Questions

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सविस्तर लिखिए : [5 गुण ]

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Question 15 Marks
धातुओं तथा अधातुओं में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer
धातुएँअधातुएँ
1. धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं।1. अधातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की कुचालक होती हैं। (ग्रेफाइट, इसका अपवाद है जो अधातु होते हुए भी ऊष्मा तथा विद्युत का सुचालक है ।)
2. धातुएँ आघातवर्ध्य तथा तन्य होती हैं।2. अधातुएँ न तो आघातवर्र्य होती है और न ही तन्य होती हैं। अधातुएँ भंगुर होती हैं।
3. धातुएँ चमकदार होती हैं तथा उन पर पॉलिश की जा सकती है।3. अधातुएँ सामान्यतः चमक़दार नहीं होती तथा उन पर पॉलिश नहीं की जा सकती।
4. धातुएँ ठोस होती हैं [केवल मर्करी (पारा) [केवल मर्करी (पारा) को होड़कर जो कि एक द्रव धातु है ]।4. अधातुएँ ठोस, द्रव तथा गैसें हो सकती हैं।
5. धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक सामान्यतः उच्च होते हैं।5. अधातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक अपेक्षाकृत निम्न होते हैं।
6. धातुएँ क्षारीय ऑक्साइड बनाती हैं।6. अधातुएँ अम्लीय या ठदासीन ऑक्साइड बनाती हैं।
7. धातुएँ सामान्यतः तनु अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करती हैं।7. अधातुएँ तनु अम्लों में से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करर्ती।
8. धातुएँ सामान्यतः हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया नहीं करती। के वल कुछ अत्यन्त अभिक्रियाशील धातुएँ ही हाइड्रोजन के साथ संयोग करके हाइड्राइड बनाती हैं।8. अधातुएँ हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करके स्थायी हाइड्राइड बनाती है।
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Question 25 Marks
धातुओं में विस्थापन अभिक्रियाओं को समझाइए।
Answer
धातुओं में विस्थापन अभिक्रियाएँ:
हम जानते हैं कि एक धातु दूसरी धातु को उसके यौगिक के जलीय विलयन से विस्थापित करती है किन्तु यह क्रिया सामान्य नहीं है। इसमें अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को प्रतिस्थापित कर सकती है किन्तु कम अभिक्रियाशील धातु अधिक अभिक्रियाशील धातु को प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। इसे हम अग्र प्रकार समझ सकते हैं।
100 मिली. के पाँच बीकर लेकर उन्हें A, B, C, D और E द्वारा चिन्हित कर लेते हैं। प्रत्येक बीकर में लगभग 50 ml जल लेते हैं। बीकर A में एक चम्मच कॉपर सल्फेट तथा जिंक का टुकड़ा; बीकर B में कॉपर सल्फेट तथा लोहे की कील; बीकर C में जिंक सल्फेट + ताँबे की छीलन; बीकर D में आयरन सल्फेट + ताँबे की छीलन तथा बीकर E में जिंक सल्फेट तथा लोहे की कील डालकर इन्हें चम्मच से घोलकर कुछ समय के लिए रख देते हैं। अवलोकन करने पर हम देखते हैं कि बीकर A में जिंक, कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर को विस्थापित करता है। इसी कारण कॉपर सल्फेट का नीला रंग अंदृश्य हो जाता है तथा बीकर के पैंदे पर कॉपर का लाल चूर्ण जमा हो जाता है। इसी प्रकार बीकर ' B ' में भी कॉपर सल्फेट का नीला रंग अदृश्य हो जाता है। इनकी क्रियाएँ निम्न प्रकार होती हैं
CuSO4 + Zn → ZnSO4 + Cu (लाल)
CuSO4 + Fe → FeSO4 + Cu (लाल)

RBSE Class 8 Science Important Questions Chapter 4 पदार्थ धातु और अधातु 1

किन्तु बीकर C, D व E में कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देता है। बीकर C में Cu जिंक सल्फेट से जिंक को प्रतिस्थापित करने में सक्षम नहीं है जबकि जिंक कॉपर को प्रतिस्थापित कर देता है। इसका कारण यह है कि जिंक कॉपर व आयरन से अधिक अभिक्रियाशील है। एक अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को प्रतिस्थापित कर सकती है किन्तु कम अभिक्रियाशील धातु अधिक अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित नहीं कर सकती है। यही कारण हैं कि बीक व D , E में भी विस्थापन अभिक्रियाएँ संपन्न नहीं हुईं।
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Question 35 Marks
पदार्थ A तथा B की अभिक्रिया से सल्फर डाइऑक्साइड गैस बनती है जिसे जल में विलेय करने पर C प्राप्त होता है। पदार्थ A, B तथा C का नाम लिखते हुए अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण बीजिए।
Answer
पदार्थ A = सल्फर; B = ऑक्सीजन; C = सल्फ्यूरस अम्ल समीकरण:
(i) $S + O _2 \longrightarrow SO _2$ (सल्फर डाइऑक्साइड) सल्फर ऑक्सीजन
(ii) $SO _2+ H _2 O \longrightarrow H _2 SO _3$ (सल्फ्यूरस अम्ल) जल
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