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Question 12 Marks
त्वक कोशिकाओं की रचना तथा स्थिति उन्हें किस प्रकार विशिष्ट कार्य करने में सहायता करती है ?
Answer
आवर्ध या त्वक कोशिकायें (Bulliform cells) एकबीजपत्रियों की पत्तियों की ऊपरी बाह्यत्वचा में पायी जाती है। आवर्ध या त्वक कोशिकायें गुब्बारे के आकार की होती है तथा इसकी भित्ति पतली और जीवद्रव्य में अनेक रिक्तिकाएँ पायी जाती हैं। इनमें जल अधिक मात्रा में होता है। यह आर्द्रताग्राही होती है तथा पत्तियों को खुलने व मुड़कर बन्द होने का नियंत्रण करती है। ये कोशिकाएँ जब स्फीत (flaccid) होती हैं, तब ये कोशिकाएँ मुड़ी हुई पत्तियों को खुलने में सहायता करती हैं। वाष्पोत्सर्जन की अधिक दर होने पर ये पत्तियाँ वाष्पोत्सर्जन की दर कम करने के लिये मुड़ जाती हैं।
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Question 22 Marks
पादप शारीर का अध्ययन हमारे लिये कैसे उपयोगी है?
Answer
पादप शारीर के अध्ययन से पौधों की आंतरिक बनावट का ज्ञान होता है। उपस्थित विभिन्न प्रकार की ऊतकों तथा ऊतक तंत्र की जानकारी मिलती है। ऊतकों की बनावट से तथा उनकी उपस्थिति स्थल से उनके कार्य का ज्ञान होता है। पत्ती, स्तम्भ व मूल की संरचना में अन्तर होता है तथा इनमें ऊतक उपयुक्त ढंग से व्यस्थित होती हैं। अतः हम उसे काटकर सूक्ष्मदर्शी में अध्ययन कर बता सकते हैं कि यह द्विबीजपत्री या एकबीजपत्री स्तम्भ, मूल या पर्ण है। आन्तरिक संरचना के आधार पर मौसम का प्रभाव, वृक्ष की अनुमानतः रसायनों व निक्षेपणों का आर्थिक दृष्टि से उपयोग किया जा सकता है।
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Question 32 Marks
आप एक शैशव तने की अनुप्रस्थ काट का सूक्ष्मदर्शी से अवलोकन करें। आप कैसे पता करेंगे कि यह एकबीजपत्री तना अथवा द्विबीजपत्री तना है? इसके कारण बताओ।
Answer
एकबीजपत्री तने में वल्कुट, अन्तश्चर्म, परिरम्भ व मज्जा क्षेत्र का विभेदन नहीं होता है जिसके सभी संवहन पूल भरण ऊतक में बिखरे होते हैं। प्रत्येक संवहन पूल में जल गुहिका भी होती है तथा संवहन पूल अवर्धी (Closed) होते हैं। जबकि द्विबीजपत्री स्तम्भ में स्पष्ट रूप से वल्कुट, अन्तश्चर्म, परिरम्भ व मज्जा क्षेत्र का विभेदन होता है। सभी संवहन पूल एक वलय में व्यवस्थित रहते हैं तथा ये वर्धी (open) किस्म के होते हैं।
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Question 42 Marks
मूल की आन्तरिक संरचना की प्रमुखता बताइये।
Answer
जड़ों की बाह्य परत को मूलत्वचा कहते हैं जिस पर एककोशिकीय रोम होते हैं, इन्हें ही मूलरोम कहते हैं। क्यूटिकल व अधस्त्वचा का अभाव होता है। वल्कुट मृदूतकीय व अन्तस्त्वचा स्पष्ट होती है। संवहन पूल अरीय होते हैं तथा जाइलम का विकास बाह्यआदिदारुक होता है। द्विबीजपत्री मूल में छः तक संवहन पूल होते हैं परन्तु एकबीजपत्री में छः से अधिक होते हैं। जाइलम व फ्लोयम के मध्य उपस्थित मृदूतक को संयोजी ऊतक कहते हैं।
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Question 52 Marks
परित्वक के कार्य बताइये।
Answer
(i) यह अधिचर्म के भीतर की ओर वाले भागों को सुरक्षा प्रदान करती है।
(ii) यह काष्ठीय पादपों के पुराने स्तम्भों की सतह पर पाया जाता है तथा कॉर्क, कॉर्क एधा व द्वितीयक वल्कुट का बना होता है।
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Question 62 Marks
भरण ऊतक तंत्र का वर्णन कीजिए। डंबलाकार द्वार कोशिका सहित रन्ध्र का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer
भरण ऊतक तंत्र (Ground Tissue System) बाह्य - त्वचा तथा संवहन बण्डल के अतिरिक्त सभी ऊतक भरण ऊतक (Ground Tissue) बनाते हैं। इसमें सरल ऊतक जैसे पैरेकाइमा, कॉलेंकाइमा एवं स्कलेरनकाइमा होते हैं। प्राथमिक तने में पेरेनकाइमी कोशिकाएँ प्रायः वल्कुट परिरंभ पिथ तथा मज्जा किरण (Medullary rays) में होती है। पत्तियों में भरण ऊतक पतली भित्ति वाले तथा क्लोरोप्लास्ट (Chlroplast) युक्त होते हैं और इसे पर्णमध्योतक (Mesophyll) कहते हैं।
डंबलाकार द्वार कोशिका सहित रन्ध्र का चित्र
Image
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Question 72 Marks
अन्तरापूलीय एधा व अन्तःपूलीय एधा में अन्तर बताइये।
Answer
अन्तरापूलीय एधा व अन्तःपूलीय एधा में अन्तर
क्र.सं.अन्तरापूलीय एधाअन्तःपूलीय एधा
1.यह द्वितीयक विभज्योतक है।यह प्राथमिक विभज्योतक है।
2.यह केवल द्वितीयक वृद्धि के समय ही बनता है।यह संवहन पूल में आरम्भ से पाया जाता है।
3.यह दो संवहन पूल के मध्य बनता है।यह संवहन पूल के भीतर ही मिलता है।
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