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Question 14 Marks
0.001028 $mol~L^{-1}$ ऐसीटिक अम्ल की चालकता $4.95 \times 10^{-5} S~cm^{-1}$ है। यदि ऐसीटिक अम्ल के लिए $\lambda^{\circ}{ }_{ m }$ का मान 390.5 $S~cm^{2}~mol^{-1}$ है, तो इसके वियोजन स्थिरांक का परिकलन कर लिखिए।
Answer
प्रश्नानानुसार, ऐसीटिक अम्ल की सान्द्रता $(c)=0.001028 mol L ^{-1}$
चालकता $(k)=4.95 \times 10^{-5} S m ^{-1}, \lambda^{\circ}{ }_m=390.5 cm^2 mol^{-1}$
मोलर की चालकता $\left(\lambda_m\right)=\frac{4.95 \times 10^{-5}}{0.001028}=\frac{ k }{ c }$
$=0.04825 S m^2 mol^{-1}$
आयनिक वियोजन $(\alpha)=\frac{\lambda_m}{\lambda_m^0}=\frac{0.04815}{0.03905}=1.233$
परंतु, यहाँ $\alpha>1$ है जो संभव नहीं है।
अतः पुनः जाँचने पर,
$\lambda_m =\frac{I^{\circ} \times 1000}{C}=\frac{4.95 \times 10^{-5} \times 1000}{0.001028}=\frac{0.0495}{0.001028}$
$=48.155 cm^2 mol^{-1}$
अतः अब दोनों इकाइयाँ $S cm ^2 mol^{-1}$ में है, तो
$ \alpha =\frac{I_m}{I_m^*}=\frac{48.15}{390.5}=0.1233 $
वियोजन स्थिरांक $\left(K_a\right) =\text { c. } \frac{\alpha^2}{1-\alpha}=0.001028 . \frac{(0.1233)^2}{1-0.1233} $
$ =0.001028 \times \frac{0.0152}{0.8767} $
$ =0.001028 \times 0.01734=1.78 \times 10^{-5} $
ऐसीटिक अम्ल का वियोजन स्थिरांक $\left( K _a\right) \simeq 1.78 \times 10^{-5}$ है।
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Question 24 Marks
$CuSO_{4}$ के विलयन को 1.5 एम्पियर की धारा से 10 मिनट तक वैद्युत अपघटित किया गया। कैथोड पर निक्षेपित कॉपर का द्रव्यमान परिकलित कर लिखिए।
Answer
प्रश्नानुसार,$\quad$$\quad$$I = 1.5 A$ , $t = 10$ मिनट $= 10 \times 60 = 600$ सेकण्ड ,
$\quad$$\quad$कॉपर का अणुभार $ = 63.5$ ग्राम/मोल।
$\because \quad$ कॉपर के लिए $n=2 \quad\left(\because cu ^{2+}+2 e ^{-} \rightarrow cu \right)$
$\quad$$\quad$फैराडे नियतांक (F) = 96500 कूलॉम्ब/मोल
$\therefore \quad$ आवेश $( Q )= I \times t=1.5 \times 600=900$ कूलॉम
फैराडे के नियम के अनुसार :$\quad$$W=\frac{E \times Q}{n \times F}=\frac{63.5 \times 900}{2 \times 96500}=\frac{57150}{193000}=0.29612$
कैथोड पर निक्षेपित ताँबे का द्रव्यमान लगभग 0.296 ग्राम होगा।
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Question 34 Marks
गैल्वेनी सेल एवम् विद्युत् अपघटनी सेल में कोई चार अंतर लिखिए।
Answer
गैल्वेनी सेल एवं विद्युत् अपघटनी सेल में अन्तर
गैल्वेनिक सेलविद्युत् अपघटनी सेल
1. यह रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।यह विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
2. इसमें अभिक्रिया स्वयंस्फूर्त होती है।इसमें अभिक्रिया गैर-स्वयंस्फूर्त होती है, जिसे बाहरी विद्युत स्रोत से कराया जाता है।
3. इसमें कैथोड धनात्मक तथा एनोड ऋणात्मक होता है।इसमें कैथोड ऋणात्मक तथा एनोड धनात्मक होता है।
4. यह विद्युत उत्पन्न करता है।
उदाहरण- डेनियल सेल, ड्राय सेल
यह विद्युत की खपत करता है।
ताँबे का विद्युत निष्क्षेपण, जल का विद्युत अपघटन
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Question 44 Marks
नर्नस्ट समीकरण की व्युत्पत्ति कर लिखिए।
Answer
नर्नस्ट समीकरण — किसी धातु का इलेक्ट्रोड विभव, उस धातु के आयनों की सान्द्रता तथा तापमान पर निर्भर करता है। इसलिए किसी गैल्वैनिक सेल का विभव भी इन्हीं कारकों से प्रभावित होता है। इन प्रभावों को व्यक्त करने के लिए नर्नस्ट ने एक समीकरण प्रस्तुत किया, जिसे नर्नस्ट समीकरण कहा जाता है।
ननर्स्ट समीकरण की व्युत्पत्ति -हम जानते हैं,
$G =G^{\circ}+RT \text { In } Q \quad$ (गिब्स समीकरण) $...(i)$
$G^{\circ} =-E^{\circ} nF \quad ...(ii)$
$G^{\circ} =-n EF\quad ...(iii)$
जहाँ, $G =$ गिब्स ऊर्जा, $G ^{\circ}=$ मानक गिब्स ऊर्जा, $R =$ गैस नियतांक, $T =$ परमताप, $Q =$ क्रिया भागफल, $E ^{\circ}=$ मानक विभव, $E =$ विभव, $F =$ फैराडे नियतांक तथा $n =$ समीकरण में भाग लेने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या समीकरण (ii) व (iii) का मान समीकरण (i) में रखकर सरल करने पर,
$E=E^{\circ}-\frac{2.303 RT}{n F} \log _{10} Q$
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Question 54 Marks
विद्युत रासायनिक सेल का नामांकित चित्र, संरचना एवं रासायनिक अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
Answer
गैल्वेनिक सेल - रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने वाली युक्ति को गैल्वेनिक सेल कहते हैं। इसका कार्य सिद्धांत रेडॉक्स अभिक्रिया पर आधारित होता है। यह एक प्रकार का विद्युत रासायनिक सेल है।
कार्यविधि - इस सेल में दो विद्युत अपघट्य विलयन अलग-अलग पात्रों में रखे जाते हैं। प्रत्येक पात्र में संबंधित धातु की छड़ उस धातु के आयनों वाले विलयन में डाली जाती है और वह इलेक्ट्रोड का कार्य करती है।

Image
डेनियल सेल में, एक पात्र में $ZnSO _4$ का विलयन और उसमें डाली गई Zn की छड़, तथा दूसरे पात्र में $CuSO _4$ का विलयन और उसमें डाली गई Cu की छड़ होती है।
$ZnSO _4$ विलयन में $Zn ^{2+}$ आयन होते हैं। इस विलयन में जिंक की छड़ से Zn धातु इलेक्ट्रॉन छोड़कर $Zn ^{2+}$ आयन के रूप में विलयन में चली जाती है। यह क्रिया ऑक्सीकरण कहलाती है।
$Zn \rightarrow Zn ^{2+}+2 e^{-}$
ये इलेक्ट्रॉन तार द्वारा कॉपर की छड़ पर चले जाते हैं। $CuSO _4$ के विलयन में उपस्थित $Cu ^{2+}$ आयनों का इन इलेक्ट्रॉनों द्वारा अपचयन होने लगता है।
$Cu ^{2+}+2 e ^{-} \rightarrow Cu$
इलेक्ट्रॉनों के इस प्रवाह के कारण विद्युत् धारा उत्पन्न होती है। जिंक का घुलना व कॉपर छड़ पर कॉपर चढ़ना जारी रहता है। जिंक इलेक्ट्रोड ऑक्सीकरण होने के कारण ऐनोड व कॉपर इलेक्ट्रोड पर अपचयन के कारण कैथोड कहलाता है। जिंक छड़ सेल का ऋण व कॉपर छड़ धन सिरा कहलाते हैं।
सेल में लवण सेतु विद्युत परिपथ को पूर्ण करता है। सेल की सम्पूर्ण क्रिया निम्न प्रकार लिखी जा सकती है-
$Zn + Cu ^{2+} \rightarrow Zn ^{2+}+ Cu$
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Question 64 Marks
निम्न को परिभाषित कीजिए-
(i) विशिष्ट चालकता
(ii) तुल्यांकी चालकता
(iii) आण्विक चालकता
(iv) सेल स्थिरांक
(v) विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता
Answer
(i) विशिष्ट चालकता- विशिष्ट प्रतिरोध के व्युत्क्रम को विशिष्ट चालकता कहा जाता है। इसे $\kappa$ (कप्पा) द्वारा दर्शाया जाता है।
$\kappa=\frac{1}{\rho} \quad$ या $\kappa=\frac{1}{ R } \times \frac{l}{A} \quad\left(\because \rho=\frac{ R \times A }{l}\right)$
यदि $l=1$ सेमी तथा $A =1$ वर्ग सेमी हो, तब $\kappa=\frac{1}{ R }$ ।
अतः किसी विलयन की विशिष्ट चालकता, उसके 1 घन सेंटीमीटर आयतन वाले भाग की कुल चालकता होती है।
इसका मात्रक $\Omega^{-1} cm^{-1}\left( ohm ^{-1} \cdot cm^{-1}\right)$ होता है। तनुकरण करने पर विशिष्ट चालकता में कमी आती है।
(ii) तुल्यांकी चालकता - किसी विलयन की तुल्यांकी चालकता वह मान है, जो उसकी विशिष्ट चालकता तथा उस आयतन ( $cm ^3$ में) के गुणनफल के बराबर होती है, जिसमें विद्युत अपघट्य का एक ग्राम तुल्यांक विलेय घुला होता है।
$\Lambda_{eq} = \kappa \times V$
इसका मात्रक $\Omega^{-1} cm^2 eq ^{-1}$ होता है। तनुकरण करने पर तुल्यांकी चालकता बढ़ जाती है।
(iii) मोलर चालकता/आण्विक चालकता - किसी विलयन की मोलर चालकता, उसकी विशिष्ट चालकता और उस आयतन का गुणनफल होती है, जिसमें विद्युत अपघट्य का 1 मोल विलेय घुला होता है।
$\Lambda_{m} = \kappa \times V$
इसका मात्रक $\Omega^{-1} cm^2 . mol ^{-1}$ होता है। तनुकरण करने पर आण्विक चालकता बढ़ जाती है।
(iv) सेल स्थिरांक- चालकता सेल के इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी और इलेक्ट्रोडों के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल  के अनुपात को सेल स्थिरांक कहा जाता है।इसे G* द्वारा दर्शाया जाता है।
$\kappa= CG ^*$, जहाँ $\kappa=$ विशिष्ट चालकता, C = चालकता है।
(v) विशिष्ट प्रतिरोध (ρ)- यह 1 सेमी लम्बे व 1 सेमी$^2$ अनुप्रस्थ परिच्छेद वाले चालक का प्रतिरोध होता है।
$\rho = R \times (l/A)$
इसकी इकाई ओह्म-सेमी है।
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Question 74 Marks
कोलरॉश नियम लिखिए एवं इसके दो अनुप्रयोगों का वर्णन कीजिए।###कोलरॉश के नियम को परिभाषित कीजिए।
Answer
कोलरॉश का नियम - जब किसी वैद्युत अपघट्य की अनन्त तनुता पर वह पूर्णतः आयनित हो जाता है और आयनों के बीच आकर्षण नगण्य हो जाता है, तब उसकी आण्विक चालकता का मान, उसके धनायन तथा ऋणायन की अनन्त तनुता पर आयनिक चालकताओं के योग के बराबर होता है। इस सिद्धांत को कोलरॉश का नियम कहा जाता है।
$\Lambda_m^{\infty}=x \lambda_c^{\infty}+y \lambda_a^{\infty}$
जहाँ, $\Lambda_{n n}^{\infty}=$ अनन्त तनुता पर मोलर चालकता
$\quad$$\lambda_c^{\infty}=$ अनन्त तनुता पर धनायन की चालकता
$\quad$$\lambda_a^{\infty}=$ अनन्त तनुता पर ऋणायन की चालकता
$\quad$$x, y=$ धनायन व ऋणायन की संख्या।
(i) कोलरॉश के नियम के अनुप्रयोग द्वारा किसी वैद्युत अपघट्य की आण्विक चालकता ज्ञात करना-
कोलरॉश के नियम की सहायता से दुर्बल वैद्युत अपघट्यों की आण्विक चालकता या तुल्यांकी चालकता का परिकलन सरलता से किया जा सकता है। मान लें कि हमें अनन्त तनुता पर ऐसीटिक अम्ल की आण्विक चालकता ज्ञात करनी है-
$\Lambda_{\pi n\left(CH_3 COOH\right)}^{\infty}=\lambda^{\left(H^{+}\right)}+\lambda_{\left(CH_3 COO^{-}\right)}^{\infty}$
आयन चालकताएँ $\lambda_{\left( H ^{+}\right)}^{\infty}$ तथा $\lambda_{\left( CH _3 COO ^{-}\right)}^{\infty}$ की गणना $HCI , CH _3 COONa$ तथा NaCl की $\Lambda^{\infty}$ द्वारा ज्ञात की जा सकती है।
अर्थात् $\Lambda_{m\left(CH_3 COOH\right)}^{\infty}=\Lambda_{(HCl)}^{\infty}+\Lambda_{\left(CH_3 COONa\right)}^{\infty}-\Lambda_{(NaCl)}^{\infty}$ \
$HCl , CH _3 COONa$ तथा NaCl की अनन्त तनुता पर आण्विक चालकताएँ प्रायोगिक विधि से ज्ञात की जा सकती हैं, क्योंकि ये सब प्रबल वैद्युत अपघट्य हैं।
(ii) कोलरॉश नियम के अनुप्रयोग से दुर्बल वैद्युत अपघट्यों के आयनन की मात्रा ज्ञात करना- अनन्त तनुता पर दुर्बल विद्युत्-अपघट्य की आण्विक चालकता अधिकतम होती है। इसका तात्पर्य है कि विद्युत्-अपघट्य पूर्ण रूप से आयनित हो जाता है। अतः स्थिर ताप पर किसी दुर्बल वैद्युत अपघट्य के आयनन की मात्रा ($\alpha$), V तनुता पर आण्विक चालकता तथा अनन्त तनुता पर आण्विक चालकता के अनुपात के बराबर होती है।
$\alpha=\frac{\Lambda_m^{ V }}{\Lambda_m^{\infty}}$
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Question 84 Marks
0.025 mol L$^{-1}$ मीथेनोइक अम्ल की चालकता 46.15 S cm$^2$ mol$^{-1}$ है, इसकी वियोजन मात्रा एवं वियोजन स्थिरांक का परिकलन कीजिए। दिया गया है- $\lambda^{\circ}_{(H^{+})} = 349.6 S~cm^{2}mol^{-1}$ एवं $\lambda^{\circ}_{(HCOO^{-})} = 54.6 S~cm^{2}mol^{-1}$
Answer
$\because \Lambda_{HCOOH}^{O} =\lambda_{\left(H^{+}\right)}^{\circ}+\lambda_{\left(HCOO^{-}\right)}^{\circ} $
$ \Lambda_{HCOOH}^{o} =349.6+54.6=404.2 s cm^2 mol^2 $
$ \because \quad$ वियोजन की मात्रा $(\alpha)=\frac{\Lambda_{HCOOH}^{\circ}}{\Lambda_{HCOOH}^{\circ}}=\frac{46.15}{404.2}= 0 . 1 1 4 2 $
$ \because \quad $ वियोजन स्थिरांक $=\frac{\alpha^2 C}{1-\alpha}=\frac{(0.1142)^2 \times 0.025}{(1-0.1142)}= 3 . 7 \times 1 0 ^{-4} $
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