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Question 12 Marks
पत्तियों के विभिन्न रूपांतरण पौधे की कैसे सहायता करते हैं?
Answer
पत्ती का भोजन बनाने के अतिरिक्त अन्य कार्यों के लिए रूपान्तरित होना पड़ता है। वे ऊपर चढ़ने के लिए प्रतान में जैसे मटर और रक्षा के लिए भूल (कांटों) में जैसे केक्टस में परिवर्तित हो जाते हैं। प्याज तथा लहसून की गूदेदार पत्तियों में भोजन संचयित रहता है। कुछ पौधों जैसे आस्ट्रेलियन अकेसिया में पत्तियाँ छोटी तथा अल्पायु होती है। पौधों में पर्णवृन्त फैलकर हरा हो जाता है और भोजन बनाने का कार्य करता है। कुछ कीटाहारी पादपों में पत्ती घड़े के आकार में रूपान्तरित हो जाती है। उदाहरण घटपर्णी, वीनस, फ्लाई ट्रेप।
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Question 22 Marks
निम्नलिखित में अंतर लिखो - वियुक्तांडपी तथा युक्तांडपी अंडाशय।
Answer
वियुक्तांडपी तथा युक्तांडपी अंडाशय (Apocarpous and syncarpous ovary) - जब एक से अधिक अण्डप (carpel)उपस्थित हों तथा प्रत्येक स्वतंत्र अर्थात् प्रत्येक अण्डप के अण्डाशय, वर्तिका व वर्तिकाग्र पृथक् हों तो उसे वियुक्तांडपी अंडाशय कहते हैं। उदाहरण - चम्पा।
एक से अधिक अण्डप संयुक्त होकर जायांग बनाते हैं तो उसे युक्तांडपी अंडाशय कहते हैं। उदाहरण - गुडहल, बैंगन आदि।
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Question 32 Marks
निम्नलिखित में अंतर लिखो - असीमाक्षी तथा ससीमाक्षी पुष्पक्रम
Answer
असीमाक्षी तथा ससीमाक्षी पुष्पक्रम (Racemose and cymose inflorescence) - ऐसा पुष्पक्रम, जिसका मुख्य अक्ष पुष्प में समाप्त नहीं होता बल्कि वह निरन्तर बढ़ता रहता है और पार्श्व में पुष्पों को अग्राभिसारी (acropetal) अनुक्रम में बनाता रहता है।
ससीमाक्षी पुष्पक्रम में मुख्य अक्ष की वृद्धि उसके शीर्ष पर पुष्प के बनने से रुक जाती है। पाश्र्वीय अक्ष, जो शीर्षस्थ पुष्प के नीचे से निकलती है, भी पुष्प में अन्त हो जाती है, अतः उसकी वृद्धि भी सीमित हो जाती है। पुष्प तलाभिसारी (basipetal) अनुक्रम में लगते हैं।
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Question 42 Marks
बीजाण्डन्यास को परिभाषित कीजिए। स्तम्भीय बीजाण्डन्यास एवं भित्तीय बीजाण्डन्यास में कोई तीन अन्तर लिखिए।
Answer
बीजाण्डन्यास- अण्डाशय में बीजाण्ड के लगे रहने के क्रम को बीजाण्डन्यास (प्लैसेनटेशन) कहते हैं।
स्तम्भीय बीजाण्डन्यास एवं भित्तीय बीजाण्डन्यास में अन्तर
क्र.सं.स्तम्भीय बीजाण्डन्यास
(Axile Placentation)
भित्तीय बीजाण्डन्यास
(Parietal Placentation)
1.बीजाण्ड केन्द्रीय अक्ष पर लगते हैं।बीजाण्ड अण्डाशय की भीतरी भित्ति पर लगे होते हैं।
2.अण्डाशय में अनेक कोष्ठक होते हैं, कोष्ठकों की संख्या अण्डपों की संख्या के बराबर होती है।इसमें एक कोष्ठक होता है, अण्डपों की संख्या के बराबर बीजाण्डसन की संख्या होती है।
3.उदाहरण - टमाटर, नींबू ।उदाहरण - सरसों, मूली।
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Question 52 Marks
पुष्पदल विन्यास का विवरण दीजिये।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 62 Marks
पर्ण के प्रकारों को समझाइये।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 72 Marks
पर्ण की संरचना का वर्णन कीजिए।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 82 Marks
तने के अभिलाक्षणिक गुणों का उल्लेख कीजिए व इसके कार्य बताइये।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 92 Marks
पुष्पदल विन्यास किसे कहते हैं? सरसों के पौधे (कटुंब ब्रेसिकेसी) के पुष्पी चित्र बनाइए एवं पुष्प सूत्र लिखिए।
Answer
पुष्पदल विन्यास (Aestivation) - पुष्प की कलिका अवस्था में बाह्य दलों तथा दलों का विन्यास पुष्पदल विन्यास कहलाता है।

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Question 102 Marks
मूल के मुख्य कार्य बताइये।
Answer
मूल तंत्र पौधे का भूमिगत भाग होता है जिसकी वृद्धि मिट्टी के अन्दर होती है। मूल तंत्र का मुख्य कार्य मिट्टी से जल तथा खनिज लवणों का अवशोषण करना होता है। यह पादप को मृदा में जकड़ कर रखती है जिससे पौधे को स्थिरता प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त मूल खाद्य पदार्थों का संचय करती है।
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Question 112 Marks
फल पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer
फल पुष्पी पादपों अर्थात् एंजियोस्पर्म का एक महत्त्वपूर्ण लक्षण है। फल अन्य किसी भी पादप समूह में नहीं पाया जाता है। फल एक परिपक्व अण्डाशय है जो निषेचन के उपरान्त विकसित होता है। यदि कोई फल बिना निषेचन के बनता है तो उसे अनिषेकी फल (Parthenocarpic fruit) कहते हैं।
सामान्यतः एक फल में फलभित्ति तथा बीज होते हैं। फल भित्ति शुष्क या गूदेदार हो सकती है। जब फल भित्ति मोटी व गूदेदार होती है तब उसमें तीन भित्तियां या परतें होती हैं। सबसे बाहरी फल भित्ति को बाह्यफल भित्ति, मध्य की मध्यफल भित्ति तथा सबसे भीतरी को अंतः फल भित्ति कहते हैं।
आम व नारियल अष्ठिल (Drupe) प्रकार के फल हैं। ये फल एकांडपी, ऊर्ध्ववर्ती अण्डाशय से विकसित होते हैं व इनमें केवल एक बीज होता है। आम में सबसे बाहरी छिलका बाह्यफल भित्ति होता है, मध्य का गूदेदार, खाने योग्य मध्यफल भित्ति तथा सबसे अन्दरी अन्तः फल भित्ति कठोर पथरीली होती है। नारियल में मध्यफल भित्ति तंतुमयी होती है
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Question 122 Marks
मूल के वृद्धि क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 132 Marks
मूल किसे कहते हैं तथा मुख्यतः मूल कितने प्रकार की होती है?
Answer
पुष्पी पौधे का भूमिगत भाग मूल तंत्र होता है। द्विबीजपत्री पौधों में मूलांकुर के लंबे होने से प्राथमिक मूल बनती है जो मिट्टी में उगती है। इसमें पार्वीय द्वितीयक तथा तृतीयक मूल होती है। प्राथमिक मूल तथा इसकी शाखाएं मिलकर मूसला मूल तंत्र बनाती हैं। उदाहरण सरसों का पौधा। एकबीजपत्री पौधों में मूल अल्पायु होती है और इसके स्थान पर अनेक मूल निकलती हैं। ये मूल तने के आधार से निकलती हैं। इन्हें झकड़ा मूल तंत्र कहते हैं। उदाहरण गेहूँ का पौधा। कुछ पौधों जैसे-घास तथा बरगद में मूल मूलांकुर की बजाय पौधे के अन्य भाग से निकलती हैं। इन्हें अपस्थानिक मूल कहते हैं।
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Question 142 Marks
निम्न को परिभाषित कीजिए। अष्टिल फल आम एवं नारियल का चित्र बनाइए।
1. एक संघी 2. द्विसंघी 3. बहुसंघी 4. परिदल लग्न।
Answer
1. एक संघी (Monoadelphous) सभी फिलामेन्ट संयुक्त होकर एक बण्डल का निर्माण करते हैं। उदाहरण- मालवेशी कुल (गुड़हल) ।
2. द्विसंघी (Diadelphous) - पुतन्तु या फिलामेन्ट संयुक्त होकर दो बण्डल (Bundles) बनाते हैं, उदाहरण- पैपिलिमेनिसी कुल (मटर)।
3. बहुसंघी (Polyadelphous) - फिलामेन्ट संयुक्त होकर अनेक बण्डल बनते हैं। उदाहरण- रूटेसी कुल (नींबू)।
4. परिदल लग्न (Epiphyllous) - पुंकेशर (स्टेमन) पेरिमेन्थ के साथ संयुक्त होते हैं। उदाहरण- प्याज।
अष्टिल फल आम एवं नारियल का नामांकित चित्र
Image
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