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लंबा उत्तर। प्रश्न (5 गुण)

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Question 15 Marks
झील किसे कहते हैं? भारत में झीलों का वर्णन कीजिये।
Answer
झील-पृथ्वी की सतह के गर्त वाले भागों में जहाँ जल जमा हो जाता है, उसे झील कहते हैं।
भारत में झीलें-भारत में भी अनेक झीलें पायी जाती हैं। आकार तथा अन्य लक्षणों के आधार पर इनमें अन्तर पाया जाता है। ये अग्र प्रकार की हो सकती हैं-
स्थायी अथवा अस्थायी/मौसमी
प्राकृतिक अथवा मानव निर्मित
मीठे पानी की अथवा खारे पानी की।
(1) स्थायी अथवा अस्थायी झीलें-अधिकतर झीलें स्थायी होती हैं। केवल कुछ में वर्षा ऋतु में ही पानी आता है। जैसे-
अन्तर्देशीय अपवाह वाले अर्धशुष्क क्षेत्रों की द्रोणी वाली झीलें । उदाहरणार्थ-राजस्थान की सांभर झील।
(2) प्राकृतिक अथवा मानव निर्मित-प्राकृतिक कारकों की क्रियाओं के फलस्वरूप बनने वाली झीलें प्राकृतिक झीलें कहलाती हैं। इनमें हिमानियों, बर्फ की चट्टानों, वायु, नदियों तथा भूगर्भीय क्रियाओं को सम्मिलित किया जाता है। स्पिट तथा बार (रोधिका) तटीय क्षेत्रों में लैगून का निर्माण कर प्राकृतिक झील बनाते हैं। उदाहरणार्थ वूलर, डल, चिल्का आदि झीलें।
मनुष्य द्वारा नदियों पर बांध बनाने से भी झील का निर्माण हो जाता है। यह मानवनिर्मित झील कहलाती है। उदाहरणार्थ-गुरु गोबिन्द सागर।
(3) मीठे पानी की अथवा खारे पानी की झीलें-जिन झीलों का पानी मीठा होता है, वे मीठे पानी की झीलें तथा जिनका जल लवणीय होता है, वे खारे पानी की झीलें कहलाती हैं। मीठे पानी की अधिकांश झीलें हिमालय क्षेत्र में हैं। ये मुख्यतः हिमानी द्वारा बनी हैं। वूलर, डल, भीमताल, नैनीताल, लोकताक तथा बड़ापानी कुछ महत्वपूर्ण मीठे पानी की झीलें हैं। चिल्का झील, पुलीकट झील, कोलेरू झील, सांभर झील आदि खारे पानी की झीलें हैं।
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Question 25 Marks
प्रायद्वीपीय नदियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिये।
Answer
प्रायद्वीपीय नदियाँ प्रायद्वीपीय नदियों को उनके अपवाह क्षेत्र के आधार पर दो भागों में बाँटा जा सकता है-
I. पश्चिम में बहने वाली अथवा अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ-अरब सागर में गिरने वाली नदियों में नर्मदा व तापी नदी मुख्य हैं। इनका वर्णन निम्न प्रकार है-
(1) नर्मदा द्रोणी-नर्मदा नदी का उद्गम मध्यप्रदेश में अमरकंटक पहाड़ी के निकट है। वहाँ से निकलकर यह भ्रंश घाटी में प्रवाहित होती है। यह नदी अपने अपवाह क्षेत्र में अनेक दर्शनीय स्थलों का निर्माण करती है। जबलपुर के निकट संगमरमर की चट्टानों में यह गहरे गार्ज से बहती है तथा आगे तीव्र ढाल से गिरकर 'धुंआधार प्रपात' बनाती है। इसकी सभी सहायक नदियाँ छोटी हैं। ये नर्मदा से मिलकर जालीनुमा प्रतिरूप का निर्माण करती हैं।
(2) तापी द्रोणी-यह मध्यप्रदेश के बेतुल जिले में सतपुडा की श्रृंखलाओं से निकलती है। यह भी भ्रंश घाटी ती है। इसकी लम्बाई बहत कम है। तापी की द्रोणी मध्यप्रदेश, गजरात तथा महाराष्ट्र राज्यों में है। पश्चिम की ओर बहने वाली अन्य नदियाँ साबरमती, माही, भारत-पुजा तथा पेरियार हैं।
II. पूर्व की ओर बहने वाली अथवा बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ-इनमें मुख्य नदियाँ गोदावरी, महानदी, कृष्णा तथा कावेरी हैं।
(1) गोदावरी-यह सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी है। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चिमी घाट की ढालों से निकलती है। यह लगभग 1500 कि.मी. लम्बी है। इसका अपवाह क्षेत्र प्रायद्वीपीय नदियों में सबसे बड़ा है। पूर्णा, वर्धा, प्रान्हिता, मांजरा, वेनगंगा एवं पेनगंगा इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। इसकी लम्बाई एवं बड़े अपवाह क्षेत्र के कारण इसे 'दक्षिण गंगा' भी कहा जाता है। यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उड़ीसा एवं आंध्र प्रदेश से होकर बहती है।
(2) महानदी-महानदी छत्तीसगढ़ की उच्च भूमि से निकलती है। इसकी लम्बाई 860 कि.मी. है। यह महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखण्ड तथा उड़ीसा में होकर बहती है।
(3) कृष्णा नदी-यह पश्चिमी घाट में महाबलेश्वर के निकट एक झरने से निकलती है। यह 1400 कि.मी. लम्बी नदी है । तुंगभद्रा, कोयना, घाटप्रभा, मुसी तथा भीमा इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। यह महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश से होकर बहती है।
(4) कावेरी नदी-यह पश्चिमी घाट की ब्रह्मगिरी श्रेणी से निकलती है। अमरावती, भवानी, हेमावती तथा काबिनी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। यह कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु से होकर बहती है। यह 760 कि.मी. लम्बी है। दामोदर, ब्रह्मनी, वैतरणी तथा सुवर्ण रेखा पूर्व की ओर बहने वाली कुछ अन्य नदियाँ हैं।
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Question 35 Marks
गंगा नदी के अपवाह तंत्र की व्याख्या कीजिये।
Answer
हिमालय की नदियाँ हिमालय से निकलने वाली नदियों में तीन नदियाँ प्रमुख हैं-(1) सिन्धु, (2) गंगा तथा (3) ब्रह्मपुत्र। ये नदियाँ बहुत लम्बी हैं तथा इनमें अनेक महत्वपूर्ण तथा बड़ी सहायक नदियाँ आकर मिलती हैं। इनका वर्णन निम्न प्रकार है-
1. सिंधु नदी तंत्र-
(i) उद्गम-सिन्धु का उद्गम मानसरोवर झील के निकट तिब्बत में होता है तथा यह जम्मू-कश्मीर के लद्दाख जिले से भारत में प्रवेश करती है। यह विश्व की सर्वाधिक लम्बी नदियों में से एक है।
(ii) प्रमुख नदियाँ-इस नदी की प्रमुख सहायक नदियों में जास्कर, नूबरा, श्योक, हुंजा, झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास एवं सतलुज शामिल हैं।
(iii) जल प्रवाह प्रारूप-सिन्धु नदी अपने उद्गम से पश्चिम की ओर बहती हुई भारत में जम्मू-कश्मीर के लद्दाख जिले से प्रवेश करती है। इसके बाद ब्लूचिस्तान तथा गिलगित से बहते हुए अटक में यह पर्वतीय क्षेत्र से बाहर निकलती है। इसके बाद दक्षिण की ओर बहते हुए यह कराची से पूर्व की ओर अरब सागर में मिल जाती है। (iv) जल तथा क्षेत्र-इसके द्वारा एक धीमी ढाल वाले मैदान का निर्माण किया जाता है। इसका एक-तिहाई से। थोड़ा अधिक हिस्सा भारत में है जबकि शेष हिस्सा पाकिस्तान में। 2. गंगा नदी तंत्र- (i) उद्गम स्थान-गंगा नदी भारत की सबसे प्रमुख नदी है। गंगोत्री हिमनद इसका उद्गम स्थान है। गंगा नदी वास्तविक रूप में भागीरथी व अलकनन्दा का सम्मिलित रूप है। ये दोनों नदियाँ देव प्रयाग में मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं।
(ii) प्रमुख नदियाँ-गंगा नदी तन्त्र में गंगा की सहायक नदियों में उत्तर से निकलने वाली यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी आदि तथा पठार से निकलने वाली चम्बल, बेतवा, कालीसिंध, सोन आदि नदियाँ शामिल हैं।
(iii) जल प्रवाह प्रारूप-गंगा नदी तन्त्र की सर्वप्रमुख गंगा नदी हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है। इसमें इलाहाबाद के निकट यमुना, गाजीपुर के निकट गोमती व छपरा के निकट घाघरा नदी मिलती है। गंगा की प्रमुख सहायक यमुना नदी यमुनोत्री से निकलती है। यमुना नदी में चम्बल, बेतवा, केन आदि नदियाँ मिलती हैं। गंगा नदी फरक्का के पास बांग्लादेश में प्रवेश करती है। यहाँ इसे पद्मा नदी के नाम से जाना जाता है। अन्तिम चरण में गंगा और ब्रह्मपुत्र समुद्र में विलीन होने से पहले मेघना के नाम से जानी जाती हैं। यह बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले ब्रह्मपुत्र से मिलकर डेल्टा बनाती है। सुन्दरवन नामक यह डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा माना जाता है।
(iv) ढाल तथा क्षेत्र-गंगा की लम्बाई 2500 कि.मी. से भी अधिक है। इसका ढाल बहुत कम है।
(v) विसों का निर्माण-गंगा नदी के ढाल में गिरावट कम होने से (प्रति 6 कि.मी. पर केवल 1 मीटर) इस नदी तंत्र में अनेक बड़े-बड़े विसर्प बन जाते हैं।
3. ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र-
(i) उद्गम स्थान-ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत की मानसरोवर झील के पूर्व तथा सिंधु एवं सतलुज के स्रोतों के बहुत नजदीक से निकलती है।
(ii) प्रमुख नदियाँ-इस नदी तंत्र की सर्वप्रमुख नदी ब्रह्मपुत्र है। इसकी मुख्य सहायक नदियाँ दिबांग, लोहित, केनुला हैं । तिस्ता, जांझी, कुलसी, मानस व कपिली आदि भी उल्लेखनीय सहायक नदियाँ है।
(iii) जल प्रवाह प्रारूप-मानसरोवर झील के निकट से उत्पन्न होकर यह नदी हिमालय के समानान्तर इसके पूर्वी छोर तक जाती है। यहाँ (तिब्बत में) इसे सांगपो के नाम से जानते हैं। नामचा बारवा शिखर के पास पहुँचकर यह U आकार का मोड़ बनाकर भारत के अरुणाचल प्रदेश में गॉर्ज के माध्यम से प्रवेश करती है। यहाँ इसे दिहांग के नाम से जानते हैं। इसके बाद असम होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश कर यह गंगा नदी में मिल जाती है।
(iv) नदीय द्वीप-असम में ब्रह्मपुत्र अनेक धाराओं में बहकर एक गुंफित नदी के रूप में बहती है तथा अनेक नदीय द्वीपों का निर्माण करती है। विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप माजोली ब्रह्मपुत्र में ही स्थित है।
(v) लम्बाई तथा क्षेत्र-ब्रह्मपुत्र नदी की लम्बाई सिन्धु नदी से कुछ अधिक है। लेकिन इसका अधिकतर मार्ग भारत से बाहर स्थित है।
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Question 45 Marks
सिंधु नदी के अपवाह तंत्र की व्याख्या कीजिये।
Answer
हिमालय की नदियाँ हिमालय से निकलने वाली नदियों में तीन नदियाँ प्रमुख हैं-(1) सिन्धु, (2) गंगा तथा (3) ब्रह्मपुत्र। ये नदियाँ बहुत लम्बी हैं तथा इनमें अनेक महत्वपूर्ण तथा बड़ी सहायक नदियाँ आकर मिलती हैं। इनका वर्णन निम्न प्रकार है-
1. सिंधु नदी तंत्र-
(i) उद्गम-सिन्धु का उद्गम मानसरोवर झील के निकट तिब्बत में होता है तथा यह जम्मू-कश्मीर के लद्दाख जिले से भारत में प्रवेश करती है। यह विश्व की सर्वाधिक लम्बी नदियों में से एक है।
(ii) प्रमुख नदियाँ-इस नदी की प्रमुख सहायक नदियों में जास्कर, नूबरा, श्योक, हुंजा, झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास एवं सतलुज शामिल हैं।
(iii) जल प्रवाह प्रारूप-सिन्धु नदी अपने उद्गम से पश्चिम की ओर बहती हुई भारत में जम्मू-कश्मीर के लद्दाख जिले से प्रवेश करती है। इसके बाद ब्लूचिस्तान तथा गिलगित से बहते हुए अटक में यह पर्वतीय क्षेत्र से बाहर निकलती है। इसके बाद दक्षिण की ओर बहते हुए यह कराची से पूर्व की ओर अरब सागर में मिल जाती है। (iv) जल तथा क्षेत्र-इसके द्वारा एक धीमी ढाल वाले मैदान का निर्माण किया जाता है। इसका एक-तिहाई से। थोड़ा अधिक हिस्सा भारत में है जबकि शेष हिस्सा पाकिस्तान में। 2. गंगा नदी तंत्र- (i) उद्गम स्थान-गंगा नदी भारत की सबसे प्रमुख नदी है। गंगोत्री हिमनद इसका उद्गम स्थान है। गंगा नदी वास्तविक रूप में भागीरथी व अलकनन्दा का सम्मिलित रूप है। ये दोनों नदियाँ देव प्रयाग में मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं।
(ii) प्रमुख नदियाँ-गंगा नदी तन्त्र में गंगा की सहायक नदियों में उत्तर से निकलने वाली यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी आदि तथा पठार से निकलने वाली चम्बल, बेतवा, कालीसिंध, सोन आदि नदियाँ शामिल हैं।
(iii) जल प्रवाह प्रारूप-गंगा नदी तन्त्र की सर्वप्रमुख गंगा नदी हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है। इसमें इलाहाबाद के निकट यमुना, गाजीपुर के निकट गोमती व छपरा के निकट घाघरा नदी मिलती है। गंगा की प्रमुख सहायक यमुना नदी यमुनोत्री से निकलती है। यमुना नदी में चम्बल, बेतवा, केन आदि नदियाँ मिलती हैं। गंगा नदी फरक्का के पास बांग्लादेश में प्रवेश करती है। यहाँ इसे पद्मा नदी के नाम से जाना जाता है। अन्तिम चरण में गंगा और ब्रह्मपुत्र समुद्र में विलीन होने से पहले मेघना के नाम से जानी जाती हैं। यह बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले ब्रह्मपुत्र से मिलकर डेल्टा बनाती है। सुन्दरवन नामक यह डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा माना जाता है।
(iv) ढाल तथा क्षेत्र-गंगा की लम्बाई 2500 कि.मी. से भी अधिक है। इसका ढाल बहुत कम है।
(v) विसों का निर्माण-गंगा नदी के ढाल में गिरावट कम होने से (प्रति 6 कि.मी. पर केवल 1 मीटर) इस नदी तंत्र में अनेक बड़े-बड़े विसर्प बन जाते हैं।
3. ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र-
(i) उद्गम स्थान-ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत की मानसरोवर झील के पूर्व तथा सिंधु एवं सतलुज के स्रोतों के बहुत नजदीक से निकलती है।
(ii) प्रमुख नदियाँ-इस नदी तंत्र की सर्वप्रमुख नदी ब्रह्मपुत्र है। इसकी मुख्य सहायक नदियाँ दिबांग, लोहित, केनुला हैं । तिस्ता, जांझी, कुलसी, मानस व कपिली आदि भी उल्लेखनीय सहायक नदियाँ है।
(iii) जल प्रवाह प्रारूप-मानसरोवर झील के निकट से उत्पन्न होकर यह नदी हिमालय के समानान्तर इसके पूर्वी छोर तक जाती है। यहाँ (तिब्बत में) इसे सांगपो के नाम से जानते हैं। नामचा बारवा शिखर के पास पहुँचकर यह U आकार का मोड़ बनाकर भारत के अरुणाचल प्रदेश में गॉर्ज के माध्यम से प्रवेश करती है। यहाँ इसे दिहांग के नाम से जानते हैं। इसके बाद असम होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश कर यह गंगा नदी में मिल जाती है।
(iv) नदीय द्वीप-असम में ब्रह्मपुत्र अनेक धाराओं में बहकर एक गुंफित नदी के रूप में बहती है तथा अनेक नदीय द्वीपों का निर्माण करती है। विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप माजोली ब्रह्मपुत्र में ही स्थित है।
(v) लम्बाई तथा क्षेत्र-ब्रह्मपुत्र नदी की लम्बाई सिन्धु नदी से कुछ अधिक है। लेकिन इसका अधिकतर मार्ग भारत से बाहर स्थित है।
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Question 55 Marks
हिमालय की नदियों की व्याख्या कीजिये।
Answer
हिमालय की नदियाँ हिमालय से निकलने वाली नदियों में तीन नदियाँ प्रमुख हैं-(1) सिन्धु, (2) गंगा तथा (3) ब्रह्मपुत्र। ये नदियाँ बहुत लम्बी हैं तथा इनमें अनेक महत्वपूर्ण तथा बड़ी सहायक नदियाँ आकर मिलती हैं। इनका वर्णन निम्न प्रकार है-
1. सिंधु नदी तंत्र-
(i) उद्गम-सिन्धु का उद्गम मानसरोवर झील के निकट तिब्बत में होता है तथा यह जम्मू-कश्मीर के लद्दाख जिले से भारत में प्रवेश करती है। यह विश्व की सर्वाधिक लम्बी नदियों में से एक है।
(ii) प्रमुख नदियाँ-इस नदी की प्रमुख सहायक नदियों में जास्कर, नूबरा, श्योक, हुंजा, झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास एवं सतलुज शामिल हैं।
(iii) जल प्रवाह प्रारूप-सिन्धु नदी अपने उद्गम से पश्चिम की ओर बहती हुई भारत में जम्मू-कश्मीर के लद्दाख जिले से प्रवेश करती है। इसके बाद ब्लूचिस्तान तथा गिलगित से बहते हुए अटक में यह पर्वतीय क्षेत्र से बाहर निकलती है। इसके बाद दक्षिण की ओर बहते हुए यह कराची से पूर्व की ओर अरब सागर में मिल जाती है। (iv) जल तथा क्षेत्र-इसके द्वारा एक धीमी ढाल वाले मैदान का निर्माण किया जाता है। इसका एक-तिहाई से। थोड़ा अधिक हिस्सा भारत में है जबकि शेष हिस्सा पाकिस्तान में। 2. गंगा नदी तंत्र- (i) उद्गम स्थान-गंगा नदी भारत की सबसे प्रमुख नदी है। गंगोत्री हिमनद इसका उद्गम स्थान है। गंगा नदी वास्तविक रूप में भागीरथी व अलकनन्दा का सम्मिलित रूप है। ये दोनों नदियाँ देव प्रयाग में मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं।
(ii) प्रमुख नदियाँ-गंगा नदी तन्त्र में गंगा की सहायक नदियों में उत्तर से निकलने वाली यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी आदि तथा पठार से निकलने वाली चम्बल, बेतवा, कालीसिंध, सोन आदि नदियाँ शामिल हैं।
(iii) जल प्रवाह प्रारूप-गंगा नदी तन्त्र की सर्वप्रमुख गंगा नदी हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है। इसमें इलाहाबाद के निकट यमुना, गाजीपुर के निकट गोमती व छपरा के निकट घाघरा नदी मिलती है। गंगा की प्रमुख सहायक यमुना नदी यमुनोत्री से निकलती है। यमुना नदी में चम्बल, बेतवा, केन आदि नदियाँ मिलती हैं। गंगा नदी फरक्का के पास बांग्लादेश में प्रवेश करती है। यहाँ इसे पद्मा नदी के नाम से जाना जाता है। अन्तिम चरण में गंगा और ब्रह्मपुत्र समुद्र में विलीन होने से पहले मेघना के नाम से जानी जाती हैं। यह बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले ब्रह्मपुत्र से मिलकर डेल्टा बनाती है। सुन्दरवन नामक यह डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा माना जाता है।
(iv) ढाल तथा क्षेत्र-गंगा की लम्बाई 2500 कि.मी. से भी अधिक है। इसका ढाल बहुत कम है।
(v) विसों का निर्माण-गंगा नदी के ढाल में गिरावट कम होने से (प्रति 6 कि.मी. पर केवल 1 मीटर) इस नदी तंत्र में अनेक बड़े-बड़े विसर्प बन जाते हैं।
3. ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र-
(i) उद्गम स्थान-ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत की मानसरोवर झील के पूर्व तथा सिंधु एवं सतलुज के स्रोतों के बहुत नजदीक से निकलती है।
(ii) प्रमुख नदियाँ-इस नदी तंत्र की सर्वप्रमुख नदी ब्रह्मपुत्र है। इसकी मुख्य सहायक नदियाँ दिबांग, लोहित, केनुला हैं । तिस्ता, जांझी, कुलसी, मानस व कपिली आदि भी उल्लेखनीय सहायक नदियाँ है।
(iii) जल प्रवाह प्रारूप-मानसरोवर झील के निकट से उत्पन्न होकर यह नदी हिमालय के समानान्तर इसके पूर्वी छोर तक जाती है। यहाँ (तिब्बत में) इसे सांगपो के नाम से जानते हैं। नामचा बारवा शिखर के पास पहुँचकर यह U आकार का मोड़ बनाकर भारत के अरुणाचल प्रदेश में गॉर्ज के माध्यम से प्रवेश करती है। यहाँ इसे दिहांग के नाम से जानते हैं। इसके बाद असम होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश कर यह गंगा नदी में मिल जाती है।
(iv) नदीय द्वीप-असम में ब्रह्मपुत्र अनेक धाराओं में बहकर एक गुंफित नदी के रूप में बहती है तथा अनेक नदीय द्वीपों का निर्माण करती है। विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप माजोली ब्रह्मपुत्र में ही स्थित है।
(v) लम्बाई तथा क्षेत्र-ब्रह्मपुत्र नदी की लम्बाई सिन्धु नदी से कुछ अधिक है। लेकिन इसका अधिकतर मार्ग भारत से बाहर स्थित है।
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