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Question 12 Marks
सरकारें न्याय के तीनों सिद्धान्तों के बीच सामञ्जस्य बिठाने में क्या कठिनाई महसूस करती हैं?
Answer
सरकारें कभी-कभी न्याय के तीनों सिद्धान्तों के बीच सामञ्जस्य बिठाने में निम्न कठिनाई महसूस करती हैं-
(1) समकक्षों के बीच समान बरताव के सिद्धान्त पर अमल कभी-कभी योग्यता को उचित प्रतिफल देने के खिलाफ खड़ा हो जाता है।
(2) योग्यता को पुरस्कृत करने को न्याय का प्रमुख सिद्धान्त मानने पर जोर देने का अर्थ यह होगा कि हाशिये पर खड़े तबके कई क्षेत्रों में वंचित रह जायेंगे।
ऐसी स्थिति में सरकार की जिम्मेदारी बन जाती है कि वह एक न्यायपरक समाज को बढ़ावा देने के लिए न्याय के विभिन्न सिद्धान्तों के बीच सामञ्जस्य स्थापित करे।
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Question 22 Marks
प्लेटो के अनुसार न्याय का गुण क्या है?
Answer
प्लेटो के अनुसार न्याय में सभी लोगों की भलाई निहित रहती है। न्याय में कुछ लोगों के लिए हित और कुछ लोगों के लिए अहित की भावना नहीं होती, बल्कि उसमें सबका हित निहित होता है। इसलिए जो स्थिति या कानून या नियम सबके लिए हितकारी है, वही न्याय है।
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Question 32 Marks
न्याय का क्या अर्थ है? कोई एक परिभाषा दीजिये।
Answer
न्याय का सरोकार समाज में हमारे जीवन और सार्वजनिक जीवन को व्यवस्थित करने के नियमों और तरीकों से होता है, जिनके द्वारा समाज के विभिन्न सदस्यों के बीच सामाजिक लाभ और सामाजिक कर्त्तव्यों का बँटवारा किया जाता है।
प्लेटो ने न्याय को परिभाषित करते हुए लिखा है कि, 'प्रत्येक व्यक्ति को उसका प्राप्य मिल जाय, यही न्याय है।'
मनुष्य होने के नाते हर व्यक्ति का प्राप्य यह है कि उन्हें अपनी प्रतिभा के विकास और लक्ष्य की पूर्ति के लिए अवसर प्राप्त हों तथा सभी व्यक्तियों को समुचित और बराबर महत्व दिया जाये।
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Question 42 Marks
ग्लाउकॉन और एडीमंटस के अनुसार अन्यायी लोग न्यायी लोगों से किस प्रकार बेहतर स्थिति में हैं?
Answer
ग्लाउकॉन के अनुसार, अन्यायी लोग अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए कानून तोड़ते-मरोड़ते हैं, कर चुकाने से कतराते हैं, झूठ और धोखाधड़ी का सहारा लेते हैं। इसलिए वे न्याय के रास्ते पर चलने वाले लोगों से ज्यादा सफल होते हैं।
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Question 52 Marks
समानुपातिक न्याय क्या है? स्पष्ट कीजिये।
Answer
समानुपातिक न्याय-समानुपातिक न्याय से यह आशय है कि लोगों को मिलने वाले लाभों को तय करते समय उनके विभिन्न प्रयासों और कौशलों को मान्यता दी जाये अर्थात् लोगों को उनके प्रयास के पैमाने और अर्हता के अनुपात में पुरस्कृत किया जाये। काम के लिए वांछित मेहनत, कौशल, संभावित खतरे आदि कारकों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग पारिश्रमिक निर्धारण करना ही समानुपातिक न्याय है। लेकिन समाज में न्याय के लिए समान बरताव के सिद्धान्त के साथ ही समानुपातिकता के सिद्धान्त का संतुलन बिठाना आवश्यक है।
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Question 62 Marks
हम किस तरह के समाज को अन्यायपूर्ण कहेंगे?
Answer
हम उस समाज को अन्यायपूर्ण कहेंगे, जहाँ धनी और गरीब के बीच खाई इतनी गहरी हो कि वे बिल्कुल भिन्न-भिन्न दुनिया में रहने वाले लगें और जहाँ अपेक्षाकृत वंचितों को अपनी स्थिति सुधारने का कोई मौका न मिले, चाहे वे कितना ही कठिन श्रम क्यों न करें। दूसरे शब्दों में यदि किसी समाज में बेहिसाब धन-दौलत और इसके स्वामित्व के साथ जुड़ी सत्ता का उपभोग करने वालों तथा बहिष्कृतों और वंचितों के बीच गहरा और स्थायी विभाजन मौजूद हो, तो हम उस समाज को अन्यायपूर्ण समाज कहेंगे।
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Question 72 Marks
न्यायपूर्ण समाज के लिए क्या आवश्यक है?
Answer
न्यायपूर्ण समाज-न्यायपूर्ण समाज को लोगों के लिए न्यूनतम बुनियादी स्थितियाँ जरूर उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि वे स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जीने में सक्षम हो सकें; समाज में अपनी प्रतिभा का विकास कर सकें तथा इसके साथ ही समान अवसरों के जरिये अपने चुने हुए लक्ष्य की ओर बढ़ सकें।
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Question 82 Marks
राज्य को समाज के सबसे वंचित सदस्यों की मदद के तीन तरीके बताइये।
Answer
(1) खुली प्रतियोगिता को बढ़ावा देना तथा समाज के सुविधा प्राप्त सदस्यों को हानि पहुँचाये बिना सुविधाहीनों की मदद करना।
(2) सरकार द्वारा गरीबों को न्यूनतम बुनियादी सुविधाएँ मुहैया कराना।
(3) वंचितों के लिए आरक्षण की नीति लागू करना।
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Question 92 Marks
मुक्त बाजार व्यवस्था के समर्थन में तीन तर्क दीजिये।
Answer
(1) मुक्त बाजार व्यवस्था से योग्यता और प्रतिभा के अनुसार प्रतिफल मिलेगा।
(2) मुक्त बाजार व्यवस्था स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा आदि बुनियादी सेवाओं का सबसे कारगर तरीका है।
(3) मुक्त बाजार उचित और न्यायपूर्ण समाज का आधार होता है क्योंकि उसका सरोकार प्रतिभा और कौशल से होता है।
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Question 102 Marks
मुक्त बाजार व्यवस्था के कोई दोष लिखिये।
Answer
(1) मुक्त बाजार व्यवस्था में बुनियादी वस्तुओं और सेवाओं की कीमत गरीब लोगों की पहुँच से प्रायः दूर हो जाती है।
(2) मुक्त बाजार पहले से ही सुविधासम्पन्न लोगों के पक्ष में काम करने का रुझान दिखलाते हैं।
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Question 112 Marks
प्लेटो के अनुसार हमारा दीर्घकालीन हित कानून का पालन करने एवं न्यायी बनने में क्यों है?
Answer
प्लेटो के अनुसार यदि हर कोई अन्यायी हो जाए, यदि हर आदमी अपने स्वार्थ के लिए कानून के साथ खिलवाड़ करे, तो किसी के लिए भी अन्याय से लाभ पाने की गारंटी नहीं रहेगी, कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा और इससे संभव है कि सबको नुकसान पहुँचे। इसलिए हमारा दीर्घकालीन हित इसी में है कि हम कानून का पालन करें और न्यायी बनें
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Question 122 Marks
हर व्यक्ति को उसका प्राप्य कैसे दिया जाये? इस सम्बन्ध में कौन-कौन से सिद्धान्त पेश किये गये हैं?
Answer
हर व्यक्ति को उसका प्राप्य कैसे दिया जाये, इस सम्बन्ध में तीन सिद्धान्त पेश किये गये हैं। ये हैं-(1) समान लोगों के साथ समान बरताव का सिद्धान्त (2) समानुपातिक न्याय का सिद्धान्त और (3) विशेष जरूरतों के विशेष ख्याल का सिद्धान्त।
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