साधना की है। देश में, विश्व में शांति छाई हो अथवा अशांति। चाहे युद्ध का समय हो या संधि काल का। चाहे क्रांति का समय हो। नदी का तीर हो या नदी के नीचे का कछार, यह दिया किसी भी स्थान पर बुझना नहीं चाहिए। यह दिया समाज के लिए, देश के लिए ज्योति के विस्तार के समान है।

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Question 56 Marks

1. आकलन कृती :
(१)
सही शब्द चुनकर वाक्य फिर से लिखिए :

''

'

(i) अतीत

प्रार्थना

(ii) पुनीत

साधना

(iii) अनंत

भावना

(iv) विनीत

कल्पना

         घोर अंधकार हो,
         चल रही बयार हो,
आज द्वार-द्वार पर यह दिया बुझे नहीं,
यह निशीथ का दिया ला रहा विहान है।
         शक्ति का दिया हुआ,
         शक्ति को दिया हुआ,
         भक्ति से दिया हुआ,
         यह स्वतंत्रता दिया हुआ,
         रुक रही न नाव हो,
         जोर का बहाव हो,
आज गंगधार पर यह दिया बुझे नहीं,
यह स्वदेश का दिया प्राण के समान है।
         यह अतीत कल्पना,
         यह विनीत प्रार्थना,
         यह पुनीत भावना,
         यह अनंत साधना,
         शांति हो, अशांति हो,
         युद्ध, संधि, क्रांति हो,
तीर पर, कछार पर, यह दिया बुझे नहीं,
देश पर, समाज पर, ज्योति का वितान है।

2. शब्द संपदा
(१) निम्नलिखित शब्दों के दो-दो अर्थ लिखिए :
(i) दिया -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) तीर -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

3. स्वमत :
• पद्यांश की अंतिम आठ पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।

Answer

1. आकलन कृती :
(१) जोड़ियाँ बनाइए :

''

'

(i) अतीत

कल्पना

(ii) पुनीत

भावना

(iii) अनंत

साधना

(iv) विनीत

कल्पना

2. शब्द संपदा
(१) निम्नलिखित शब्दों के दो-दो अर्थ लिखिए :
(i) दिया - दीपक, देना
(ii) तीर - किनारा, बाण।

3. स्वमत :
• हमने इस स्वतंत्रता की कल्पना न जाने कितनी सदियों पूर्व की थी। हम विदेशी आततायियों के समक्ष विनीत प्रार्थना करते रहे कि हमें स्वतंत्र कर दें। हमारी यह स्वतंत्रता की भावना बड़ी पुनीत है। इस स्वतंत्रता के लिए हम भारतीयों ने अनंत समय से साधना की है। देश में, विश्व में शांति छाई हो अथवा अशांति। चाहे युद्ध का समय हो या संधि काल का। चाहे क्रांति का समय हो। नदी का तीर हो या नदी के नीचे का कछार, यह दिया किसी भी स्थान पर बुझना नहीं चाहिए। यह दिया समाज के लिए, देश के लिए ज्योति के विस्तार के समान है।

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Question 66 Marks

1. आकलन कृती :
(१)
एक शब्द में उत्तर दीजिए :
(i) आज द्वार-द्वार पर यह नहीं बुझना चाहिए -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ 
(ii) यह विहान लाने वाला दिया इसका है  -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ 
(iii) यह दिया देश और समाज पर ज्योति का यह है -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ 
(iv) यह दिया इसकी धारा पर रुकना नहीं चाहिए -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ 

            घोर अंधकार हो,
            चल रही बयार हो,
आज द्वार-द्वार पर यह दिया बुझे नहीं,
यह निशीथ का दिया ला रहा विहान है।
            शक्ति का दिया हुआ,
            शक्ति को दिया हुआ,
            भक्ति से दिया हुआ,
            यह स्वतंत्रता दिया हुआ,
            रुक रही न नाव हो,
           जोर का बहाव हो,
आज गंगधार पर यह दिया बुझे नहीं,
यह स्वदेश का दिया प्राण के समान है।
            यह अतीत कल्पना,
            यह विनीत प्रार्थना,
            यह पुनीत भावना,
            यह अनंत साधना,
            शांति हो, अशांति हो,
            युद्ध, संधि, क्रांति हो,
तीर पर, कछार पर, यह दिया बुझे नहीं,
देश पर, समाज पर, ज्योति का वितान है।

2. शब्द संपदा
(१) निम्नलिखित शब्दों के अर्थवाले शब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए :
(i) हवा -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) दीपक -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iii) प्रभात -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) किनारा -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

3. स्वमत :
• पद्यांश की अंतिम आठ पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।

Answer

1. आकलन कृती :
(१)
एक शब्द में उत्तर दीजिए :
(i) दिया
(ii) निशीथ का
(iii) वितान
(iv) गंगा।

2. शब्द संपदा
(१) निम्नलिखित शब्दों के अर्थवाले शब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए :
(i) हवा - बयार
(ii) दीपक - दिया
(iii) प्रभात - विहान
(iv) किनारा - कछार

3. स्वमत :
• हमने इस स्वतंत्रता की कल्पना न जाने कितनी सदियों पूर्व की थी। हम विदेशी आततायियों के समक्ष विनीत प्रार्थना करते रहे कि हमें स्वतंत्र कर दें। हमारी यह स्वतंत्रता की भावना बड़ी पुनीत है। इस स्वतंत्रता के लिए हम भारतीयों ने अनंत समय से साधना की है। देश में, विश्व में शांति छाई हो अथवा अशांति। चाहे युद्ध का समय हो या संधि काल का। चाहे क्रांति का समय हो। नदी का तीर हो या नदी के नीचे का कछार, यह दिया किसी भी स्थान पर बुझना नहीं चाहिए। यह दिया समाज के लिए, देश के लिए ज्योति के विस्तार के समान है।

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