1. आकलन कृती :
(१) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
(i) आकाश में ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ झूम रही हों।
(ii) घास के दुपट्टे हों और वायु उनमें ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ दे।
(iii) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙में लोग आपस में लड़ रहे हों।
(iv) कितनी ही आँधियाँ ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙ मचा रही हों।
तीन-चार फूल हैं,
आस-पास धूल है,
बाँस हैं - बबूल हैं,
घास के दुकूल हैं,
वायु भी हिलोर दे,
फूंक दे, चकोर दे,
कब्र पर, मजार पर, यह दिया बुझे नहीं,
यह किसी शहीद का पुण्य प्राण दान है।
झूम-झूम बदलियाँ
चूम-चूम बिजलियाँ,
आँधियाँ उठा रहीं,
हलचलें मचा रहीं,
लड़ रहा स्वदेश हो,
लड़ रहा स्वदेश हो,
यातना विशेष हो,
क्षुद्र जीत-हार पर, यह दिया बुझे नहीं,
यह स्वतंत्र भावना का स्वतंत्र गान है।
2. शब्द संपदा
(१) निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए :
(i) फूल =
(ii) गान =
(iii) स्वतंत्र =
(iv) हार =
3. स्वमत :
• पद्यांश की प्रथम आठ पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।
1. आकलन कृती :
(१) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
(i) आकाश में बदलियाँ झूम रही हों।
(ii) घास के दुपट्टे हों और वायु उनमें हिलोर दे।
(iii) स्वदेश में लोग आपस में लड़ रहे हों।
(iv) कितनी ही आँधियाँ हलचल मचा रही हों।
2. शब्द संपदा
(१) निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए :
(i) फूल = सुमन
(ii) गान = गाना गीत
(iii) स्वतंत्र = आजाद
(iv) हार = पराजय ।
3. स्वमत :
• चाहे तीन-चार ही फूल हों। आसपास धूल भरी हो। चाहे ऊँचे बाँस हो या फिर बबूल ही क्यों न हो। चारों ओर घास की चादर फैली हो। वायु चले तो उस घास में लहर पैदा हो जाए। वायु चाहे फूंक मारे या तेजी से झकझोर दे। चाहे किसी की कब्र हो या फिर मजार हो। किसी भी स्थान पर यह दिया बुझना नहीं चाहिए। यह दिया अनेक वीरों ने शहीद होकर देश के लिए मानो अपने प्राणों का पुण्य दान इस दिये के रूप में दिया है।