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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न [3 M]

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Question 13 Marks
मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है?
Answer
मानव में लिंग का निर्धारण विशेष लिंग गुणसूत्रों के आधार पर होता है। मानव में गुणसूत्र के 23 जोड़ें होते हैं। जिसमें से 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र का होता हैं स्त्रियों में लिंग गुणसूत्र (xx) होते हैं। लेकिन पुरूषों में लिंग गुणसूत्र (xy) होते हैं सभी बच्चे माँ से "x" गुणसूत्र पाते है परन्तु पिता से "x" या "y" कोई भी। इस प्रकार पिता का गुणसूत्र निर्णय लेता है कि बच्चा बेटा है या बेटी।
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Question 23 Marks
मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं?
Answer
मेंडेल के स्वतन्त्र वर्गीकरण के सिद्धांत के अनुसार विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते है। मेंडेल ने इस सिद्धांत को देह्यब्रीड क्रॉस की मदद से सिद्ध किया जाता है।
देह्यब्रीड क्रॉस$-$ गोल और हरे बीज वाले पौधे का यदि झुर्रीदार पीले बीज वाले पौधे के साथ संकरण करवाया जाये तो $F_1$ पीढ़ी के सभी पौधे गोल और पीले बीज देते है क्योंकि बीज का गोल आकार और पीला रंग प्रभावी लक्षण होते है। फिर जब $F_1$ संतति के पौधे का स्वनिषेचन करवाकर $F_2$ पीढ़ी पैदा करवाई गयी तो पाया गया कि $F_2$ संतति के कुछ पौधे गोल और हरे बीज वाले बनते हैं तथा कुछ पौधे झुर्रीदार और पीले बीज वाले भी बनते हैं। इस तरह $F_2$ संतति के कुछ पौधे नए संयोजन प्रदर्शित करते हैं। इस तरह देह्यब्रीड क्रॉस में हमें $9 : 3 : 3 : 1$ का फेनोटिपिक अनुपात प्राप्त होता है।
परन्तु जब हम बीज के आकार और रंग के लक्षणों का स्वतन्त्र फेनोटिपिक अनुपात निकालते हैं तो हमें यह $3:1$ ही प्राप्त होता है जो मोनोह्यब्रीड क्रॉस के दौरान प्राप्त होता है। इस बात से यह सिद्ध होता है कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते है।

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Question 33 Marks
मेंडल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं?
Answer
जब मेंडल ने मटर के लंबे पौधे और बौने पौधे का संकरण कराया तो उसे प्रथम संतति पीढ़ी $\ce{F1}$ में सभी पौधे लंबे प्राप्त हुए थे। इस का अर्थ था कि दो लक्षणों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई दिया। उन दोनों का मिश्रित प्रमाण दिखाई नहीं दिया। उसने पैतृक पौधों और $\ce{F1}$ पीढ़ी के पौधों को स्वपरागण से उगाया। इस दूसरी पीढ़ी $\ce{F2}$ में सभी पौधे लंबे नहीं थे। इसमें एक चौथाई पौधे बौने थे। मेंडल ने लंबे पौधों के लक्षण को प्रभावी और बौने पौधों के लक्षण को अप्रभावी कहा।
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Question 43 Marks
कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग ज्ञात करने के उद्देश्य से एक प्रोजेक्ट बनाइए।
Answer
कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग ज्ञात करने के उद्देश्य से :
  1. सबसे पहले अपने आसपास के क्षेत्र में सर्वे के द्वारा कुत्तों की आबादी के बारे में पता लगाते हैं।
  2. इसके पश्चात् विभिन्न रंग की खाल $($त्वचा$)$ वाले कुत्तों का प्रतिशत ज्ञात किया जाता है।
  3. अब ऐसे कुत्तों का पता लगाते हैं जिन कुत्तों के माता$-$पिता एवं उनके बच्चों की खाल का रंग समान होता है।
  4. अब दो विभिन्न रंग की खाल वाले कुत्तों में क्रॉस करवाते हैं, जैसे एक काले रंग का समयुग्मजी $($Homozygous$)$ नर कुत्ते का क्रॉस एक सफेद रंग की समयुग्मजी $($Homozygous$)$ मादा से करवाते हैं, तो प्रथम पीढ़ी $(\ce{F1})$ में प्रदर्शित होने वाला रंग ही प्रभावी होगा। मान लीजिये प्रथम पीढ़ी $(\ce{F1})$ में तमाम कुत्ते काले रंग के उत्पन्न होते हैं। इसका तात्पर्य है कि त्वचा का काला रंग प्रभावी है।
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Question 53 Marks
किसी दिए गये हरे तने वाले गुलाब के पौधे को GG से दर्शाया गया है तथा भूरे तने वाले गुलाब के पौधे को gg से दर्शाया गया है। इन दोनों पौधों के बीच संकरण कराया गया है-
(अ) नीचे दिए गये अनुसार अपने प्रेक्षणों की सूची बनाइए।
1. इनकी F1 संतति में तने का रंग,
2. यदि F1 संतति के पौधों का स्वपरागण कराया जाये तो F2 संतति में भूरे तने वाले पौधों की प्रतिशतता,
3. F2 संतति में GG और Gg का अनुपात ।
(ब) इस संकरण की जाँच के आधार पर क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
Answer
(अ) 1. F1 संतति में तने का रंग हरा होगा।
2. F2 संतति में भूरे तने वाले पौधों की प्रतिशतता 25 प्रतिशत होगी।
3. F2 संतति में GG और Gg का अनुपात 1 : 2 होगा।
(ब) इस संकरण की जाँच के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि गुलाब के पौधे में तने का हरे रंग का लक्षण प्रभावी लक्षण है जबकि तने के भूरे रंग का लक्षण अप्रभावी लक्षण है। ये दोनों लक्षण एक-दूसरे में समाते नहीं हैं किन्तु अगली संतति में एक-दूसरे से अलग-अलग हो जाते हैं।
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Question 63 Marks
ग्रेगर जॉन मेण्डल का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
Answer
मेण्डल की प्रारम्भिक शिक्षा एक गिरजाघर में हुई थी तथा ये विज्ञान एवं गणित के अध्ययन के लिए वियना विश्वविद्यालय गए। अध्यापन हेतु सर्टिफिकेट की परीक्षा में असफल होना उनकी वैज्ञानिक खोज की प्रवृत्ति को दबा नहीं सका। वह अपने मोनेस्ट्री में वापस गए तथा मटर पर प्रयोग करना प्रारम्भ किया। उनसे पहले भी बहुत से वैज्ञानिकों ने मटर एवं अन्य जीवों के वंशागत गुणों का अध्ययन किया था परन्तु मेण्डल ने अपने विज्ञान एवं गणितीय ज्ञान को सम्मिलित किया। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने प्रत्येक पीढ़ी के एक-एक पौधे द्वारा प्रदर्शित लक्षणों का रिकॉर्ड रखा तथा गणना की। इससे उन्हे वंशागत नियमों के प्रतिपादन मे सहायता मिली |
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Question 73 Marks
ऐसे कारणों का वर्णन कीजिए जिनसे विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।
Answer
निम्न कारणों से विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं-
(i) वातावरणीय परिस्थितियों, जैसे-प्रकाश, ताप, पोषक पदार्थों, विकिरणों आदि द्वारा जीवधारियों में विभिन्नताएँ उत्पन्न हो जाती हैं।
(ii) आनुवंशिक पदार्थ जीन एवं गुणसूत्र की संख्या व रचना में परिवर्तन के फलस्वरूप विभिन्नताएँ उत्पन्न हो जाती हैं।
(iii) नये जीव का जन्म नर व मादा युग्मकों के संयोजन से होता है। अतः इस द्विजनकता (Dual Parentage) के कारण दो जीवों के आनुवंशिक पदार्थ मिलते हैं, जिसके फलस्वरूप जीवों में जीन अन्तर-क्रिया होती है और विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।
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Question 83 Marks
लिंगसूत्र एवं अलिंगसूत्र क्या है? समझाइए।
Answer
(i) लिंगसूत्र-वे गुणसूत्र जो लिंग का निर्धारण करते हैं, लिंग गुणसूत्र कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं। इन्हें X एवं Y गुणसूत्र कहते हैं। X गुणसूत्र आकार में बड़ा तथा आकृति में सीधा होता है किन्तु Y गुणसूत्र आकार में छोटा तथा आकृति में एक सिरे पर कुछ मुड़ा हुआ होता है
(ii) अलिंगसूत्र-लिंग गुणसूत्रों के अतिरिक्त शेष गुणसूत्र जो शरीर के सभी लक्षणों (केवल लिंग गुणों को छोड़कर) का निर्धारण करते हैं, अलिंग गुणसूत्र कहलाते हैं। मानव में 22 जोड़ी अलिंग गुणसूत्र होते
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Question 93 Marks
मेण्डल के नियमों के महत्त्व लिखिए।
Answer
मेण्डल के नियमों के महत्त्व निम्नलिखित हैं-
(i) मेण्डल के नियमों की सहायता से उन्नत व संकर प्रजातियों को उत्पन्न किया जाता है।
(ii) इन प्रजातियों में अधिक उत्पादन, अधिक अनुकूलनता, रोधक क्षमता आदि गुण पाये जाते हैं।
(iii) प्रजनन विज्ञान में मेण्डल के नियमों का बड़ा योगदान है।
(iv) ये असाध्य रोगों की पहचान करने व उपचार में सहायक हैं।
(v) मेण्डल के कार्यों से जैव तकनीक और जैव अभियांत्रिकी को भी बल मिला। (vi) सुजननिकी में मानव एवं अन्य जीवों में जीवन स्तर (vi) गुणवत्ता व श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म संरक्षण को बढ़ावा देने में मेण्डल के नियम उपयोगी हैं।
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Question 103 Marks
मेंडल ने यह किस प्रकार स्पष्ट किया कि सम्भव है कोई लक्षण वंशानुगत हो जाए किन्तु किसी जीव में व्यक्त ना हो ?
Answer
मंडल ने एक लक्षण वंशागति प्रयोग में शुद्ध लम्बे (TT) व शुद्ध बौने पौधे (tt) में संकरण कराया जिससे प्राप्त F₁ पीढ़ी के सभी पौधे लम्बे (Tt) थे। F₁ पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण द्वारा प्राप्त की गई F₂ पीढ़ी में लम्बे व बौने दोनों प्रकार के पौधे थे। इस प्रेक्षण से मेंडल ने यह निष्कर्ष निकाला की बौनेपन का लक्षण F₂ पीढ़ी के पौधों में तभी प्रकट होगा जब वह F₁ पीढ़ी के पौधों में उपस्थित रहा हो, किन्तु F₁ पीढ़ी में बौनेपन का लक्षण प्रकट ना होना यह दर्शाता है कि यह लक्षण पौधों में वंशानुगत होने के बाद भी लम्बेपन के लक्षण के प्रभावी होने के कारण प्रकट नहीं हो पाता है। इस प्रकार मेंडल ने यह स्पष्ट किया कि जीव में भले ही अप्रभावी लक्षण वंशानुगत हो जाए लेकिन प्रभावी लक्षण की उपस्थिति में यह व्यक्त नहीं होता है।
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Question 113 Marks
शुद्ध लम्बे एवं अशुद्ध (संकर) लम्बे पौधों से आप क्या समझते हैं?
Answer
शुद्ध लम्बे पौधे - ऐसे पौधे जिनमें तने की ऊँचाई को नियंत्रित करने वाले दोनों कारक (जीन) लम्बेपन के हों (TT), शुद्ध लम्बे पौधे कहलाते हैं।
अशुद्ध (संकर) लम्बे पौधे - ऐसे पौधे जिनसे पौधे की ऊँचाई नियंत्रित करने वाले दोनों कारकों में से एक लम्बेपन का व दूसरा बौनेपन (Tt) का हो, लम्बेपन के लक्षण का प्रभावी होने के कारण ऐसे पौधे भी शुद्ध लम्बे पौधों के समान लम्बे होते हैं।
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Question 123 Marks
आनुवंशिकता कार्यविधि किस प्रकार होती है? ### जीन लक्षणों को किस प्रकार नियंत्रित करते हैं?
Answer
कोशिका के डी.एन.ए. में प्रोटीन संश्लेषण के लिए एक सूचना स्रोत होता है। डी.एन.ए. का वह भाग जिसमें किसी प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना होती है, उस प्रोटीन का जीन कहलाता है। प्रोटीन विभिन्न लक्षणों की अभिव्यक्ति को नियंत्रित करती है। इसे एक उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है-
हम जानते हैं कि पौधों में कुछ हॉर्मोन होते हैं जो लंबाई का नियंत्रण करते हैं। अतः किसी पौधे की लंबाई पौधे में उपस्थित उस हॉर्मोन की मात्रा पर निर्भर करती है। पौधे के हॉर्मोन की मात्रा उस प्रक्रम की दक्षता पर निर्भर करेगी जिसके द्वारा यह उत्पादित होता है। एंजाइम इस प्रक्रम के लिए महत्वपूर्ण है। यदि यह एंजाइम दक्षता से कार्य करेगा तो हॉर्मोन पर्याप्त मात्रा में बनेगा तथा पौधा लंबा होगा। (एंजाइम प्रोटीन से बने होते हैं) यदि इस प्रोटीन के जीन में कुछ परिवर्तन आते हैं तो बनने वाली प्रोटीन (एंजाइम) की दक्षता पर प्रभाव पड़ेगा जिससे वह कम दक्ष होगी अतः बनने वाले हार्मोन की मात्रा भी कम होगी तथा पौधा बौना होगा। इस प्रकार जीन विभिन्न लक्षणों को नियंत्रित करते हैं।
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