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Question 13 Marks
आमाशय की भित्ति में विद्यमान ज़ठर ग्रंथियों के क्या-क्या कार्य होते हैं?
Answer
आमाशय की भित्ति में विद्यमान जठर ग्रन्थियाँ निम्नलिखित कार्य करती हैं-
  1. आमाशय के भीतरी अस्तर की सुरक्षा के लिए श्लेष्मा का स्रावण करती हैं।
  2. ये जठर रस उत्पन्न करती हैं।
  3. ये जठर एंजाइम ( पेप्सिन तथा रेनिन) का स्राव करती हैं।
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Question 23 Marks
भोजन के पाचन में मुख की क्या भूमिका होती है?
Answer
भोजन के पाचन में मुख्य निम्नलिखित भूमिकाएँ निभाता हैं-
  1. दाँतों द्वारा भोजन को छोटे टुकड़ों में काटा जाता है जिससे कि भोजन को पाचन सरल हो जाता है।
  2. मुख में भोजन के छोटे टुकड़ों में लार का ठीक प्रकार से मिलना भी सुनिश्चित हो जाता है। इस तरह भोजन का मार्ग आसान हो जाता है।
  3. जब भोजन लार के साथ मिल जाता हैं तो एमाइलेज एंजाइम (लालारस में पाया जाता है ) स्टार्च (मण्ड) को शर्करा (ग्लूकोज) में विखण्डित कर देता है। इस तरह स्टार्च का पाचन मुख में होता है।
  4. जिह्वा भोजन तथा लार को मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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Question 33 Marks
अमरबेल, किलनियों और जोकों के संदर्भ में कौन-सी बात सामान्य होती हैं?
Answer
अमरबेल, केलनियाँ और जोक सभी परजीवी हैं। ये पौधों अथवा जीवों को बिना मारे उनसे अपना पोषण प्राप्त करते हैं।
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Question 43 Marks
जीवधारियों में ऊर्जा-मुद्रा का नाम बताइए। यह ऊर्जा कहाँ और कब उत्पन्न होती है?
Answer
जीवधारियों में ऊर्जा-मुद्रा का नाम एडीनोसिन ट्राइफॉस्फेट (ATP) है।
यह ऊर्जा मुद्रा श्वसन क्रिया के दौरान सजीव कोशिका में माइटोकॉन्ड्रिया में उत्पन्न होती है।
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Question 53 Marks
निम्नलिखित परिस्थितियों में से प्रत्येक का प्रकाश संश्लेषण की दर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
  1. बादलों से आच्छादित दिनों में
  2. क्षेत्र में वर्षा न होने पर
  3. क्षेत्र में पर्याप्त खाद डालने पर
  4. धूल के कारण रंध्रों के बंद हो जाने पर
Answer
  1. बादलों से आच्छादित दिनों में- प्रकाश संश्लेषण की दर में कमी आती है।
  2. क्षेत्र में वर्षा न होने पर- प्रकाश संश्लेषण की दर में कमी आती है।
  3. क्षेत्र में पर्याप्त खाद डालने पर- प्रकाश संश्लेषण की दर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  4. धूल के कारण रन्ध्रों के बन्द हो जाने पर- प्रकाश संश्लेषण की दर में कमी आती है।
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Question 63 Marks
प्रकाश-संश्लेषण की प्रमुख घटनाओं की चर्चा कीजिए।
Answer
हरे पादपों द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाने की प्रक्रिया प्रकाश संश्लेषण कहलाती है। प्रकाश संश्लेषण की संपूर्ण प्रक्रिया निम्नलिखित समीकरण द्वारा प्रदर्शित की जा सकती है-
$6 CO _2+6 H _2 O$ सूर्य का प्रकाश / क्लोरोफिल $C _6 H _{12} O _6+6 O _2$
प्रकाश संश्लेषण के चरण- इस प्रक्रम में निम्नलिखित चरण सम्मिलित हैं-
  1. सूर्य के प्रकाश का अवशोषण जो क्लोरोफिल को सक्रिय करता है तथा जल के अणुओं के विखण्डन को प्रेरित करता है।
  2. प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरित करना तथा जल के अणुओं का हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन में अपघटन।
  3. कार्बन डाईऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन।
  4. तदोपरांत कार्बोहाइड्रेट को स्टार्च में बदल दिया जाता है तथा पौधे के भिन्न-भिन्न भागों में वितरित किया जाता है तथा पत्तियों तथा अन्य भागों में भण्डारित कर लिया जाता है।
  5. इस प्रक्रिया में $O_2$ एक सह-उत्पाद के रूप में मुक्त होती है। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में, प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।
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Question 73 Marks
हृदय में चार कक्ष होने के क्या लाभ हैं?
Answer
हृदय में चार कक्ष का होना दो कार्य करता है। पहला, यह कि इससे ऑक्सीकृत तथा विऑक्सीकृत रूधिर का एक दूसरे से पूर्णतः अलग होना सुनिश्चित होता है। दूसरा-रूधिर ऊपरी कक्षों द्वारा ग्रहण किया जाता है तथा निचले कक्षों में पम्प किया जाता है। ग्रहण किए गए तथा भेजे गए रूधिर के मध्य यह बँटवारा हृदय की कार्यकुशलता को बढ़ाता है। यह जन्तुओं जैसे पक्षियों एवं स्तनधारियों में आवश्यक एवं उपयोगी होता है क्योंकि उन्हें अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
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Question 83 Marks
मानव हृदय में रुधिर-परिसंचरण को दोहरा परिसंचरण क्यों कहते हैं?
Answer
मानव हृदय में रूधिर परिंसचरण को 'दोहरा-परिसंचरण' कहा जाता है क्योंकि शरीर में एक चक्र पूर्ण करने के लिए रूधिर दो बार हृदय में प्रवेश करता है। एक बार विऑक्सीकृत रूधिर के रूप में हदय के दाऐं भाग में तथा दूसरी बार ऑक्सीकृत रूधिर के रूप में हृदय के बाऐं भाग में।
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Question 93 Marks
स्थलीय प्राणियों की अपेक्षा जलीय प्राणियों में श्वसन-दर कहीं अधिक तीव्र गति से क्यों होती है?
Answer
जलीय जीवों जैसे मछलियाँ अपने गलफड़ों द्वारा जल में विलेय ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं जबकि स्थलया जीव वायुमंडल में फुफ्फुसों द्वारा स्वास लेते हैं। क्योंकि जल में विलेय ऑक्सीजन की मात्रा वायु में उपस्थित ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम है, इसलिए जलीय जीवों की श्वास दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा अधिक तीव्र होती है।
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Question 103 Marks
वर्ग (I) के कथनों को वर्ग (II) में दिए गए जीवों से मिलाइए।
वर्ग (I) वर्ग (II)
(i) स्वपोषी पोषण (क) जोंक
(ii) विषमपोषी पोषण (ख) पैरामीशियम
(iii) परजीवी पोषण (ग) हिरन
(iv) खाद्य-धानियों के भीतर पाचन (घ) हरे पौधै
Answer
(i) - (घ), (ii) - (ग), (iii) - (क), (iv) - (ख)
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Question 113 Marks
पचे हुए भोजन का अवशोषण प्रधानतः छोटी आँत में क्यों होता है?
Answer
पचे हुए भोजन का अवशोषण मुख्यतः छोटी आँत में होता है। क्योंकि-
  1. इसकी भित्ति (गुहा) का आकार कम होता है जिससे छोटी आँत में भोजन का लम्बे समय तक रहना सुनिश्चित होता है। जिससे कि भोजन का अवशोषण उचित प्रकार से हो सके। इसके कारण, पचे हुए भोजन का अवशोषण मुख्यतः छोटी आँत में होता है।
  2. क्षुद्रांत में पहुँचकर सारा भोजन पच जाता है।
  3. छोटी आँत के इलियम क्षेत्र के अस्तर में बहुत-से अंगुली जैसे प्रवर्ध पाए जाते हैं, जिन्हें दीर्घरोम (विलाई) कहते हैं। दीर्घरोम दो कार्य करते हैं-
    • ये अवशोषण के लिए सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं।
    • दीर्घरोम में रुधिर वाहिकाओं की बहुतायत होती है जो पचे हुए भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाते हैं।
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Question 123 Marks
आहार-नाल के भीतर भोजन की गति क्यों होती है?
Answer
आहारनाल के अस्तर में पेशीय परत होती है। इन पेशियों का लयबद्ध संकुचन तथा शिथिलन भोजन को आगे की ओर धकेलता हैं। यह गति क्रमाकुंचक गति कहलाती है। यह गति संपूर्ण आहारनाल में होती है। यह इस प्रकार की गति है जो आहारनाल के भीतर भोजन की गति को सुविधाजनक बना देती है।
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Question 133 Marks
वसा के पायसीकरण का क्या महत्व है?
Answer
वसा के अणु जटिल होते हैं। वे भोजन में बड़े आकार की गोलिकाओं के रूप में उपस्थित होते है जिसमें उन पर एंजाइम का कार्य करना कठिन हो जाता है। वसा के पायसीकरण द्वारा वसा की बड़ी गोलिकाएँ छोटी गोलिकाओं में परिवर्तित हो जाती हैं अर्थात् पित्त रस में उपस्थित पित्त लवण वसा को यांत्रिक रूप से छोटी गोलिकाओं में खण्डित कर देते हैं जिससे वसा-पाचक एंजाइमों की क्रियाशीलता बढ़ जाती है। अतः सम्बन्धित एंजाइम द्वारा वसा का पाचन सरल हो जाता है।
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Question 143 Marks
जठर ग्रंथियों से यदि श्लेष्मा का स्त्राव न हो तो बताइए क्या होगा?
Answer
आमाशय में उपस्थित जठर ग्रन्थियाँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, पेप्सिन एंजाइम तथा श्लेष्मा का स्त्राव करती है। श्लेष्मा आमाशय के अस्तर को हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा पेप्सिन एंजाइम के प्रभाव से सुरक्षा देता है। यदि श्लेष्मा का स्त्राव न हो तो आमाशय का अस्तर में क्षय हो सकता है जिससे अम्लीयता तथा अल्सर (एक उदर रोग) हो सकता है।
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Question 153 Marks
माँसाहारियों की अपेक्षा शाकाहारियों की छोटी आँत लंबी क्यों होती है?
Answer
क्योंकि सेल्यूलोज के पाचन में अधिक समय लगता है। अतः शाकाहारी (घास खाने वाले) जीवों को अधिक लम्बी छोटी आँत की आवश्यकता होती है जिससे सेल्यूलोज का पूर्ण पाचन हो सके। माँसाहारी जीव सेल्यूलोज का पाचन नहीं कर सकते हैं। अतः उनकी आंत छोटी होती है।
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Question 163 Marks
प्रकाश-संश्लेषण के लिए पत्ती में कौन-कौन से अनुकूलन पाए जाते हैं?
Answer
प्रकाश संश्लेषण के लिए पत्ती में निम्नलिखित अनुकूलन हैं:
  1. ​​​​​​सतही क्षेत्रफल- पत्तियाँ पतली तथा चपटी होती हैं। अतः गैसों के विनिमय और अधिकाधिक प्रकाश के अवशोषण के लिए अधिक सतही क्षेत्रफल प्रदान करती है।
  2. स्थिति- पत्ती डंठल द्वारा बाहर की ओर कुछ इस प्रकार स्थित होती हैं कि वे शुद्ध वायु तथा उचित सूर्य के प्रकाश के साथ सम्पर्क में आ सकें। वे प्रकाश स्रोत के साथ समकोण पर व्यवस्थित होती है।
  3. वाहिकाएँ तथा वाहिनिकाएँ- पत्तियों की वाहिकाएँ तथा वाहिनिकाएँ आपस में जुड़कर जल सवंहन वाहिकाओं का एक सतत् जाल बनाती है जो पत्तियों की मीसोफिल कोशिकाओं से तथा पादप के विभिन्न अंगों की ओर पदार्थों का तीव्रता से संवहन करने में समर्थ होता है। पत्ती के मध्य में स्थित सबसे बड़ी वाहिका (शिरा) अर्थात् मध्यशिरा तथा अन्य छोटी-छोटी वाहिनिकाएँ पत्ती के उच्चतम बिन्दु तक संवहन में सहायता करती हैं। इस प्रकार वे गैसीय विनिमय तथा पोषक तत्वों की आपूर्ति में सहायता करती है।
  4. क्लोरोफिल- यह प्रकाश संश्लेषण में सहायक एक वर्णी लवक है जो आवश्यक प्रकाश ऊर्जा के अवशोषण में सहायता करता है।
  5. पत्तियों की सतह पर गैसीय विनिमय तथा वाष्पोत्सर्जन के लिए असंख्य छोटे-छोटे पर्णरन्ध्र (स्टोमेटा) की उपस्थित होते हैं।
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Question 173 Marks
धमनी और शिरा में अंतर बताइए।
Answer
धमनी और शिरा में अंतर:
धमनी शिरा
धमनी की भित्ति मोटी तथा लचीली होती है जो फैलने (चौड़ा होने) तथा सिकुड़ने (पतला होने) में समर्थ होती हैं। शिराएँ धमनियों की अपेक्षा पहली तथा अप्रत्यास्थ होती हैं।
यह रूधिर को हृदय से शरीर के विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं। शिराएँ विभिन्न अंगों से रूधिर एकत्र करके वापस हृदय में लाती हैं।
ये प्रायः शरीर में पेशियों के बीच गहराई में स्थित होती हैं। ये प्राय: शरीर में त्वचा की सतह के पास स्थित होती हैं।
ये शिराओं की अपेक्षा अधिक माँसल होती हैं। ये धमनियों की अपेक्षा कम माँसल होती हैं।
इनकी मोटी तथा लचीली भित्ती हृदय से आने वाले उच्च दाब युक्त रूधिर को सहन कर सकने में समर्थ होती है। इनकी भित्ती पतली होती है क्योंकि इनमें बहने वाले रूधिर में उच्च दाब नहीं होता है।
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Question 183 Marks
कॉलम (I) के अंतर्गत दिए गए शब्दों को कॉलम (II) के शब्दों से मिलान कीजिए।
कॉलम (I) कॉलम (II)
(i) फ्लोएम (क) उत्सर्जन
(ii) नेफ्रॉन (ख) भोजन का परिसंचरण
(iii) शिराएँ (ग) रुधिर का थक्कन
(iv) रुधिर पट्टिकाएँ (घ) विऑक्सीजनित रुधिर
Answer
(i) - (ख), (ii) - (क), (iii) - (घ), (iv) - (ग)
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Question 193 Marks
वायवीय श्वसन किस प्रकार अवायवीय श्वसन से भिन्न होता है?
Answer
वायवीय श्वसनऔर अवायवीय श्वसन में भिन्नताएँ इस प्रकार हैं:
वायवीय श्वसन अवायवीय श्वसन
ऑक्सीजन क्रियाधार के खण्डन के लिए प्रयुक्त होती है। ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है।
यह कोशिकाद्रव्य (ग्लाइकोलाइसिस) में तथा माइट्रोकॉन्ड्रिया (क्रेब्स-चक्र) में होता है। यह केवल जीवद्रव्य में होता है।
अंतिम उत्पाद कार्बन डाई ऑक्साइड तथा जल है। अन्तिम उत्पाद लैक्टिक अम्ल अथवा एथेनॉल तथा कार्बन डाई ऑक्साइड है।
अधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। कम मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।
ग्लूकोज का पूर्ण उपचयन (ऑक्सीकरण) होता है। ग्लूकोज का अपूर्ण उपचयन होता है।
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Question 203 Marks
गमले में लगे एक स्वस्थ पौधे की पत्तियों पर वेसलीन लगा दी गईं क्या यह पौधा लंबे समय तक जीवित बना रहेगा? अपने उत्तर के समर्थन मे कारण बताइए।
Answer
यह पौधा लम्बे समय तक जीवित नहीं रहेगा क्योंकि-
  1. वेसलीन की परत, पत्तियों पर एक अपारगम्य परत बनाएगी तथा पौधा श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त नहीं कर पाएगा।
  2. इससे स्टोमेटा बन्द हो जाऐंगे तथा गैसों का आदान-प्रदान एवं वाष्पोत्सर्जन बन्द हो जाएगा तथा पौधे की पत्तियाँ प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्चे पदार्थ प्राप्त करने में समर्थ नहीं होगी।
  3. यह प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड प्राप्त नहीं कर पाएगा। अतः पौधा अपने भोजन का संश्लेषण नहीं कर सकेगा तथा धीरे-धीरे मृत्यु की ओर अग्रसर होता जाएगा।
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Question 213 Marks
पृथ्वी पर से यदि सभी हरे पौधे समाप्त हो जाएँ तो क्या होगा?
Answer
हरे पौधे सभी जीवों के लिए ऊर्जा का स्रोत होते हैं। ये ऐसी मुख्य कड़ी हैं जिसके द्वारा सौर ऊर्जा का स्थानान्तरण अन्य जीवों में होता है। अन्य सभी जीव अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से हरे पौधों पर निर्भर होते हैं। यदि पृथ्वी पर से सभी हरे पौधे समाप्त हो जाएँ तो सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में नहीं बदला जाएगा और सभी शाकाहारी भूख से मर जाऐंगे और अन्ततः माँसाहारी भी मर जाएँगे। इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर से जीवन विलुप्त हो जाएँगा।
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Question 223 Marks
क्या किसी जीव के लिए पोषण आवश्यक है? विवेचना कीजिए।
Answer
पोषण की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है-
  1. यह शरीर की विभिन्न उपापचयी प्रक्रियाओं के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
  2. यह नई कोशिका की वृद्धि तथा मृत अथवा टूटी-फूटी कोशिकाओं को बदलने अथवा मरम्मत के लिए आवश्यक होती है।
  3. यह विभिन्न रोगों के विरूद्ध प्रतिरोधकता को विकसित करने के लिए आवश्यक होता है।
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Question 233 Marks
स्वपोषी और विषमपोषी जीवों में अंतर बताइए।
Answer
स्वपोषी और विषमपोषी जीवों में अंतर:
स्वपोषी विषमपोषी
ये जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। ये जीव अपने भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर होते हैं।
इनमें क्लोरोफिल होती है। इनमें क्लोरोफिल का अभाव होता है।
इनमें प्रकाश-संश्लेषण होता है जिसके लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक होता है। इनमें प्रकाश संश्लेषण नहीं होता है।
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Question 243 Marks
जल से बाहर निकाले जाने पर मछलियाँ क्यों मर जाती हैं?
Answer
मछलियाँ गलफड़ों (गिल्स) द्वारा जल में विलेय ऑक्सीजन को ग्रहण करने में समर्थ होती हैं। गलफड़ों में अत्यधिक संख्या में रक्त कोशिकाएँ पाई जाती हैं और जल में विलेय ऑक्सीजन को तुरन्त ही अवशोषित कर लेती हैं परन्तु गलफड़े वायु से ऑक्सीजन ग्रहण नहीं कर पाते हैं। अतः किसी मछली को जल से बाहर निकाल लेने पर वह ऑक्सीजन को श्वास द्वारा ग्रहण करने में असमर्थ होती है अतः शीघ्र ही मर जाती है।
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Question 253 Marks
यदि कोई पौधा दिन में कार्बन डाइऑक्साइड निकाल रहा है और ऑक्सीजन ले रहा है, तो क्या इसका अर्थ यह हुआ कि उस पौधे में प्रकाशसंलेषण नहीं हो रहा है? अपने उत्तर का औचित्य बताइए।
Answer
कार्बन डाई ऑक्साइड का निकलना और ऑक्सीजन का ग्रहण करना संकेत करता है कि उस पौधे में या तो प्रकाश संश्लेषण नहीं हो रहा है अथवा उसकी गति अत्यन्त कम है। प्रायः दिन के समय, प्रकाश संश्लेषण की गति रात में श्वसन की गति से बहुत अधिक होती है। अतः श्वसन के दौरान उत्पन्न $CO _2$ प्रकाश संश्लेषण के दौरान प्रयोग कर ली जाती है। अतः $CO _2$ गैस नहीं निकलती है।
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Question 263 Marks
दो हरे पौधों को अलग-अलग ऑक्सीजन मुक्त पात्रों में रखा गया। एक पात्र को अंधेरे में और दूसरे को अविच्छिन्न प्रकाश में। बताइए कि इनमें से कौन-सा पौधा अधिक समय तक जीवित रहेगा? कारण बताइए।
Answer
अविच्छिन्न प्रकाश में रखा पौधा अधिक समय तक जीवित रहेगा। इसके कारण हैं-
अंधेरे में रखा पौधा प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सम्पादित करने में असमर्थ है तथा कुछ देर में पादप द्वारा श्वसन करने के कारण उसका पात्र $CO _2$ से भर जाएगा। पात्र में ऑक्सीजन की कमी के कारण यह पौधा मर जाएगा।
जबकि, प्रकाश में रखा पौधा प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सम्पादित करने में समर्थ होगा और इसीलिए वह श्वसन के समय निकलने वाली $CO _2$ को $O _2$ में परिवर्तित करने में समर्थ होगा। अतः, यह पौधा अधिक समय तक जीवित रहेगा।
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Question 273 Marks
बताइए कि द्वार-कोशिकाएँ किस प्रकार रंध्रों के खुलने और बंद होने का नियमन करती हैं।
Answer

जल के अवशोषण के कारण द्वार रन्ध्रों का कोशिकाएँ फूल जाती है जिसके कारण रन्ध्र खुल जाते हैं जबकि द्वारा-कोशिकाओं के सिकुड़ने के कारण रन्ध्र बंद हो जाते हैं। रन्ध्रों का खुलना तथा बन्द होना का नियमन द्वारा-कोशिकाओं में स्फीति परिवर्तनों के कारण होता है। द्वार-कोशिकाएँ जब स्फीति होती है तब रन्ध्र खुल जाते है, जबकि शिथिल अवस्था में रन्ध्र बंद हो जाते हैं।

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Question 283 Marks
सभी पौधे दिन में तो ऑक्सीजन बाहर निकालते हैं और रात में कार्बन डाईऑक्साइड, क्या आप इस कथन से सहमत हैं, कारण बताइए।
Answer
सभी पौधे एक साथ दो प्रक्रम सम्पादित करते हैं, प्रकाश संश्लेषण तथा श्वसन। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया दिन के समय होती है, जब सूर्य का प्रकाश पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है। इस प्रक्रिया के दौरान, पौधे के हरे भाग (विशेषतः पत्तियाँ) सूर्य के प्रकाश तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति में ग्लूकोज, जल तथा ऑक्सीजन गैस उत्पन्न करते हैं। दिन में पादपों के श्वसन करने से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को पादप प्रकाश संश्लेषण में प्रयोग कर लेते है।
श्वसन एक अन्य प्रक्रिया है जो सभी जन्तुओं एवं पौधों द्वारा सम्पादित की जाती है। यह निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। जिसमें ग्लूकोज $CO _2$, $H_2O$ एवं ऊर्जा में विखण्डित होता है। यह ऊर्जा ATP के रूप में मुक्त होती है। यह प्रक्रिया दिन के प्रकाश अथवा रात के अंधेरे से प्रभावित हुए बिना निरंतर चलती रहती है। रात के समय पादप प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाते है और श्वसन के दौरान निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण में छोड़ते हैं।
इस प्रकार हरे पौधों द्वारा केवल दिन के समय (सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति) में ही ऑक्सीजन गैस को बाहर निकालना सम्भव हो पाता है।
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Question 293 Marks
निम्नलिखित के नाम बताइए:
  1. पादपों में होने वाली वह प्रक्रिया जो सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलती है।
  2. वे जीव जो अपना भोजन स्वयं तैयार कर लेते हैं
  3. वह कोशिकांग जहाँ प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया संपन्न होती है
  4. रंध्र के चारों तरफ स्थित कोशिकाएँ
  5. वे जीव जो अपना भोजन स्वयं तैयार नहीं कर सकते
  6. आमाशय की जठर ग्रंथियों द्वारा स्रावित एक एंजाइम जो प्रोटीनों पर अभिक्रिया करता है।
Answer
उपर्युक्त कथनों के लिए एक शब्द इस प्रकार है:
  1. प्रकाश संश्लेषण
  2. स्वपोषी
  3. हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट)
  4. द्वार (रक्षक) कोशिकाएँ
  5. विषमपोषी
  6. पेप्सिन
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