Question 11 Mark
कोई डिस्क और कोई गोला जिनकी त्रिज्याएं समान परन्तु द्रव्यमाम भिन्न हैं समान उत्रतांश और लम्बाई के दो आनत समतलों पर लुढ़कते हैं, इन दोनों पिण्डों में से तली तक पहले कौन पहुँचेगा?
Answer(b) गिरने का समय $\propto \frac{ K ^2}{ R ^2}$
चकती के लिए; $\frac{ K ^2}{ R ^2}=\frac{1}{2}=0.5$
गोले के लिए; $\frac{ K ^2}{ R ^2}=\frac{2}{5}=0.4$
(गोला) $<$ (चकती)
$\therefore$ गोला पहले पहुँचेगा।
View full question & answer→Question 21 Mark
द्रव्यमान $M$ तथा त्रिज्या $R$ की किसी डिस्क से $R$ व्यास का कोई वृत्ताकार छिद्र इस प्रकार काटा जाता है कि उसकी नेमि डिस्क के केन्द्र से गुजरे। डिस्क के शेप भाग का, डिस्क के लम्बवत् उसके केन्द्र से गुजरने वाले अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण क्या है?
Answer(b) बिन्दु ' $O$ ' के परित: सम्पूर्ण चकती का जड़त्व आघूर्ण
$I=\frac{ MR ^2}{2}$
निकाले गये चकती का द्रव्यमान
$M=\frac{ M }{4}$ (द्रव्यमान $\propto$ क्षेत्रफल)
बिन्दु ' $O$ ' के परित: निकाले गये चकती का जड़त्व आघूर्ण
$I$ (लम्बवत् अक्ष के परितः)
$= I _{ cm }+ mx ^2$
$
=\frac{ M }{4} \frac{( R / 2)^2}{2}+\frac{ M }{4}\left(\frac{ R }{2}\right)^2=\frac{3 MR ^2}{32}
$
अतः, केन्द्र से जाने वाले लम्बवत् अक्ष के परितः बचे हुए चकती का जड़त्व आघूर्ण
$I$ $=\frac{ MR ^2}{2}-\frac{3}{32} MR ^2=\frac{13}{32} MR ^2$
View full question & answer→Question 31 Mark
विरामावस्था में र्थित 50 से.मी. त्रिज्या की कोई एकसमान वृत्ताकार डिस्क अपने तल के लम्बवत् और केन्द्र से गुजरने वाले अक्ष के परितः घूमने के लिए स्वतंत्र है। इस डिस्क पर कोई बल आघूर्ण कार्य करता है, जो इसमें $2.0 rad s ^{-2}$ का नियत कोणीय त्वरण उत्पत्र कर देता है। $2.0 s$ के पश्चात $ms ^{-2}$ में इसका नेट त्वरण होगा लगभग :
Answer(a) दिया है, चकती की त्रिज्या $R =50 cm$
कोणीय त्वरण $\alpha=2.0 rads ^{-2}$; समय $t =2 s$
परिधि पर स्थित कण में त्रेज्यक $\left( a _{ c }\right)$ तथा स्पर्शीय
$\left(a_t\right)$ दोनों त्वरण होगा।
$a_t=R \alpha=0.5 \times 2=1 m / s ^2$
समीकरण $\omega=\omega_0+\alpha t$ से,
$\omega=0+2 \times 2=4 rad / s$
$a _{ c }=\omega^2 R =(4)^2 \times 0.5=16 \times 0.5=8 m / s ^2$
परिणामी त्वरण,
$
a=\sqrt{ a _{ t }^2+ a _{ c }^2}=\sqrt{1^2+8^2} \approx 8 m / s ^2
$
View full question & answer→Question 41 Mark
किसी बिन्दु $\overrightarrow{ r }=2 \hat{ i }-6 \hat{ j }-12 \hat{ k }$ पर एक बल $\overrightarrow{ F }=\alpha \hat{ i }+3 \hat{ j }+6 \hat{ k }$ लग रहा है, तो $\alpha$ के किस मान के लिए मूल बिन्दु के परितः कोणीय संवेग संरक्षित रहेगा:
Answer(d) घूर्णन गति के लिए न्यूटन के द्वितीय नियम से,
$\vec{\tau}=\frac{\overrightarrow{ d } L }{ dt }$, यदि $\overrightarrow{ L }=$ स्थिरांक, तब $\vec{\tau}=0$ अत: $\vec{\tau}=\overrightarrow{ r } \times \overrightarrow{ F }=0$
$
(2 \hat{ i }-6 \hat{ j }-12 \hat{ k }) \times(\alpha \hat{ i }+3 \hat{ j }+6 \hat{ k })=0
$
हल करने पर हमें प्राप्त होता है $\alpha=-1$
View full question & answer→Question 51 Mark
एक मोटर वाहन किसी सड़क पर $54 \ km/ h ^{-1}$. की चाल से चल रहा है। इसके पहियों की त्रिज्या $0.45$
$m$ है और घूर्णन अक्ष के परितः पहिये का जड़त्व आघूर्ण $3 \ kg / m ^2$ है। ब्रेक द्वारा पहिये पर लगा औसत बल आघूर्ण का मान होगा
Answerदिया गया है: चाल $V =54 \ km/h ^{-1}$
$=15 m/s ^{-1}$ जड़त्व $-$ आघूर्ण $I =3 \ kg/m ^2$
समय $t =15 s$
$ \omega_{ i }=\frac{ V }{ r }$
$=\frac{15}{0.45}=\frac{100}{3} \omega_{ f }=0$
$\omega_{ f }=\omega_{ i }+\alpha t$
$0=\frac{100}{3}+(-\alpha)(15) $
$\Rightarrow \alpha=\frac{100}{45} $
पहिए पर ब्रेक द्वारा संचारित औसत आघूर्ण
$ \tau=( I )(\alpha)=3 \times \frac{100}{45}=6.66 \ kg/m ^2 s ^{-2} $
View full question & answer→Question 61 Mark
किसी दृढ छड़ की लम्बाई $L$ और उसका द्रव्यमान नगण्य है। इसके दो विपरीत सिरो पर क्रमशः $m _1$ तथा $m _2$ द्रव्यमान के दो बिन्दु पिंड रखे गये है। इस छड़ को उसके स्वयं के लम्बवत् अक्ष के परितः घूर्णन कराना है, जो छड़ पर र्थित किसी बिन्दु $P$ से होकर गुजरती है (आरेख देखिये)। बिन्दु $P$ की वह स्थिति जिसके लिये छड़ को कोणीय वेग $\omega_0$ से घूर्णन कराने के लिये आवश्यक कार्य न्यूनतम होगा, है
Answer(c) कोणीय वेग $\omega_0$ के साथ छड़ को धूर्णन गति प्रदान करने हेतु आवश्यक कार्य
$
K.E .=\frac{1}{2} I \omega^2
$
यदि $I$ का मान निम्नतम है तो कार्य का मान भी निम्नतम होगा। द्रव्यमान केन्द्र के परित: I का मान निम्नतम होता है।
अत: $\left( m _1\right)( x )=\left( m _2\right)( L - x )$
अथवा $m _1 x = m _2 L - m _2 x$
$
\therefore x =\frac{ m _2 L }{ m _1+ m _2}
$
View full question & answer→Question 71 Mark
$50$ किग्रा द्रव्यमान तथा $0.5$ मी त्रिज्या का एक ठोस सिलेण्डर $($बेलन$)$ अपनी क्षैतिज अक्ष के परितः स्वतंत्र रूप से घूर्णन कर सकता है। इस पर एक भारहीन रस्सी लपेटी गई है, जिसका एक सिरा इस सिलेण्डर से जुड़ा है और दूसरा सिरा मुक्त रूप से लटक रहा है। रस्सी में कितना तनाव लगाया जाये कि कोणीय त्वरण $2$ परिक्रमण से ${-2}$ हो?
Answer$(d)$ दिया है, $M=50$ किग्रा
$r =0.5$ मी
$\alpha=2$ परिक्रमण/से ${ }^2$

धागे में तनाव द्वारा उत्पन्न आघूर्ण
$ \tau= T \times r = T \times 0.5$
$=\frac{ T }{2}$ न्यूटन $-$ मी
समीकरण $(i)$ में $\tau$ का मान $I \alpha(\because \tau= I \alpha)$ रखने पर,
$ \frac{ T }{2}= I \alpha$
$\Rightarrow \frac{ T }{2}=\left(\frac{ Mr ^2}{2}\right)(2 \times 2 \pi)$ रेडियन / सेकण्ड $^2 $
$\Rightarrow T =50 \times(0.5)^2 \times 2 \times 2 \times \frac{22}{7}=50 \times \frac{22}{7}$
$\therefore T =157$ View full question & answer→Question 81 Mark
किसी नत समतल का आनत कोण $\theta$ है। इस पर $m$ द्रव्यमान तथा $R$ त्रिज्या का एक ठोस गोला ऊपर से नीचे की ओर इस प्रकार गति करता है कि प्रथम दिशा में गति पूर्णत: लोटनिक है और सरकी (फिसलन) नहीं है, तथा दूसरी दशा में गति केवल सरकी है, और लोटनिक नहीं है तो, इन दोनों दशाओं में गोले के त्वरणों का अनुपात होगा
Answer(a) यहाँ ठोस गोला द्रव्यमान $m$ एवं त्रिज्या $r$ है, $\theta$ कोण पर झुके हुए नत तल पर नीचे की ओर बिना फिसले लुढ़कता है।
इस स्थिति में,
त्वरण, $a_1=\frac{g \sin \theta}{1+\frac{ K ^2}{ R ^2}}=\frac{ g \sin \theta}{\frac{1+\left(\frac{2}{5} R ^2\right)}{ R ^2}}$
$\left[\because\right.$ ठोस गोले के लिए $\left.K ^2=\frac{2}{5} R ^2\right]$
$
\Rightarrow a _1=\frac{ g \sin \theta}{\frac{7}{5}}=\frac{5}{7} g \sin \theta
$
झुके हुए तल पर नीचे की ओर फिसलते हुए गोले के लिए,
त्वरण $\left( a _2\right)= g \sin \theta$
$
\therefore \frac{ a _1}{ a _2}=\frac{\frac{5}{7} g \sin \theta}{ g \sin \theta}=\frac{5}{7}
$ View full question & answer→Question 91 Mark
एक छड़ $PQ$ का द्रव्यमान $M$ है और इसकी लम्बाई $L$ है। यह छड़ P बिंदु पर हिंज की गई है। चित्र में दिखाये गये अनुसार, छड़ के सिरे $Q$ पर बंधी द्रव्यमान-रहित एक रस्सी इसे क्षैतिज बनाये रखती है। यदि इस रस्सी को काट दिया जाय तो, छड़ का प्रारंभिक कोणीय त्वरण होगा:
Answer(d) 
छड़ के भार से बल आघूण उत्पन्न होगा
$
\tau= mg \frac{ L }{2}= I \alpha=\frac{ mL ^2}{3} \alpha\left[\because I _{\text {rod }}=\frac{ ML ^2}{3}\right]
$
अतः कोणीय त्वरण $\alpha=\frac{3 g }{2 L }$ View full question & answer→Question 101 Mark
किसी छोटी वस्तु का घनत्व एकसमान है। यह किसी वक्र समतल पर प्रारंभिक वेग $'v\ '$ से ऊपर की ओर लुढ़कती है। अपनी प्रारंभिक स्थिति से अधिकतम $\frac{3 v ^2}{4 g }$ ऊँचाई तक पहुँचती है। यह वस्तु है एक:
Answer
यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण के नियम से
$ \frac{1}{2} I \omega^2+0+\frac{1}{2} mv ^2$
$= mg \times \frac{3 v ^2}{4 g }$
$\Rightarrow \frac{1}{2} I \omega^2$
$=\frac{3}{4} mv ^2-\frac{1}{2} mv ^2$
$=\frac{ mv }{2}\left(\frac{3}{2}-1\right) $
या $\frac{1}{2} I \frac{ V ^2}{ R ^2}=\frac{ mv ^2}{4}$ or,
$I =\frac{1}{2} mR ^2$ अतः वस्तु एक चकती है। View full question & answer→Question 111 Mark
किसी एक समान वृत्ताकार डिस्क (चकती) का जड़त्व आघूर्ण अधिकतम होगा जब अक्ष डिस्क के लम्बवत् हो और वह गुजरती हो :

Answer(a) जड़त्व आघूर्ण के समान्तर अक्ष प्रमेय के अनुसार,
$s I=I_{ cm }+m d^2$
बिन्दु $B$ के लिए $d$ का मान अधिकतम है अत: $I_{\max }, B$ के सापेक्ष
View full question & answer→Question 121 Mark
विभिन्न द्रव्यमानों के तीन पिंउ $x$-अक्ष पर इस प्रकार रखे हैं : $300 g$ का पिंड मूलबिन्दु पर, $500 g$ का $x=40 cm$ पर तथा $400 g$ का $x=70 cm$ पर तो, मूलबिन्दु से द्रव्यमान केन्द्र की दूरी होगी :
Answer(a) $\begin{aligned} X_{ cm } & =\frac{m_1 x_1+m_2 x_2+m_3 x_3}{m_1+m_2+m_3} \\ X_{ cm } & =\frac{300 \times(0)+500(40)+400 \times 70}{300+500+400} \\ X_{ cm } & =\frac{500 \times 40+400 \times 70}{1200} \\ X_{ cm } & =\frac{50+70}{3}=\frac{120}{3}=40 cm \end{aligned}$
View full question & answer→Question 131 Mark
एक वृत्ताकार मंच एक घर्षणरहित ऊर्ध्वाधर धुरी पर टिका है। इस मंच की त्रिज्या $R=2 m$ है और इसका जड़त्व आघूर्ण $200 kgm ^2$ है। प्रारम्भ में यह विरामावस्था में है। $50 kg$ द्रव्यमान का एक व्यक्ति इस मंच के किनारे पर खड़ा होता है और किनारे-किनारे भू-तल के सापेक्ष $1 ms ^{-1}$ के वेग से चलना प्रारम्भ करता है तो, इस व्यक्ति द्वारा एक चक्कर पूरा करने में लगा समय होगा :
Answer(c)
$L_i=0$ (प्रारम्भिक संवेग)
$L_f=m v R-I \omega$ (अन्तिम संवेग)
संवेग संरक्षण के अनुसार
$
\begin{aligned}
L_i & =L_f \\
\Rightarrow v R-I . \omega & =0 \\
m v R & =I . \omega \\
\omega & =\left(\frac{1}{2}\right) \\
(v+\omega R) t & =2 \pi R \\
\left(1+\frac{1}{2} \times 2\right) & =2 \pi \times 2 \\
t & =2 \pi sec
\end{aligned}
$
View full question & answer→Question 141 Mark
किसी स्थिर बिन्दु के परित: किसी समतल में घूर्णन करते हुए एक पिंड के कोणीय संवेग की दिशा होती है :
Answer(a) $\because \vec{L}=\vec{r} \times \vec{p}$
दक्षिणावर्त्ती पेंच के नियम से, $\vec{L}$ की दिशा सतह जिसमें $\vec{r} \& \vec{p}$ है के $\perp$ है।
पिंड किसी स्थिर बिन्दु के परितः समतल में घूर्णन कर रहा है अतः इस समतल में $\vec{r} \& \vec{p}$ होगा तथा $\vec{L}$ की दिशा इस समतल के $\perp$ होगा। View full question & answer→Question 151 Mark
$3 \ kg$ द्रव्यमान का एक ठोस बेलन किसी क्षैतिज समतल पर $4 m/s ^{-1}$ वेग से लुढ़क रहा है। यह $200 Nm ^{-1}$ के बल नियतांक के एक क्षैतिज सिप्रंग $($कमानी$)$ से टकराता है तो, स्प्रिंग में उत्पन्न अधिकतम् संपीडन होगा:
Answerअधिकतम सम्पीडन की स्थिति में ठोस गोला रूक जायेगा। इसलिए गतिज ऊर्जा में हानि $=$ स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि
$ \Rightarrow \frac{1}{2} m v^2+\frac{1}{2} I \omega^2=\frac{1}{2} k x^2 $
$\Rightarrow \frac{1}{2} m v^2+\frac{1}{2} \frac{m R^2}{2}\left(\frac{v}{R}\right)^2=\frac{1}{2} k x^2$
$\Rightarrow \frac{3}{4} m v^2=\frac{1}{2} k x^2$
$\Rightarrow \frac{3}{4} \times 3 \times(4)^2=\frac{1}{2} \times 200 x^2$
$\Rightarrow \frac{36}{100}=x^2 $
$\Rightarrow x=0.6 m $
View full question & answer→Question 161 Mark
$A B C$ एक समबाहु त्रिभुज है, जिसका केन्द्र $O$ है। $\vec{F}_1, \vec{F}_2$ तथा $\vec{F}_3$ क्रमशः $A B, B C$ तथा $A C$ दिशा में लगे बल हैं। यदि $O$ के परितः कुल बल-आघूर्ण (टॉर्क) शून्य हो तो, $\vec{F}_3$ का मान होगा :
Answer(a) $F_1 x+F_2 x=F_3 x$
$F_3=F_1+F_2$
View full question & answer→Question 171 Mark
क्रमशः $55 kg$ तथा $65 kg$ द्रव्यमान के दो व्यक्ति एक नाव के विपरीत सिरों पर बैठे हैं। नाव की लम्बाई $3.0 m$ तथा द्रव्यमान $100 kg$ है। $55 kg$ द्रव्यमान का व्यक्ति 65 $kg$ द्रव्यमान वाले व्यक्ति की ओर चलकर उसके साथ बैठ जाता है। यदि नाव स्थिर पानी में है तो इस पूरे निकाय का द्रव्यमान केन्द्र स्थानान्तरित हो जायेगा :
Answer(c)

यहाँ कोई बाहय बल नहीं है अतः द्रव्यमान केन्द्र विस्थापित नहीं होगा।
View full question & answer→Question 181 Mark
किसी पतली एकसमान छड़ का द्रव्यमान $M$ और लम्बाई $L$ है। उसके मध्यबिन्दु से होकर जाने वाली उसकी लम्बाई के लम्बवत् अक्ष के परितः, छड़ का जड़त्व आघर्ण $I _0$ है, तो छड़ के एक सिरे से गुजरने वाली और उसकी लम्बाई के लम्बवत अक्ष के परितः, उसका जड़त्व आघूर्ण होगा:
Answerसमांतर अक्षों के प्रमेय से,
$ I = I _{ \ cm }+ Md ^2$
$I = I _0+ M ( L / 2)^2$
$= I _0+ ML ^2 / 4 $
View full question & answer→Question 191 Mark
वृत्ताकार पथ में घूर्णन करते हुए किसी पहिये पर स्थित बिन्दु की तात्क्षणिक कोणीय स्थिति समीकरण $, \theta(t)=2 t^3-6 t^2$ से निरूपित की जाती है, तो पहिये पर लगने वाले बल $-$ आघूर्ण का मान शून्य होगा:
Answerजब कोणीय त्वरण $(\alpha)$ शून्य है तब पहिए परबल-आघूर्ण शून्य हो जाता है।
$ \theta(t)=2 t ^3-6 t ^2$
$\Rightarrow \frac{ d \theta}{ dt }=6 t ^2-12 t$
$\Rightarrow \alpha=\frac{ d ^2 \theta}{ dt ^2}$
$=12 t -12=0$
$\therefore t =1$ सैकण्ड
View full question & answer→Question 201 Mark
समान द्रव्यमान और समान बाह्य त्रिज्या के दो बेलनों में से एक ठोस है और दूसरा खोखला है। दोनों को एक ही समय, एक ही ऊँचाई से, किसी आनत समतल पर लुढ़काया गया है। दोनों बगैर फिसले लोटन करते हैं, इन दोनों में से कौन तली पर पहले पहुँचेगा?
Answer(a) बिना फिसले नत तल पर नीचे लुढ़कते हुए वस्तु का वेग इस प्रकार है
$
v^2=\frac{2 g h}{1+\frac{K^2}{R^2}}
$
ठोस बेलन के लिए $K^2=\frac{R^2}{2}$
खोखले बेलन के लिए $K^2=R^2$
$v_S>v_H$, इसलिए ठोस बेलन जल्दी पहुँचेगा।
View full question & answer→Question 211 Mark
$R$ त्रिज्या और $9 M$ द्रव्यमान की एक डिस्क से, $R / 3$ त्रिज्या एवं $M$ द्रव्यमान की एक छोटी डिस्क संकेन्द्री रूप से काट कर निकाल ली गई है। शेष बचे भाग का जड़त्व आघूर्ण, उसके तल के लम्बवत् और उसके केन्द्र से होकर जाने वाली अक्ष के परित: होगा
Answerबचे हुए डिस्क का जड़त्व आघूर्ण $=$ पूरे डिस्क का जड़त्व $-$ आघूर्ण-बाहर लिए गए डिस्क का जड़त्व $-$ आघूर्ण
$ =\frac{9 M R^2}{2}-\frac{M R^2}{18}$
$=\frac{M R^2}{18}(81-1)$
$=\frac{40}{9} M R^2 $
View full question & answer→Question 221 Mark
$M$ द्रव्यमान और $r$ त्रिज्या का एक पतला छल्ला (वलय) अपनी अक्ष के परितः, स्थिर कोणीय वेग $\omega$ से घूर्णन कर रहा है। इस छल्ले के व्यास के दो विपरित सिरों पर समान (बराबर) द्रव्यमान $m$ की दो पिण्डों को हल्के से संलग्न कर (जोड़ दिया) गया है। वलय का नया कोणीय वेग है
Answer(a) माना $\omega^{\prime}$ वलय का नया कोणीय वेग है। तब कोणीय संवेग के संरक्षण से हम पाते हैं कि-
$
\begin{aligned}
& M r^2 \omega=\left(M r^2+2 m r^2\right) \omega^{\prime} \\
\therefore \quad & M r^2 \omega=r^2 \omega^{\prime}(M+2 m) \\
\therefore \quad & \omega^{\prime}=\frac{M}{M+2 m} \omega
\end{aligned}
$
View full question & answer→Question 231 Mark
(1) किसी वस्तु का गुरूत्व केन्द्र (C.G.) वह बिन्दु है जहाँ पर उस वस्तु का भार कार्य करता है।
(2) पृथ्वी की त्रिज्या को बहुत अधिक मानने पर किसी वस्तु का द्रव्यमान केन्द्र और गुरूत्व केन्द्र संपाती होते हैं।
(3) किसी वस्तु के कारण किसी बाह्य बिन्दु पर गुरूत्वीय क्षेत्र की तीव्रता का मान ज्ञात करने के लिये उस वस्तु के सम्पूर्ण द्रव्यमान को उसके गुरूत्व केन्द्र पर केन्द्रित माना जा सकता है।
(4) किसी अक्ष के परितः घूर्णन करती हुई किसी वस्तु की परिभ्रमण त्रिज्या, वस्तु के गुरूत्व केन्द्र घूर्णन अक्ष पर डाले गये लम्ब की लम्बाई है।
निम्नलिखित प्रकथनों के युग्मों में से कौन सा ठीक है?
Answer(c) किसी वस्तु का गुरूत्व केन्द्र वह बिन्दु है जहां उसका अक्ष कार्य करता है। यदि पृथ्वी की त्रिज्या अनंततः लम्बी हो तो यह द्रव्यमान केन्द्र से मिल जाता है।
View full question & answer→Question 241 Mark
दो कण जो प्रारंभ में विरामावस्था में है, आन्तरिक आकर्षण के कारण एक दूसरे की ओर गति करते हैं। यदि किसी क्षण उनकी चाल $v$ तथा $2 v$ हो तो निकाय के द्रव्यमान केन्द्र की चाल होगी
Answer(b) यदि कणों के 'निकाय' या 'निकास' पर कोई बाह्य-बल कार्य नहीं करता है तो द्रव्यमान केन्द्र स्थिर होता है। अतः द्रव्यमान केन्द्र की चाल शून्य होगी।
View full question & answer→Question 251 Mark
जड़त्व आघूर्ण $I_t$ की एक वृताकार डिस्क अपनी सममिति अक्ष के परितः, एक स्थिर कोणीय वेग $\omega_i$ से क्षैतिज तल में घूर्णन कर रही है। इस डिस्क के ऊपर जड़त्व आघूर्ण $I _{ b }$ की एक अन्य डिस्क संकेन्द्री डाल दी जाती है। प्रारम्भ में दूसरी डिस्क की कोणिय चाल शून्य है। अन्ततः दोनों डिस्क एक ही स्थिर कोणीय वेग $\omega_f$ से घूर्णन करने लगती हैं। प्रारम्भ में घूर्णन करती हुई डिस्क की घर्षण के कारण नष्ट हुई उर्जा है
Answer(d) कोणीय संवेग के संरक्षण से $I _{ t } \omega_i=\left( I _{ t }+ I _{ b }\right) \omega_f$ जहाँ $\omega_f$ डिस्कों का अंतिम कोणीय वेग है।
$
\therefore \quad \omega_f=\left(\frac{I_t}{I_t+I_b}\right) \omega_i
$
गतिज ऊर्जा में कमी, $\Delta K=$ प्रारंभिक गतिज ऊर्जा - अंतिम गतिज ऊर्जा
$
\begin{aligned}
& =\frac{1}{2} I_t \omega_i^2-\frac{1}{2}\left(I_t+I_b\right) \omega_f^2 \\
\Rightarrow & \Delta K=\frac{1}{2} I_t \omega_i^2-\frac{1}{2}\left(I_t+I_b\right) \frac{I_t^2}{\left(I_t+I_b\right)^2} \omega_i^2 \\
& =\frac{1}{2} \omega_i^2 \frac{I_t}{I_t+I_b}\left(I_t+I_b-I_t\right)
\end{aligned}
$$=\frac{1}{2} \omega_i^2 \frac{I_t I_b}{I_t+I_b}$
View full question & answer→Question 261 Mark
द्रव्यमान $M$ और त्रिज्या $R$ का एक वृत्ताकार पतला वृत्तीय वलय क्षैतिज तल में अपने तल से लम्ब दिशा के अक्ष के परितः स्थिर कोणीय वेग $\omega$ से घूम रहा है। यदि वलय के व्यास के दोनों सिरों पर दो पिंड जिनमें से प्रत्येक का द्रव्यमान $m$ है, लगा दिये जाते हैं तो वलय के घूमने का कोणीय वेग हो जायेगा $:-$
Answerबाह्य बल $-$ आघूर्ण की अनुपस्थिति में, $L = I \omega=$ स्थिरांक
$I _1 \omega_1= I _2 \omega_2, I _1= MR ^2,$
$ I _2= MR ^2+2 mR ^2$
$($तल के लम्बवत् अक्ष के परितः पतले वृत्तीय वलय का जड़त्व आघूर्ण $= MR ^2 \text )$
$\therefore \omega_2=\frac{ I _1}{ I _2} \omega$
$=\frac{ M }{ M +2 m } \omega . $
View full question & answer→Question 271 Mark
चार पतली एक सी छड़ों से जिनमें से प्रत्येक का द्रव्यमान $M$ तथा लम्बाई 1 हैं, एक वर्गाकार फ्रेम बना है। इस वर्ग के केन्द्र से गुजरने वाले तथा इसके तल के लम्बवत् अक्ष के गिर्द फ्रेम का जड़त्व आघूर्ण होगा:-
Answer(d) छड़ के लम्बवत् तथा केन्द्र से होकर जाने वाले अक्ष के परित: 1 लम्बाई वाले पतले छड़ का जड़त्व-आघूर्ण $=\frac{1}{12} Ml ^2$
अतः फ्रेम का जड़त्व आघूर्ण
$
\frac{ ml ^2}{12}+\frac{ ml ^2}{4}=\frac{4 ml ^2}{12}=\frac{ ml ^2}{3}
$
कुल जड़त्व-आघूर्ण $=4 \times \frac{ ml ^2}{3}$
View full question & answer→Question 281 Mark
दो पिंड जिनके द्रव्यमान 1 किग्रा तथा 3 किग्रा हैं, क्रमश: $\hat{i}+2 \hat{j}+\hat{k}$ तथा $-3 \hat{i}-2 \hat{j}+\hat{k}$ स्थिति सदिश मानों पर रखे हैं। इस निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का स्थिति सदिश होगा:-
Answer(a) दो कणों वाले निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का स्थिति सदिश (Position Vector) दिया जाता है,
$
\begin{aligned}
\overrightarrow{ R } & =\frac{ m _1 \overrightarrow{ R }_1+ m _2 \overrightarrow{ R }_2}{\left( m _1+ m _2\right)} \\
& =\frac{1}{4}[-8 \hat{ i }-4 \hat{ j }+4 \hat{ k }]=-2 \hat{ i }-\hat{ j }+\hat{ k }
\end{aligned}
$
View full question & answer→Question 291 Mark
यदि किसी कण पर क्रियाकारी बल $\overrightarrow{ F }$ का स्थिति सदिश $\vec{r}$ हो और मूल बिन्दु के गिर्द इस बल का बल आघूर्ण $\vec{\tau}$ हो, तो:-
Answer(b) $\vec{\tau}=\overrightarrow{ r } \times \overrightarrow{ F } \Rightarrow \overrightarrow{ r } \cdot \vec{\tau}=0 \quad \overrightarrow{ F } \cdot \vec{\tau}=0$
चूँकि बल आघूर्ण $(\vec{\tau})$ सदैव $\overrightarrow{ r }$ व $\overrightarrow{ F }$ के तल के
लम्बवत् होता है अतः $\overrightarrow{ r }$ एवं $\overrightarrow{ F }$ के साथ $\tau$ का अदिश गुणनफल शून्य है।
View full question & answer→Question 301 Mark
एक वृत्तीय डिस्क और वृत्तीय रिंग, जिनका द्रव्यमान और त्रिज्या समान है, के अपने-अपने अक्ष के गिर्द परिभ्रमण त्रिज्याओं का अनुपात होगा :
Answer(b)$
=\frac{\left(\frac{ R }{\sqrt{2}}\right)}{ R }=\frac{1}{\sqrt{2}}
$
View full question & answer→Question 311 Mark
लम्बाई $L$ और द्रव्यमान $M$ की एक पतली छड़ को अपने मध्य बिन्दु पर $90^{\circ}$ के कोण पर मोड़ा गया है। छड़ के मोड़ बिन्दु से एक अक्ष इस तरह जाता है कि मुड़ी छड़ के दो भागों से बने तल से अक्ष लम्ब दिशा में है। इस अक्ष के गिर्द मुड़ी छड़ का जड़त्व आघूर्ण होगा:
Answerप्रत्येक भाग का द्रव्यमान $= M / 2$ प्रत्येक भाग की लम्बाई $= L / 2$

कुल $M.I. =$ दोनों भागों के $M.I.$ का योग
$ =\left(\frac{ M }{2}\right)\left(\frac{ L }{2}\right)^2 \times \frac{1}{3}+\left(\frac{ M }{2}\right)\left(\frac{ L }{2}\right)^2 \times \frac{1}{3}$
$=\frac{ ML ^2}{12} . $ View full question & answer→Question 321 Mark
एक चक्र का कोणीय त्वरण $3.0$ रेडियन से$^2$ है और इसकी आरिम्भक कोणीय चाल $2.0$ रेडियन से$^2$ है। $2$ सेकेण्ड के काल में इसके घुमावों का रेडियन मान होगा $-$
Answerयहाँ
$ \alpha=3\ \text{rad / s} ^2$
$\omega_1=2\ \text{rad / s} $
$t =2 s$
$\theta=? $
स्पष्टतः $\theta=\omega_1 t +\frac{1}{2} \alpha t ^2$
$ =(2 \times 2)+\frac{1}{2} \times 3 \times(2)^2=4+6=10\ \text{rad }$
View full question & answer→Question 331 Mark
$l$ लम्बाई और $m$ द्रव्यमान की एक अचर छड़ $AB$ बिन्दु $A$ पर घूर्णन के लिए स्वतंत्र है। क्षैतिज अवस्था में स्थित छड़ को स्वतंत्र किया जाता है। $A$ के सापेक्ष छड़ का जड़त्व आघूर्ण $\frac{ m \ell^2}{3}$ है। छड़ का प्रारम्भिक कोणीय त्वरण होगा $-$

Answer
छड़ का भार बल $-$ आघूर्ण $(\tau)$ पैदा करेगा।
$ \tau= mg \times \frac{\ell}{2} $
पुन: $\tau= I \alpha$, जहाँ
$ I =\frac{ m \ell^2}{3}$
$\alpha=$
$\therefore \frac{ m \ell^2}{3} \alpha= mg \times \frac{\ell}{2} $
$\Rightarrow \alpha=\frac{3 g }{2 \ell} . $ View full question & answer→Question 341 Mark
$m$ द्रव्यमान का एक कण, $XY$ तल में सीधी रेखा $AB$ पर $v$ वेग से गतिशील है। मूल बिन्दु $O$ के सापेक्ष कण का कोणीय संवेग बिन्दु $A$ पर $L_A$ हो तथा बिन्दु $B$ पर $L_B$ हो, तो :
Answer(a) कोणीय-संवेग $=$ रेखीय-संवेग $\times$ रेखीय-संवेग की क्रिया-रेखा की मूल-बिन्दु से अभिलम्बीय-दूरी
$\begin{aligned} \therefore L _{ A } & = p _{ A } \times d \\ L _{ B } & = p _{ B } \times d \\ \because p _{ A } & = p _{ B } \\ \therefore L _{ A } & = L _{ B }\end{aligned}$ View full question & answer→Question 351 Mark
$\ell$ लम्बाई और $m$ द्रव्यमान वाली एक छड़ $A$ के परित: ऊर्ध्वाधर समतल में घूर्णन करने के लिए मुक्त है। यह छड़ जो आरंभिक रूप से क्षैतिज स्थिति में है छोड़ दी गयी। छड़ का आरंभिक कोणीय त्वरण है $A$ के परित: छड़ का जड़त्व आघूर्ण है $\frac{ m \ell^2}{3}$ ):
Answer(d) गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से आघूर्ण $= mg \frac{1}{2}$
घूर्णन-त्वरण $=\frac{\frac{ mg \ell}{2}}{\frac{ m \ell^2}{3}}=\frac{3}{2} \frac{ g }{\ell}$
View full question & answer→Question 361 Mark
$R$ त्रिज्या और $M$ द्रव्यमान वाली डिस्क के व्यास को स्पर्श करने वाले और डिस्क के लम्बवत् अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण है:
Answer(b) जड़त्व आघूर्ण $I =\frac{1}{2} MR ^2$
समान्तर अक्ष प्रमेय से
$
I = I _{\text {C.G. }}+ Md ^2=\frac{1}{2} MR ^2+ MR ^2=\frac{3}{2} MR ^2
$
View full question & answer→Question 371 Mark
लम्बाई $L$ वाली एक नलिका को किसी असंपीड्य द्रव से भर कर दोनों तरफ से बंद कर दिया जाता है। तब इस नलिका के एक छोर से इसको क्षैतिज तल में एक समान कोणीय वेग $\omega$ से घुमाया जाता है। द्रव द्वारा दूसरे छोर पर लगाया गया बल है:
Answer$(d)$

उपकेन्द्र बल $=\omega^2 r$
माना एक छोटा हिस्सा $dx$ लम्बाई में तरल पदार्थ है।
इसकी अक्ष से दूरी $x$ है।
माना रेखीय घनत्व $= e$
लम्बाई में तरल पदार्थ का द्रव्यमान $= Aedx$
$( A =$ नली के मुंह का क्षेत्रफल$)$
उपकेन्द्र बल $= dxAe \omega^2 x$
कुल उपकेन्द्र बल
$ =\int_0^1 \operatorname{Ae}_{ x }^2 dx = Ae \omega^2\left[\frac{ x ^2}{2}\right]_0^1$
$=\frac{ Ae \omega^2 1^2}{2}= Al \frac{ e \omega^2 1}{2}=\frac{ Ml \omega^2}{2} $ View full question & answer→Question 381 Mark
$R$ त्रिज्या और $M$ द्रव्यमान वाला एक ड्रम बिना फिसले $\theta$ कोण वाले नत समतल पर लुढ़कता है। घर्षण बल
Answerड्रम के नीचे आने पर किया कार्य $W _{\text {net }}=0$
$ W _{\text {trans }}+ W _{\text {rot }}=0$
$\Delta K _{\text {trans }}+\Delta K _{\text {rot }}=0$
$\Delta K _{\text {trans }}=-\Delta K _{\text {rot }} $
अतः रेखीय गतिज ऊर्जा घूर्णन गतिज ऊर्जा में बदल जाएगी।

View full question & answer→Question 391 Mark
दो वस्तुओं का उनके घूर्णन $-$ अक्ष के परितः जड़त्वआघूर्ण क्रमशः $I$ और $2\ I$ है। यदि इनकी घूर्णन गतिज ऊर्जाएँ बराबर हों तो इनके कोणीय संवेगों का अनुपात होगा:$-$
Answer$ K =\frac{ L ^2}{2 I } $
$\Rightarrow L ^2=2 KI $
$\Rightarrow L =\sqrt{2 KI }$
$\frac{ L _1}{ L _2}=\sqrt{\frac{ K _1}{ K _2} \cdot \frac{ I _1}{ I _2}}$
$=\sqrt{\frac{ K }{ K } \cdot \frac{ I }{2 I }}=\frac{1}{\sqrt{2}}$
$L _1: L _2=1: \sqrt{2}$
View full question & answer→Question 401 Mark
$R$ त्रिज्या और $M$ द्रव्यमान वाली एक समान वृत्ताकार डिस्क का अपनी तल के लम्बवत् तथा किनारे से मुजरने वाले अक्ष के परित: जड़त्व आघूर्ण है $:-$
Answer$R$ त्रिज्या $M$ और द्रव्यमान वाली डिस्क के केंद्र से निकलने वाले लम्बवत अक्ष के परितः डिस्क का जड़त्व है:

$ I _{ C.M .}=\frac{1}{2} MR ^2 $
समांतर $-$ अक्ष प्रमेय से
$ I _{ T }= I _{ C \cdot M }+ MR ^2$
$=\frac{1}{2} MR ^2+ MR ^2=\frac{3}{2} MR ^2 $ View full question & answer→Question 411 Mark
किसी वृत्ताकार डिस्क और समान त्रिज्या के वृत्ताकार रिंगे के समतलों में स्पर्शज्या अक्षों के परितः गाइरेशन त्रिज्याओं का अनुपात है:
Answer$(d)$

$ I _{ y _1}=\frac{ MR ^2}{4}$
$\therefore I _{ y _1}^{\prime}=\frac{ MR ^2}{4}+ MR ^2=\frac{5}{4} MR ^2$

$ I _{ y _2}=\frac{ MR ^2}{2}$
$\therefore I _{ y _2}^{\prime}=\frac{ MR ^2}{2}+ MR ^2=\frac{3}{2} MR ^2$
$I _{ y _1}^{\prime}= MK _1^2, I _{ y _2}^{\prime}= MK _2^2$
$\therefore \frac{ K _1^2}{ K _2^2}=\frac{ I _{ y _1}^{\prime}}{ I _{ y _2}^{\prime}}$
$\Rightarrow K _1: K _2=\sqrt{5}: \sqrt{6}$ View full question & answer→Question 421 Mark
एक निकाय में दो कण हैं जिनका द्रव्यमान $m _1$ और $m _2$ हैं। यदि $m_1$ द्रव्यमान वाले कण को द्रव्यमान केंद्र की ओर $d$ दूरी तक धकेला जाता है तो द्रव्यमान केंद्र को अपनी जगह पर ही रखने के लिए द्रव्यमान $m _2$ वाले कण को कितनी दूर धकेला जाना चाहिए?
Answer(c) $m _1 d _1= m _2 d _2 \Rightarrow d _2=\frac{ m _1 d _1}{ m _2}$
View full question & answer→Question 431 Mark
समतल के लम्बवत् और केंद्र से निकलने वाले अक्ष के परित: एक गोल डिस्क का जड़त्व आघूर्ण $I _2$ है। इसको एक दूसरी डिस्क के ऊपर रखा गया है जिसका जड़त्व आघूर्ण $I _1$ है और यह $\omega$ कोणीय वेग से समान अक्ष के चारों ओर घूम रहा है। डिस्कों के इस निकाय का अंतिम कोणीय वेग है $:-$
Answerकोणीय संवेग संरक्षित रहता है।
$ I _1 \omega= I _1 \omega^{\prime}+ I _2 \omega^{\prime}$
$\Rightarrow \omega^{\prime}=\frac{ I _1 \omega}{ I _1+ I _2} $
View full question & answer→Question 441 Mark
एक पहिये का इसके ऊध्र्वाधर अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण 2 किग्रा-मी 2 है और यह 60 चक्कर प्रति मिनट की गति से अपने अक्ष पर घूम रहा है। वह बल आघुर्ण जो पहिये के घूर्णन को 1 मिनट में रोक दे हो सकता है:
Answer(d) $\tau \times \Delta t = L _0 \quad\left\{\because\right.$ since $\left.L _f=0\right\}$
$
\Rightarrow \tau \times \Delta t = I \omega
$
or $\tau \times 60=2 \times 2 \times 60 \pi / 60$
$\tau=\frac{\pi}{15}$ न्यूटन-मीटर
View full question & answer→Question 451 Mark
तीन कण जिसमें प्रत्येक का द्रव्यमान $m$ ग्राम है, $\ell$ सेमी. भुजा वाले एक समबाहु त्रिभुज $ABC$ के तीन शिर्षों पर स्थित हैं (जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है)। $ABC$ समतल में $AB$ की लम्बवत रेखा $AX$ के परितः निकाय का जड़त्व आघूर्ण ग्राम-सेमी ${ }^2$ में होगा:-
Answer(d) $\begin{aligned} & I _{ AX }= m ( AB )^2+ m ( OC )^2 \\ & = m \ell^2+ m \left(\ell \cos 60^{\circ}\right)^2 \\ & = m \ell^2+ m \ell^2 / 4=5 / 4 m \ell^2\end{aligned}$
View full question & answer→Question 461 Mark
एक गेंद बिना फिसले लुढ़कती है। इसके द्रव्यमान-केंद्र से गुजरने वाले अक्ष के परितः गाइरेशन त्रिज्या $K$ है। यदि गेंद की त्रिज्या $R$ हो तो इसकी घूर्णन ऊर्जा के साथ जुड़ी कुल ऊर्जा का अंश होगा:-
Answer(d) घूर्णन ऊर्जा $=\frac{1}{2} I \omega^2=\frac{1}{2} mK ^2 \omega^2$
रेखीय गतिज ऊर्जा $=\frac{1}{2} m ^2 R ^2$
$
=\frac{\frac{1}{2} mK ^2 \omega^2}{\frac{1}{2} mK ^2 \omega^2+\frac{1}{2} m \omega^2 R ^2}=\frac{ K ^2}{ R ^2+ K ^2}
$
View full question & answer→Question 471 Mark
द्रव्यमान $M$ और त्रिज्या $R$ वाला एक ठोस बेलन बिना फिसले नत समतल जिसकी लम्बाई $L$ और ऊँचाई $h$ है, पर से लुढ़कता है। जब बेलन नीचे पहुँचता है तो इसके द्रव्यमान केंद्र की चाल क्या है?
Answerऊर्जा संरक्षण नियम से $-$
$ mgh =\frac{1}{2} I \left(\frac{ v ^2}{ R ^2}\right)+\frac{1}{2} mv ^2$
$\Rightarrow v =\sqrt{\frac{4}{3} gh } $
View full question & answer→Question 481 Mark
$M$ द्रव्यमान और त्रिज्या $r$ वाला एक पतला वृत्ताकार रिंग अपने अक्ष पर अचर कोणीय वेग $\omega$ से घूम रहा है। चार वस्तुओं जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान $m$ है, को दोनो व्यासों के छोरों पर रखा गया है। रिंग का कोणीय वेग होगा:$-$
Answerसंवेग $($कोणीय$)$ संरक्षण नियम से
$ I _1 \omega_1= I _2 \omega_2$
$I _1= Mr ^2$
$I _2= Mr ^2+4 mr ^2=( M +4 m ) r ^2$
$\Rightarrow Mr ^2 W =( M +4 m ) r ^2 \omega_1$
$\Rightarrow \omega_1=\frac{ M \omega }{ M +4 m } $
View full question & answer→Question 491 Mark
एक डिस्क कोणीय वेग $\omega$ से घूमता है। यदि इस पर एक बच्चा बैठा हो तो निम्न में से कौन संरक्षित होगा?
Answer(b) यदि आघूर्ण शून्य हो तो कोणीय संवेग नियतांक होगा
$
L = I \omega \text { ( नियतांक) }
$
View full question & answer→Question 501 Mark
$R$ त्रिज्या का एक ठोस गोला एक क्षैतिज समतल पर रखा है। निम्न बिन्दु से $h$ ऊंचाई पर एक क्षैतिज बल $F$ लगाया जाता है। द्रव्यमान-केन्द्र का त्वरण अधिकतम होगा जब
Answer(a) $a =\frac{ F }{ m }$. यह $h$ से स्वतंत्र है।
View full question & answer→Question 511 Mark
यदि $3 m$ लम्बे छड़ का रेखीय घनत्व $x$ के समानुपाती हो। जहां $x$ छड़ के एक सिरे से किसी बिन्दु की दूरी है, इस सिरे से छड़ के गुरुत्व $-$ केन्द्र की दूरी का मान होगा $-$
Answer
माना $A$ से $x$ दूरी पर $dx$ मोटाई का हिस्सा है
$\lambda$ द्रव्यमान प्रति एकांक लम्बाई है
$\lambda \propto x ; \lambda= kx$
$\therefore dm =\lambda dx = kxdx$
$x _{ C.G }=\frac{\int_0^{ L } xdm }{\int_0^{ L } dm }$
$\therefore x_{\text {C.G. }}=\frac{\triangleleft \int_0^3 x ( kx dx )}{\int_0^3 kx dx }$
$=\frac{\left[\frac{ x ^3}{3}\right]_0^3}{\left[\frac{ x ^2}{2}\right]_0^3}=\frac{\frac{(3)^3}{3}}{\frac{(3)^3}{2}}=2 m$ View full question & answer→Question 521 Mark
एक लड़का अचानक एक वृतीय घूर्णी पर आकर बैठ जाता है। क्या संरक्षित रहेगा?
Answer(b) $C =0$ अत: $\frac{ dL }{ dt }=0$
View full question & answer→Question 531 Mark
$1$ मीटर त्रिज्या का एक पहिया क्षैतिज समतल पर आधा चक्कर लगाता है। जमीन के सम्पर्क वाले बिन्दु के विस्थापन का मान होगा
Answer
आधे चक्कर में पहिये द्वारा चली दूरी $=\pi r$
बिन्दु $P _1 2 m$ ऊंचाई पर $P _2$ पहुंचेगा
$ P _1 P _2=\sqrt{\pi^2 r ^2+2^2}$
$=\sqrt{\pi^2+4}$
$\therefore r =1 m $ View full question & answer→Question 541 Mark
एक डिस्क दो समान द्रव्यमान की धातुओं एल्यूमिनियम तथा लोहे से मिलकर इस प्रकार बनी है। इसका जड़त्व आघूर्ण अधिकतम है। यह तब संभव है जब
Answer(b) लोहे का घनत्व > एल्यूमिनियम का घनत्व
$
I=\int r^2 d m
$
अतः एल्यूमिनियम अन्दर तथा बाहर लोहे का रिम होना चाहिए। View full question & answer→Question 551 Mark
एक नियत बल आघूर्ण 1000 न्यूटन-मीटर का है इसका जड़त्व आघूर्ण इसके अक्ष के परित: 200 किग्रा- $^2{ }^2$ है। 3 सेकंड बाद इसका कोणीय वेग होगा-
Answer(d) $\tau=1000$ न्यूटन-मी, $I =200$ किग्रा-मी ${ }^2$
$I \alpha=1000$
$\alpha=\frac{1000}{200}=5$ रेडियन $/$ सेकंड $^2$
$\omega=\omega_0+\alpha t=0+3 \times 5=15$ रेडियन $/$ सेकंड
View full question & answer→Question 561 Mark
एक ठोस सिलेण्डर तथा खोखले सिलेण्डर समान द्रव्यमान तथा समान बाह्य व्यास के है। ये एक ही ऊंचाई से एक ही समय में नत समतल पर बिना फिसले नीचे गिराये जाते है। दोनों में से कौन पहले नीचे आता है?
Answer$I \alpha= F . R .=\tau$
न्यूटन के द्वितीय नियम से

$ mg \sin \theta- F = ma$
$a =\alpha \cdot R $
$\Rightarrow mg \sin \theta=\frac{ I \alpha}{ R }= ma$
$\Rightarrow mg \sin \theta=\frac{ Ia }{ R ^2}= ma$
$a =\frac{ mg \sin \theta}{\left(\frac{ I }{ R ^2}+ m \right)}$
$s = ut +\frac{1}{2} at ^2$
$\Rightarrow s =\frac{1}{2} at ^2 $
$\Rightarrow t \propto \frac{1}{\sqrt{ a }} $
यदि $t$ न्यूनतम हो तो $a$ अधिकतम होगा। ये बेलन के लिए होगा। View full question & answer→Question 571 Mark
एक त्रिभुजाकार पटल $ABC$ है। $AB =4$ सेमी, $BC =$ 3 सेमी तथा $\angle ABC =90^{\circ}$. यदि $AB , BC$ तथा $CA$ के परित: जड़त्व आघूर्ण $I _1, I _2$ तथा $I _3$ है तो निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है।
Answer(b)
$
I =\sum mr ^2
$
$r$ अधिक हो तो $I$ भी अधिक होगी।
यदि $BC$ को अक्ष माना जाए तो
$I _2> I _1 ; I _2> I _3$ View full question & answer→Question 581 Mark
दो कारें $m _1$ तथा $m _2$ द्रव्यमान की है। ये $r _1$ तथा $r _2$ त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर घूमती है। ये दोनों ही समान समय $t$ में अपना एक चक्कर पूरा कर लेती है। पहली व दूसरी कार की कोणीय वेग का अनुपात होगा
Answer(a) दोनों कारों को एक चक्कर लगाने में समान समय लगता है
अत: $\omega=\frac{2 \pi}{ T } \quad \Rightarrow \omega \propto \frac{1}{ T }$
$T$ समान हो तो $\omega$ भी समान होंगे।
View full question & answer→Question 591 Mark
एक $M$ द्रव्यमान तथा $R$ त्रिज्या वाली डिस्क का प्यास के समान्तर तथा परिधि के स्पर्शी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण होगा:
Answer
$I _{ d }=\frac{1}{4} MR ^2\ ($समान्तर अक्ष प्रमेय से$)$
$ I = I _{ d }+ MR ^2$
$=\frac{1}{4} MR ^2+ MR ^2$
$I =\frac{5}{4} MR ^2 $ View full question & answer→Question 601 Mark
एक पतला छल्ला जिसका द्रव्यमान $M$ तथा $r$ है अपने अक्ष पर कोणीय वेग $\omega$ से घूमता है। दो छोटे द्रव्यमान $m$ इसके व्यास के विपरीत सिरों पर चिपका दिये जाते हैं। अब छल्ले का कोणीय वेग होगा $-$
Answerकोणीय संवेग के संरक्षण के नियमानुसार,
$ I _1 \omega_1= I _2 \omega_2$
$=MR ^2 \omega$
$=(M+2 m ) R ^2 \omega^{\prime}$
$\omega^{\prime}=\frac{M \omega}{( M +2 m )} $
View full question & answer→Question 611 Mark
समबाहु त्रिभुज $\text{ABC}$ का केन्द्र $O$ है। $F _1, F _2$ तथा $F _3$ तीन बल $AB , BC$ तथा $AC$ की ओर लगते हैं। $F _3$ का मान क्या होगा यदि $O$ पर कुल आघूर्ण शून्य हो?
Answerमाना बल की रेखा की क्रिया केंद्र से लम्बवत् दूरी $x$ है।
$O$ के परितः आघूर्ण लेने पर
$ F _1 \times x + F _2 \times x - F _3 \times x =0$
$\therefore F _3= F _1+ F _2 $
View full question & answer→Question 621 Mark
एक भारहीन $20$ फुट लम्बी सीढ़ी एक दीवार पर $60^{\circ}$ के कोण पर लगायी जाती है $($ क्षैतिज से$)$। एक $150$ पाउण्ड का व्यक्ति सीढ़ी के उच्चतम बिन्दु से $4$ फुट पर खड़ा है। कितना क्षैतिज बल सीढ़ी को फिसलने में लगेगा।
Answerमाना $AB$ सीढ़ी है। $F$ एक क्षैतिज बल है तथा $W$ व्यक्ति का भार है। माना $N _1$ तथा $N _2$ जमीन तथा दीवार की अभिलम्ब अभिक्रिया
$ W = N _1$
$N _2= F $
$A$ के परितः आघूर्ण लेने पर

$ N _2\left( AB \sin 60^{\circ}\right)- W \left( AC \cos 60^{\circ}\right)= O$
$(2) AB =20 $ फुट,; $ BC =4 $ फुट
$F \times\left(20 \frac{\sqrt{3}}{2}\right)- W \left(16 \times \frac{1}{2}\right)=0$
$F =\frac{8 W \times 2}{20 \sqrt{3}}$
$=\frac{ W }{5 \sqrt{3}}$
$=\frac{150 \times 4}{5 \sqrt{3}}$
$=69.2 \text { pound }$ View full question & answer→Question 631 Mark
Answer(c) एक युग्म दो विपरीत व समान बल जब किसी दूरी पर लगे हो तब बनता है। अतः नेट बल $=0$. रेखिय गति नहीं होगी केवल घूर्णन गति होगी।
View full question & answer→Question 641 Mark
कणों के एक सिस्टम का द्रव्यमान केन्द्र निर्भर नहीं करता-
Answer(b) पिण्ड का द्रव्यमान केन्द्र कण के द्रव्यमानों तथा उनकी अक्ष से सापेक्ष पूरी पर निर्भर करता है।
$
x =\frac{ m _1 x _1+ m _2 x _2}{ m _1+ m _2}
$
View full question & answer→Question 651 Mark
एक कार्बन मोनाक्साइड अणु में कार्बन तथा ऑक्सीजन परमाणुओं की बीच की दूरी $1.12 \times 10$ मी. है। कॉर्बन से द्रव्यमान केन्द्र की दूरी है
Answer
द्रव्यमान केंद्र की परिभाषा से,
$ d=\frac{16 \times 1.12 \times 10^{-10}+12 \times 0}{16+12}$
$=\frac{16 \times 1.12 \times 10^{-10}}{28}$
$=0.64 \times 10^{-10} m $ View full question & answer→Question 661 Mark
एक फ्लाईवील 120 चक्कर/मिनट की दर से घूमता है इसकी घूर्णन चाल होगी-
Answer(c) कोणीय चाल $\omega=\frac{120 \times 2 \pi}{60}=4 \pi$ रेडियन/सेकंड
View full question & answer→Question 671 Mark
एक द्रव्यमान $m$, जड़त्व आघूर्ण $I$ तथा कोणीय चाल
Answer(a) माना पिण्ड में $m _1, m _2, \ldots . . m _{ n }$ द्रव्यमान के कण $r _1, r _2, \ldots . r _{ n }$ दूरी पर $( OA$ से) है।
कोणीय संवेग $= m _1 v _1 r _1+ m _2 v _2 r _2, \ldots .+ m _{ n } v _{ n } r _{ n }$
$= m _1\left(\omega r _1\right) r _1+ m _2\left(\omega r _2\right) r _2+\ldots . .+ m _{ n }\left(\omega r _{ n }\right) r _{ n }$
$= m _1 r _1^2 \omega+ m _2 r _2^2 \omega+\ldots . .+ m _{ n } r _{ n }^2 \omega$
$
=\sum_{ i =1}^{ n } m _1 r _1^2 \omega= I \omega
$
View full question & answer→Question 681 Mark
एक इंजन का पहिया 90 चक्कर/सेकंड से घूमता है। इसकी कोणीय चाल होगा
Answer(b) $f =90 /$ मिनट, $\omega=\frac{2 \pi \times 90}{60}=3 \pi$ रेडियन/सेकंड
View full question & answer→Question 691 Mark
दो कारें द्रव्यमान $m$ तथा $4 m$ की है। ये $r$ तथा $2 r$ त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर घूमती है। यदि ये एक ही समय में एक चक्कर पूरा लगा लेती हो तो पहली तथा दूसरी की घूर्णन गति का अनुपात होगा:
Answer(d) चूंकि दोनों कारें एक चक्कर लगाने में समान समय लेती है, अतः उनकी कोणीय चाल समान होगी। अतः अनुपात $1: 1$ होगा।
View full question & answer→Question 701 Mark
$\text{ABC}$ एक त्रिकोणीय प्लेट है। भुजाएं चित्र में दी गयी है। $I _{AB}, I _{BC}$ तथा $I _{CA}$ क्रमश: $AB , BC$ तथा $CA$ अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण है। बताइये कौन सा संबंध सही है।

Answer$(b)$ त्रिभुज का द्रव्यमान केन्द्र उसकी माध्यिकाओं का छेदन बिन्दु होगा।
$ X _{ BC }> X _{ AB }> X _{ AC }$
अत: $I _{ BC }> I _{ AB }> I _{ AC }$ or $I _{ BC }> I _{ AB } $
View full question & answer→Question 711 Mark
एक पतला छल्ला $30^{\circ}$ के नत समतल पर नीचे आता है। इसमें रेखीय त्वरण का मान है
Answer(c) $a =\frac{ g \sin \theta}{1+ K ^2 / R ^2}=\frac{ g \sin 30^{\circ}}{1+1}=\frac{ g }{4}$
View full question & answer→Question 721 Mark
एक बॉल, मेज पर बिना फिसले चलती है। कुल ऊर्जा का कितना भाग घूर्णन में लगेगा?
Answer(b) $\frac{ K _{ r }}{ E }=\frac{\frac{1}{2} MK ^2 \omega^2}{\frac{1}{2} M \omega^2\left[ K ^2+ R ^2\right]}=\frac{ K ^2}{ K ^2+ R ^2}$
यहाँ $K ^2=\frac{2}{5} R ^2$
View full question & answer→Question 731 Mark
Answer(a) $\overrightarrow{ L }=\overrightarrow{ r } \times m \overrightarrow{ v }, L =$ अक्षीय सदिश है।
View full question & answer→Question 741 Mark
एक आयत $ABCD ( BC =2 AB )$ के किस अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण न्यूनतम होगा?
Answer(d) जड़त्व आघूर्ण EG के परितः न्यूनतम होगा। क्योंकि द्रव्यमान विभाजन EG से न्यूनतम दूरी पर होगा।
View full question & answer→Question 751 Mark
एक ठोस गोला, डिस्क तथा सिलेण्डर एक ही पदार्थ के बने हैं। इनके द्रव्यमान समान है। ये तीनों घूर्णन गति करते हुए नत समतल पर नीचे आते हैं तो:
Answer(a) ठोस गोले के लिए $\frac{ K ^2}{ R ^2}=\frac{2}{5}$
डिस्क तथा बेलन के लिए, $\frac{ K ^2}{ R ^2}=\frac{1}{2}$
$\frac{ K ^2}{ R ^2}$ गोले के लिए न्यूनतम है। अतः यह नीचे आने में न्यूनतम समय लेगा।
View full question & answer→Question 761 Mark
एक ठोस गोला $h$ ऊंचाई के नत समतल पर बिना खिसके घूर्णन गति करता है। उसका कोणीय वेग होगा:
Answer(a) P.E. = कुलK.E.
$
mgh =\frac{7}{10} mv ^2, v =\sqrt{\frac{10 gh }{7}}
$
View full question & answer→Question 771 Mark
एक कण द्रव्यमान $m =5$ का $v =3 \sqrt{2}$ वेग से XOY तल में $y = x +4$ रेखा पर चलता है। मूल बिन्दु के परित: कोणीय संवेग होगा
Answer(a) $Y = X +4$ रेखा चित्र में दिखायी गयी है।
जब $x =0 ; y =4$
अत: $OP =4 y = mx + c$ से तुलना करने पर $m =1 ; \theta=45^{\circ}=\angle OPQ =\angle OQP =45^{\circ}$
लम्ब की लम्बाई $= OP$
$\triangle OPR$ में $\frac{ OR }{ OP }=\sin 45^{\circ}$;
$OR =4 \times \frac{1}{\sqrt{2}}=2 \sqrt{2}$
कोणीय संवेग $= r \times mV =2 \sqrt{2} \times 5 \times 3 \sqrt{2}=60$ View full question & answer→Question 781 Mark
एक गोला घूर्णन गति करता है। रेखीय गतिज ऊर्जा तथा कुल गतिज ऊर्जा (घूर्णन गतिज ऊर्जा सहित) का अनुपात होगा:
Answer(d)
$
\begin{aligned}
E & = E _{ t }+ E _{ r }=\frac{1}{2} mv ^2+\frac{1}{2} I \omega^2 \\
& =\frac{1}{2} m v^2+\frac{1}{2} \times\left(\frac{2}{5} mr ^2\right) \omega^2 \\
& =\frac{1}{2} m v^2+\frac{1}{5} mv { }^2=\frac{7}{10} mv ^2 \\
\therefore & \frac{ E _{ r }}{ E }=\frac{\frac{1}{2} mv ^2}{\frac{7}{10} mv ^2}=\frac{5}{7}
\end{aligned}
$
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किसी अक्ष के परितः किसी पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण $1.2$ किग्रा मी $^2$ है। आरम्भ में पिण्ड स्थिर है। इसमें $1500 J$ की घूर्णन गतिज ऊर्जा बनाने के लिए 24 रेडियन $/$ सेकंड $^2$ का त्वरण लगाना पड़ता है। समय होगा
Answer(b) $I =1.2$ किग्रा मी ${ }^2, E _{ r }=1500 J$
$a =25$ रेडियन $/$ सेकंडं $^2 ; \omega_1=0 ; t =$ ?
$E _{ r }=\frac{1}{2} I \omega^2 ; \omega=\sqrt{\frac{2 E _{ r }}{ I }}=50$ रेडियन/सेकंड
$\omega_2=\omega_1+\alpha t$
$50=0+25 t ; t =2$ सेकंड
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एक डिस्क का व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण $I$ है। इसके समतल के लम्बवत तथा इसके किसी बिन्दु से गुजरता अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण होगा।
Answer(c) डिस्क के व्यास के परित: जड़त्व आघूर्ण = I $\perp$ अक्ष प्रमेय से,
अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण $=\frac{1}{2} mr ^2=2 I$ || अक्ष प्रमेय से,
दी गयी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण
$
=2 I + mr ^2=2 I +4 I =6 I \left(\because I =\frac{1}{4} mr ^2\right)
$
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एक फ्लाईवील अपने अक्ष के परित: $360 J$ की घूर्णन गतिज ऊर्जा से घूमता है। कोणीय वेग 30 रेडियन/सेकंड है। इसका इसी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण होगा-
Answer(c) $E _{ r }=\frac{1}{2} I \omega^2$
$I =\frac{2 E _{ r }}{\omega^2}=\frac{2 \times 360}{30 \times 30}=0.8$ किग्रा मी $^2$
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एक ठोस सिलेण्डर का द्रव्यमान $M$ तथा त्रिज्या $R$ है। यह एक $h$ ऊंचाई के नत समतल पर घूर्णन गति करते हुए नीचे आता है। इसके द्रव्यमान केन्द्र की चाल क्या होगी जब यह नीचे आ जाता है?
Answer$(b)\ \text { K.E. }=\frac{1}{2} I \omega^2+\frac{1}{2} mv ^2$
$\text { K.E. }=\frac{1}{2}\left(\frac{1}{2} mr ^2\right) \omega^2+\frac{1}{2} mv ^2$
$=\frac{1}{4} mv v ^2+\frac{1}{2} mv v ^2=\frac{3}{4} mv $
अब$, K.E.$ में लाभ $= P.E.$ में हानि $ \frac{3}{4} mv v ^2= mgh$
$\Rightarrow v =\sqrt{\left(\frac{4}{3}\right) gh } $
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एक $M$ द्रव्यमान तथा $R$ त्रिज्या का कण वेग $V$ से क्षैतिज वृत्त में घुमाया जाता है। जब यह व्यास के एक बिन्दु से चलकर व्यास के विपरीत बिन्दु पर पहुंच जाता है तब इसकी
Answer(c) 
$A$ पर संवेग $= mV$
ऊर्जा $=\frac{1}{2} mV ^2$
$B$ पर संवेग $=- mV$
ऊर्जा $=\frac{1}{2} m (- V )^2=\frac{1}{2} mV ^2$
संवेगान्तर $= mV -(- mV )=2 mV$
ऊर्जा में अंतर $=\frac{1}{2} mV ^2-\frac{1}{2} mV ^2=0$ View full question & answer→Question 841 Mark
एक $M$ द्रव्यमान तथा $R$ त्रिज्या का ठोस एक समान गोला एक रूक्ष क्षैतिज समतल पर अंशतः फिसलन तथा अंशतः घूर्णन गति करता है। इस प्रकार की गति में गोले का
Answer(b) कोणीय संवेग जो स्पर्श बिन्दु के परितः होगा, उसमें केन्द्र के परितः कोणीय संवेग भी है। अतः कुल संवेग संरक्षित होगा।
View full question & answer→Question 851 Mark
एक $m$ द्रव्यमान तथा $r$ त्रिज्या की रिंग केन्द्र से गुजरने वाले अक्ष के लम्बवत् घूमती है। इसका कोणीय वेग $\omega$ है। इसकी गतिज ऊर्जा होगी:
Answer(a) $KE =\frac{1}{2} I \omega^2$, रिंग के लिए $I = mr ^2$
$
KE =\frac{1}{2} mr ^2 \omega^2
$
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