Questions

प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दें। ( 3 गुण )

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8 questions · self-marked practice — reveal the answer and mark yourself.

Question 13 Marks
सरसों की खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिये ।
(अ) उन्नतशील किस्में
(ब) बीजदर एवं बीजोपचार
(स) खाद एवं उर्वरक
(द) पादप संरक्षण
(य) कटाई एवं उपजु
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 23 Marks
चने की खेती का संक्षेप में वर्णन कीजिए ।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 33 Marks
कपास की खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए ।
(अ) वर्गीकरण
(ब) जलवायु
(स) बीजोपचार
(द) बुआई का समय व विधि
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 43 Marks
आलू में बीजोपचार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer
बीजोपचार (Seed treatment)-
1. आलू के कन्दों को बुआई पूर्व 0.25 प्रतिशत एरीटान के घोल के उपचारित करते हैं अथवा 3 प्रतिशत बोरिक अम्ल से उपचारित करते हैं।
2. आलू को कन्द खुदाई के तुरन्त बाद बोने पर 2-3 माह तक सुषुप्तावस्था में रहने के कारण अंकुरित नहीं होता है। कन्दों की सुषुप्त अवस्था दूर करने के लिए कंद के टुकड़ों को 1 प्रतिशत थायोयूरिया या जिब्रेलिक अम्ल या पोटेशियम थायोसायनेट के घोल से उपचारित करके बोयें। थायोयूरिया की 1 किग्रा. मात्रा 10 लीटर पानी में 10 क्विंटल आलू के कन्दों का उपचारित करने के लिए पर्याप्त है। दीमक, फफूंद और जमीन जनित रोग से बचाव के लिए बीज को 5 लीटर देशी गाय के गोमूत्र में बीज को उपचारित कर 1-2 घण्टे सुखाने के बाद बुआई करें।
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Question 53 Marks
तारामीरा पादप संरक्षण पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
Answer
पादप संरक्षण (Plant Protection)
मोयला (एफिड्स)- मोयला कीट लगते ही मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत चूर्ण 25 किग्रा. प्रति हेक्टेयर की दर से फसल पर भुरकाव करें या डाइमिथोएट 30 ई. सी. या मिथाइल डेमेटोन 25 ई. सी. 1200 मिली. अथवा मोनोक्रोटोफॉस 36 एसएल 1000 मिली. का पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिडकाव करें।
झुलसा (ब्लाईट) तुलासिता (डाउनीमिल्ड्यू) एवं सफेद रोली- इन रोगों के लक्षण दिखाई देते ही मैन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें। प्रकोप अधिक होने की स्थिति में 20 दिन बाद छिड़काव दोहरायें।
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Question 63 Marks
चंवला पादप संरक्षण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer
पादप संरक्षण (Plant protection) - चंवला की फसल में मोयला का प्रकोप होने पर मैलाथियान (50 ईसी) 1 लीटर या फास्फोमिडोन 250 मिली. या 1 लीटर डाइमिथेएट 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
शुष्क मूल विगलन रोग- इस रोग में पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं। रोकथाम के लिए क्विंटोजीन 8 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करें।
छाछिया रोग/चूर्णी फफूँद- इसमें पत्तियों पर सफेद चूर्ण के धब्बे दिखाई देते हैं। रोग के निवारण हेतु 2.5 किग्रा. घुलनशील गंधक या केरेथान 1 लीटर घोल का छिड़काव रोग के लक्षण दिखाई देने पर कर देना चाहिए।
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Question 73 Marks
अरहर की विभिन्न उपयोगी किस्में बताइए।
Answer
उन्नत किस्में (Improved Varieties) - शीघ्र पकने वाली किस्में पूसा 120, पूसा 855, पुसा 33, पूसा अगेती, प्रभात, आजाद, दुर्गा (आई. सी. पी. एल.-84031), प्रगति (आई. पी. एफ.-87), जाग्रति (आई. पी. एफ. -151)।
मध्यम समय में पकने वाली किस्में- टाईप 21, जवाहर अरहर-4, आशा (आई. सी. पी. एल.-87119)।
देर से पकने वाली किस्में- बहार, पूसा - 9।
हाइब्रिड किस्में- पी. पी. एच - 4, आई. सी. पी. एच. -8।
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Question 83 Marks
मोठ की बीजदर तथा बीजोपचार लिखिए।
Answer
बीजदर एवं बीजोपचार (Seed rate and seed treatment)- मोठ की शुद्ध फसल के लिए 10 किग्रा. बीज प्रति हेक्टेयर चाहिए। मिश्रित फसल के लिए 4-5 किग्रा. प्रति हेक्टेयर। बीज बुआई से पूर्व स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 100 पी. पी. एम. पानी के घोल में 1 घण्टे तक भिगोने के बाद केप्टाफ 75 एसडी 2 ग्राम प्रति किग्रा. बीज की दर से उपचारित करना चाहिए तथा बुआई पूर्व 0.5 ग्राम थायोयूरिया प्रतिलीटर पानी घोल में या 5 ग्राम थायोयूरिया + 1 मिली. डी. एम. एस. ओ. प्रति 10 लीटर पानी में घोल बनाकर 4-5 घण्टे भिगोकर सुखायें। इसके बाद राइजोबियम कल्चर से मूँग की तरह बीजोपचार कर बुआई करें।
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