Question types

पहली इकाई - 2. बिल्ली का बिलुंगड़ा question types

36 questions across 14 question groups — pick any mix to generate a हिन्दी लोकभारती paper with step-by-step answer keys.

36
Questions
14
Question groups
5
Question types
01

शब्द का शब्दभेद पहचानकर लिखिए : [1M]

2 Q
02

अव्यय का अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए: [1M]

2 Q
03

तालिका पूर्ण कीजिए : [संधि विच्छेद/संधि भेद][1M]

2 Q
04

सहायक क्रिया को पहचानकर उसका मूल रूप लिखिए : [1M]

2 Q
05

क्रिया का प्रथम तथा द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए: [1M]

3 Q
06

मुहावरे का अर्थ लिखकर अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए :[1M]

2 Q
07

अधोरेखांकित वाक्यांश के लिए उचित मुहावरे का चयन करके वाक्य फिर से लिखिए: [1M]

2 Q
08

वाक्य में प्रयुक्त कारक पहचानकर उसका भेद लिखिए।

3 Q
09

यथास्थान उचित विरामचिह्नों का प्रयोग करके वाक्य फिर से लिखिए: [1M]

1 Q
10

सूचना के अनुसार कालपरिवर्तन कीजिए: [1M]

2 Q
11

रचना के आधार पर भेद पहचानकर लिखिए: [1M]

3 Q
12

वाक्य का अर्थ के आधार पर दी गई सूचना के अनुसार परिवर्तन कीजिए: [1M]

2 Q
13

वाक्यों को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए: [1M]

2 Q
14

पठित गद्यांश - सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : [8M]

8 Q
Sample Questions

पहली इकाई - 2. बिल्ली का बिलुंगड़ा questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

(सिर चढ़ जाना, परामर्श करना, फूला न समाना, व्यस्त होना।)
मोहित कोई बड़ा काम करने से पहले अपने पिता से उचित अनुचित के बारे में बातचीत करता है।
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1. आकलन कृती :
(१) आकृति पूर्ण कीजिए :

Image

2.आकलन कृती :
(१) आकृति पूर्ण कीजिए :
Image

        उन दिनों दिल्ली में बड़ी सनसनी फैली हुई थी। नगर के सभी भागों से बच्चों के उठाए जाने की खबरें आ रही थीं। एक-दो बार पत्रों में यह छपा कि जमुना के पुल पर कुछ आदमी पकड़े गए जिन्होंने बोरियों में बच्चे बंद किए हुए थे। स्कूलों से बच्चे बहुत सावधानी से लाए जाते थे। पार्कों में और बाहर गलियों में बच्चों का खेलना-कूदना बंद हो चुका था। दिल्ली नगरपालिका और संसद में इसी विषय पर अनेक सवाल-जवाब हो चुके थे इसलिए इस मामले में राजधानी के सभी नागरिकों की दिलचस्पी थी । आश्चर्य इस बात का नहीं कि लोगों ने अमरू पर संदेह क्यों किया, बल्कि इस बात का था कि उन्होंने अभी तक उसकी मार-पिटाई शुरू क्यों नहीं कर दी। वातावरण में सनसनी और तनाव की कमी न थी।
        अगर थानेदार और पुलिस का सिपाही वहाँ न होते तो अबतक अमरू पर भीड़ टूट पड़ी होती। थानेदार ने आते ही अमरू की कलाई पकड़ ली और पूछा, "बोल, यह बच्चा तूने कहाँ से उठाया है और इसे तू कहाँ ले जा रहा है ? बता कहाँ हैं तेरे और साथी ? आज सबका सुराग लगाकर ही हटूंगा।" अमरू अब तक तो दिल में हँस रहा था मगर थानेदार की धमकियों से कुछ घबरा गया। दबी आवाज में वह थानेदार से बोला- "सरकार, मैंने किसी का बच्चा नहीं उठाया। न मैं बदमाश हूँ। मैं तो एक भले घर का नौकर हूँ। रोटी-चौका करता हूँ और अपना पेट पालता हूँ।"
        जो आदमी थानेदार को बुलाकर लाया था, क्रोध में आकर बोला, "क्यों बकता है, बे! दरोगा जी, ऐसे नहीं यह मानेगा। दो-चार बेंत रसीद कीजिए।" दरोगा ने बगल से निकाल कर बेंत अपने हाथ में ली ही थी कि अमरू नम्रतापूर्वक झुका और बोला, "सरकार, आप जितना चाहें मुझे पीट लें, पहले यह तो देख लें कि इस बोरी में है क्या ? हुक्म हो तो चलिए थाने चलें ।" यद्यपि थानेदार इस बात पर राजी हो गए थे पर भीड़ कब मानने वाली थी। लोग चिल्ला उठे, "हरगिज नहीं, ऐसा कभी नहीं होगा। हम सब इस आदमी की बदमाशी के गवाह हैं। मामला कभी दबने नहीं देंगे।" थानेदार डर गए कि उनकी नीयत पर लोगों को शक हो रहा है उन्होंने अमरू से कहा, "अच्छा, बोरी को नीचे रखो। इसका मुँह खोलो।"
        अमरू शांतिपूर्वक नीचे बैठ गया और धीरे से उसने बोरी का मुँह खोल दिया। जैसे ही बोरी का मुँह खुला बिल्ली का बिलुंगड़ा छलाँगें मारता हुआ एक तरफ भाग गया और लोग देखते ही रह गए। 

3. शब्द संपदा:
(१) निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग और शब्द अलग-अलग करके लिखिए :
(i) अपयश -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) अनुत्पादक -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iii) निस्संदेह -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) विनम्रता -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

4.स्वमत :
• 'सामान्य जनता द्वारा आरोपी को मारना-पीटना कितना उचित' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

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1. आकलन कृती :
(१) आकृति पूर्ण कीजिए :

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2.आकलन कृती :
(१) सही विकल्प चुनकर वाक्य पूर्ण करके फिर से लिखिए :
(i) आश्चर्यं इस बात का नहीं कि लोगों ने अमरू पर संदेह क्यों किया, बल्कि
    (अ) इस बात का था कि उससे बच्चा छीन क्यों न लिया।
    (ब) बच्चे को अब तक बोरे से निकाल क्यों न लिया।
    (क) अब तक उसकी मार-पिटाई शुरू क्यों नहीं कर दी।
(ii) अगर थानेदार और पुलिस का सिपाही वहाँ नहीं होते, तो अब तक
    (अ) अमरू कब का भाग गया होता।
    (ब) अमरू पर काबू पाना मुश्किल हो जाता।
    (क) अमरू पर भीड़ टूट पड़ी होती।

        उन दिनों दिल्ली में बड़ी सनसनी फैली हुई थी। नगर के सभी भागों से बच्चों के उठाए जाने की खबरें आ रही थीं। एक-दो बार पत्रों में यह छपा कि जमुना के पुल पर कुछ आदमी पकड़े गए जिन्होंने बोरियों में बच्चे बंद किए हुए थे। स्कूलों से बच्चे बहुत सावधानी से लाए जाते थे। पार्कों में और बाहर गलियों में बच्चों का खेलना-कूदना बंद हो चुका था। दिल्ली नगरपालिका और संसद में इसी विषय पर अनेक सवाल-जवाब हो चुके थे इसलिए इस मामले में राजधानी के सभी नागरिकों की दिलचस्पी थी । आश्चर्य इस बात का नहीं कि लोगों ने अमरू पर संदेह क्यों किया, बल्कि इस बात का था कि उन्होंने अभी तक उसकी मार-पिटाई शुरू क्यों नहीं कर दी। वातावरण में सनसनी और तनाव की कमी न थी।
        अगर थानेदार और पुलिस का सिपाही वहाँ न होते तो अबतक अमरू पर भीड़ टूट पड़ी होती। थानेदार ने आते ही अमरू की कलाई पकड़ ली और पूछा, "बोल, यह बच्चा तूने कहाँ से उठाया है और इसे तू कहाँ ले जा रहा है ? बता कहाँ हैं तेरे और साथी ? आज सबका सुराग लगाकर ही हटूंगा।" अमरू अब तक तो दिल में हँस रहा था मगर थानेदार की धमकियों से कुछ घबरा गया। दबी आवाज में वह थानेदार से बोला- "सरकार, मैंने किसी का बच्चा नहीं उठाया। न मैं बदमाश हूँ। मैं तो एक भले घर का नौकर हूँ। रोटी-चौका करता हूँ और अपना पेट पालता हूँ।"
        जो आदमी थानेदार को बुलाकर लाया था, क्रोध में आकर बोला, "क्यों बकता है, बे! दरोगा जी, ऐसे नहीं यह मानेगा। दो-चार बेंत रसीद कीजिए।" दरोगा ने बगल से निकाल कर बेंत अपने हाथ में ली ही थी कि अमरू नम्रतापूर्वक झुका और बोला, "सरकार, आप जितना चाहें मुझे पीट लें, पहले यह तो देख लें कि इस बोरी में है क्या ? हुक्म हो तो चलिए थाने चलें ।" यद्यपि थानेदार इस बात पर राजी हो गए थे पर भीड़ कब मानने वाली थी। लोग चिल्ला उठे, "हरगिज नहीं, ऐसा कभी नहीं होगा। हम सब इस आदमी की बदमाशी के गवाह हैं। मामला कभी दबने नहीं देंगे।" थानेदार डर गए कि उनकी नीयत पर लोगों को शक हो रहा है उन्होंने अमरू से कहा, "अच्छा, बोरी को नीचे रखो। इसका मुँह खोलो।"
        अमरू शांतिपूर्वक नीचे बैठ गया और धीरे से उसने बोरी का मुँह खोल दिया। जैसे ही बोरी का मुँह खुला बिल्ली का बिलुंगड़ा छलाँगें मारता हुआ एक तरफ भाग गया और लोग देखते ही रह गए। 

3. शब्द संपदा:
(१) निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग और शब्द अलग-अलग करके लिखिए :
(i) अपयश -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) अनुत्पादक -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iii) निस्संदेह -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) विनम्रता -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

4.स्वमत :
• 'सामान्य जनता द्वारा आरोपी को मारना-पीटना कितना उचित' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

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1. आकलन कृती :
(१) आकृति पूर्ण कीजिए :

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2.आकलन कृती :
(१) गद्यांश पर आधारित दो ऐसे प्रश्न बनाकर लिखिए जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों :
(i) नौकर
(ii) बिल्ली का बिलुंगड़ा।

        उन दिनों दिल्ली में बड़ी सनसनी फैली हुई थी। नगर के सभी भागों से बच्चों के उठाए जाने की खबरें आ रही थीं। एक-दो बार पत्रों में यह छपा कि जमुना के पुल पर कुछ आदमी पकड़े गए जिन्होंने बोरियों में बच्चे बंद किए हुए थे। स्कूलों से बच्चे बहुत सावधानी से लाए जाते थे। पार्कों में और बाहर गलियों में बच्चों का खेलना-कूदना बंद हो चुका था। दिल्ली नगरपालिका और संसद में इसी विषय पर अनेक सवाल-जवाब हो चुके थे इसलिए इस मामले में राजधानी के सभी नागरिकों की दिलचस्पी थी । आश्चर्य इस बात का नहीं कि लोगों ने अमरू पर संदेह क्यों किया, बल्कि इस बात का था कि उन्होंने अभी तक उसकी मार-पिटाई शुरू क्यों नहीं कर दी। वातावरण में सनसनी और तनाव की कमी न थी।
        अगर थानेदार और पुलिस का सिपाही वहाँ न होते तो अबतक अमरू पर भीड़ टूट पड़ी होती। थानेदार ने आते ही अमरू की कलाई पकड़ ली और पूछा, "बोल, यह बच्चा तूने कहाँ से उठाया है और इसे तू कहाँ ले जा रहा है ? बता कहाँ हैं तेरे और साथी ? आज सबका सुराग लगाकर ही हटूंगा।" अमरू अब तक तो दिल में हँस रहा था मगर थानेदार की धमकियों से कुछ घबरा गया। दबी आवाज में वह थानेदार से बोला- "सरकार, मैंने किसी का बच्चा नहीं उठाया। न मैं बदमाश हूँ। मैं तो एक भले घर का नौकर हूँ। रोटी-चौका करता हूँ और अपना पेट पालता हूँ।"
        जो आदमी थानेदार को बुलाकर लाया था, क्रोध में आकर बोला, "क्यों बकता है, बे! दरोगा जी, ऐसे नहीं यह मानेगा। दो-चार बेंत रसीद कीजिए।" दरोगा ने बगल से निकाल कर बेंत अपने हाथ में ली ही थी कि अमरू नम्रतापूर्वक झुका और बोला, "सरकार, आप जितना चाहें मुझे पीट लें, पहले यह तो देख लें कि इस बोरी में है क्या ? हुक्म हो तो चलिए थाने चलें ।" यद्यपि थानेदार इस बात पर राजी हो गए थे पर भीड़ कब मानने वाली थी। लोग चिल्ला उठे, "हरगिज नहीं, ऐसा कभी नहीं होगा। हम सब इस आदमी की बदमाशी के गवाह हैं। मामला कभी दबने नहीं देंगे।" थानेदार डर गए कि उनकी नीयत पर लोगों को शक हो रहा है उन्होंने अमरू से कहा, "अच्छा, बोरी को नीचे रखो। इसका मुँह खोलो।"
        अमरू शांतिपूर्वक नीचे बैठ गया और धीरे से उसने बोरी का मुँह खोल दिया। जैसे ही बोरी का मुँह खुला बिल्ली का बिलुंगड़ा छलाँगें मारता हुआ एक तरफ भाग गया और लोग देखते ही रह गए। 

3. शब्द संपदा:
(१) निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :
(i) तटस्थ ×˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) भौतिक ×˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iii) शुष्क ×˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) अपव्यय ×˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

4.स्वमत :
• 'सामान्य जनता द्वारा आरोपी को मारना-पीटना कितना उचित' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

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1. आकलन कृती :
(१) आकृति पूर्ण कीजिए :

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2.आकलन कृती :
(१)  निम्नलिखित में से उचित विकल्प चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :
(i) रास्ते में अमरू अपने मालिक से ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
    (अ) बोरी में बिल्ली लिए हुए मिला।
    (ब) बोरी में बच्चे को लिए हुए मिला।
    (क) खाली बोरी लटकाए हुए मिला।
(२) गद्यांश में आया हुआ एक बड़ा शहर और उसका प्रसिद्ध मुहल्ला -
(i) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

        इस बार मैंने सुना कि मेरे घर के सामने कोई आवाज लगा रहा हैः 'आपका नौकर पकड़ लिया गया है। अगर आप उसे छुड़ाना चाहते हैं तो छप्परवाले कुएँ पर पहुँचिए ।'
        मैं हैरान हुआ कि क्या बात है। समझा शायद अमरू किसी की साइकिल से टकरा गया होगा। शायद साइकिलवाले का कुछ नुकसान हो गया हो और उसने अमरू को धर-पकड़ा हो। रही आदमी इकट्ठे होने की बात, यह काम दिल्ली में मुश्किल नहीं और फिर करौल बाग में तो बहुत आसान है जहाँ सैकड़ों आदमियों को पता ही नहीं कि वे किधर जाएँ और क्या करें। खैर, उधर जा ही रहा था कि रास्ते में खाली बोरी लटकाए अमरू आता हुआ दिखाई दिया। वह खूब खिलखिलाकर हँस रहा था। उसे डाँटते हुए मैंने पूछा - "अरे क्या बात हुई? तूने आज सुबह-ही-सुबह क्या गड़बड़ की जो इतना शोर मचा और मुहल्ले के लोग तुझे मारने को दौड़े ?"
        अमरू को कुछ कहना नहीं पड़ा। उसके पीछे कुछ आदमी आ रहे थे, उन्होंने मुझे सारा मामला समझा दिया। बात यह हुई कि जैसे अमरू कंधे पर बोरी लटकाए बिल्ली को बाहर छोड़ने जा रहा था; कुछ लोगों को शक हुआ कि बोरी में बच्चा है। दो आदमी चुपके-चुपके उसके पीछे हो लिए। उन्होंने देखा कि बोरी अंदर से हिल रही है। बस, उन्हें विश्वास हो गया कि इस बदमाश ने किसी बच्चे को पकड़ा है। अमरू स्वभाव से अल्पभाषी है, कुछ मसखरा भी है। वह चुप रहा। देखते-देखते पचासों आदमी इकट्ठे हो गए। उनमें से एक चिल्लाकर कहने लगा, "घेर लो इस आदमी को, यह बदमाश उसी गिरोह में से है जिसका काम बच्चे पकड़ना है।" उस जगह से पुलिस थाना भी बहुत दूर नहीं था। एक आदमी लपककर थाने गया और वहाँ से थानेदार और एक सिपाही को बुला लाया। थानेदार को देखते ही एक उत्साही दर्शक अपने कुर्ते की बाँहे ऊपर चढ़ाते हुए बोला, "दरोगा जी, ऐसा नहीं हो सकता कि आप इस बदमाश को चुपचाप यहाँ से ले जाएँ और कानूनी कार्यवाही की आड़ में इसे हवालात के मजे लेने दें। पहले इसकी जी भर के मरम्मत होगी। 

3. शब्द संपदा:
(१) निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए :
(i) साइकिल -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(ii) बोरी -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iii) ऋतु -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
(iv) आदमी -˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙

4.स्वमत :
• पालतू पशुओं के बारे में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

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1. आकलन कृती :
(१) आकृति पूर्ण कीजिए :

Image

2.आकलन कृती :
(१) आकृति पूर्ण कीजिए :
Image
(२) निम्नलिखित में से उचित विकल्प चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :
(i) अमरू को अपने मालिक से कुछ कहना नहीं पड़ा, क्योंकि ˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙˙
    (अ) उसके मालिक को सब कुछ पहले से मालूम था।
    (ब) अमरू के पीछे चल रहे लोगों ने सारा मामला समझा दिया था।
    (क) पुलिसवाले ने सब कुछ बता दिया।

        इस बार मैंने सुना कि मेरे घर के सामने कोई आवाज लगा रहा हैः 'आपका नौकर पकड़ लिया गया है। अगर आप उसे छुड़ाना चाहते हैं तो छप्परवाले कुएँ पर पहुँचिए ।'
        मैं हैरान हुआ कि क्या बात है। समझा शायद अमरू किसी की साइकिल से टकरा गया होगा। शायद साइकिलवाले का कुछ नुकसान हो गया हो और उसने अमरू को धर-पकड़ा हो। रही आदमी इकट्ठे होने की बात, यह काम दिल्ली में मुश्किल नहीं और फिर करौल बाग में तो बहुत आसान है जहाँ सैकड़ों आदमियों को पता ही नहीं कि वे किधर जाएँ और क्या करें। खैर, उधर जा ही रहा था कि रास्ते में खाली बोरी लटकाए अमरू आता हुआ दिखाई दिया। वह खूब खिलखिलाकर हँस रहा था। उसे डाँटते हुए मैंने पूछा - "अरे क्या बात हुई? तूने आज सुबह-ही-सुबह क्या गड़बड़ की जो इतना शोर मचा और मुहल्ले के लोग तुझे मारने को दौड़े ?"
        अमरू को कुछ कहना नहीं पड़ा। उसके पीछे कुछ आदमी आ रहे थे, उन्होंने मुझे सारा मामला समझा दिया। बात यह हुई कि जैसे अमरू कंधे पर बोरी लटकाए बिल्ली को बाहर छोड़ने जा रहा था; कुछ लोगों को शक हुआ कि बोरी में बच्चा है। दो आदमी चुपके-चुपके उसके पीछे हो लिए। उन्होंने देखा कि बोरी अंदर से हिल रही है। बस, उन्हें विश्वास हो गया कि इस बदमाश ने किसी बच्चे को पकड़ा है। अमरू स्वभाव से अल्पभाषी है, कुछ मसखरा भी है। वह चुप रहा। देखते-देखते पचासों आदमी इकट्ठे हो गए। उनमें से एक चिल्लाकर कहने लगा, "घेर लो इस आदमी को, यह बदमाश उसी गिरोह में से है जिसका काम बच्चे पकड़ना है।" उस जगह से पुलिस थाना भी बहुत दूर नहीं था। एक आदमी लपककर थाने गया और वहाँ से थानेदार और एक सिपाही को बुला लाया। थानेदार को देखते ही एक उत्साही दर्शक अपने कुर्ते की बाँहे ऊपर चढ़ाते हुए बोला, "दरोगा जी, ऐसा नहीं हो सकता कि आप इस बदमाश को चुपचाप यहाँ से ले जाएँ और कानूनी कार्यवाही की आड़ में इसे हवालात के मजे लेने दें। पहले इसकी जी भर के मरम्मत होगी। 

3. शब्द संपदा:
(१) निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :
(i) अल्पभाषी x
(ii) दुत्कार x
(iii) समर्थन x
(iv) दुर्लभ x

4.स्वमत :
• पालतू पशुओं के बारे में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

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