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Model Paper 4 question types

49 questions across 11 question groups — pick any mix to generate a Hindi -अनिवार्य paper with step-by-step answer keys.

49
Questions
11
Question groups
5
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Sample Questions

Model Paper 4 questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

शारीरिक रूप से चुनौती का सामना कर रहे व्यक्ति और दर्शक, दोनों एक साथ रोने लगेंगे, तो उस से प्रश्नकर्ता का कौन-सा उद्देश्य पूरा होगा और कैसे? समझाकर लिखिए।
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धनी, वज्र गर्जन से बादल !
त्रस्त-नयन मुख ढाँप रहे हैं।
जीर्ण बाहु है, शीर्ण शरीर,
तुझे बुलाता कृषक अधीर,
ऐ विप्लव के वीर !
चूस लिया है उसका सार
हाड-मात्र ही है आधार,
ऐ जीवन के पारावार ।
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सबसे तेज बौछारें गयीं भादो गया
सवेरा हुआ
खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा
शरद आया पुलों को पार करते हुए
अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए
घंटी बजाते हुए जोर-जोर से
चमकीले इशारों से बुलाते हुए
पतंग उड़ाने वाले बच्चों के झुंड को
चमकीले इशारों से बुलाते हुए और
आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए
की पतंग ऊपर उठ सके -
दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज उड़ सके
दुनिया का सबसे पतला कागज उड़ सके
बाँस की सबसे पतली कमानी उड़ सके
कि शुरू हो सके सीटियों, किलकारियों और
तितलियों कि इतनी नाजुक दुनिया।
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उछलते-कूदते एक दूसरे को धकियाते ये लोग गली में किसी दो महले मकान के सामने रुक जाते, पानी दे मैया, इंद्रसेना आई है। और जिन घरों में आखिर जेठ या शुरु आषाढ़ के उन सूखे दिनों में पानी की कमी भी होती थी, जिन घरों के कुएँ भी सूखे होते थे, उन घरों से भी सहेज कर रखे हुए पानी में से बाल्टी या घड़े भर-भर कर उन बच्चों को सर से पैर तक तर कर दिया जाता था। ये भीगे बदन मि‌ट्टी में लोट लगाते थे, पानी फेंकने से पैदा हुए कीचड़ में लथपथ हो जाते थे। हाथ, पाँव, बदन, मुँह, पेट सब पर गंदा कीचड़ मल कर फिर हाँक लगाते 'बोल गंगा मैया की जय' और फिर मैडली बाँधकर उछलते-कूदते अगले घर की ओर चल पड़ते बादलों को टेरते, 'काले मेघा पानी दे।'
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दिन भर के कार्य-भार से छुट्टी पाकर जब में कोई लेख या भाव को छंदबद्ध करने बैठती हूँ, तब छात्रावास की रोशनी बुझ चुकती है, मेरी हिरनी सोना तख्त के पैताने फर्श पर बैठकर पागुर करना बंद कर देती है. कुत्ता वसंत छोटी मचिया पर पंजों में मुँह रखकर आँखें मूंद लेता है और बिल्ली गोधूलि मेरे तकिए पर सिकुड़ कर सो रहती है। पर मुझे रात की निस्तब्धता में अकेली ने छोड़ने के विचार से कोने में दरी के आसन पर बैठकर बिजली की चकाचौंध से आँखें मिचमिचाती हुई भक्तिन, प्रशांत भाव से जागरण करती है। वह ऊँघती भी नहीं, क्योंकि मेरे सिर उठाते ही उसकी धुँधली दृष्टि मेरी आँखों का अनुसरण करने लगती है। यदि मैं सिरहाने रखे रैक की ओर देखती हूँ, तो वह उठकर आवश्यक पुस्तक का रंग पूछती है, यदि मैं कलम रख देती हूँ, तो वह स्याही उठा लाती है और यदि में कागज एक और सरका देती हूँ, तो वह दूसरी फाइल टटोलती है।
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यह अवसर है, स्वर्ण सुयुग है,
खो न इसे नादानी में,
रंगरलियों में, छेड़छाड़ में
मस्ती में मनमानी में
तरुण विश्व की बागडोर ले
तू अपने कठोर कर में,
स्थापित कर रे मानवता
बर्बर नृशंस के उर में।
दंभी को कर ध्वस्त धरा पर
अस्त-त्रस्त पाखंडों को,
करूणा शांति स्नेह सुख भर दे
बाहर में,अपने घर में।
यौवन की ज्वाला वाले
दे अभयदान पददलितों को,
तेरे चरण शरण में आहत
जग आश्वासन-श्वास गहे।
(i) 'यह अवसर है, स्वर्ण सुयुग है, खो न इसे नादानी में' कवि के इस कथन का आशय क्या है ?
(ii) कवि तरूण से विश्व की बागडोर अपने हाथों में लेने को क्यों कहता है?
(iii) 'अभयदान' किसे देना है ?
(iv) पद्यांश का केन्द्रीय भाव बताइए।
(v) कवि ने क्या नहीं खोने की बात कही है ?
(vi) उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
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'संस्कृति' शब्द का संबंध संस्कार से है जिसका अर्थ है- संशोधन करना, उत्तम बनाना, परिष्कार करना। अंग्रेजी शब्द 'कल्चर' में वही धातु है जो 'एग्रीकल्चर' में है, इसका भी अर्थ 'पैदा करना, सुधारना है।' संस्कार व्यक्ति के भी होते हैं और जाति के भी। जातीय संस्कारों को ही संस्कृति कहते हैं। संस्कृति एक समूह वाचक शब्द है। जलवायु के अनुकूल रहन-सहन की विधियाँ और विचार परम्पराएँ जाति के लोगों में दृढ‌मूल हो जाने से जाति के संस्कार बन जाते हैं। इनको प्रत्येक व्यक्ति अपनी निजी प्रकृति के अनुकूल न्यूनाधिक मात्रा में पैतृक सम्पत्ति के रूप में प्राप्त करता है। ये संस्कार व्यक्ति के घरेलू जीवन तथा सामाजिक जीवन में परिलक्षित होते हैं। मनुष्य अकेला रहकर भी इनसे छुटकारा नहीं पा सकता। ये संस्कार दूसरे देश में निवास करने अथवा दूसरे देशवासियों के सम्पर्क में आने से कुछ परिवर्तित भी हो सकते हैं और कभी-कभी दब भी जाते हैं किन्तु अनुकूल वातावरण प्राप्त करने पर फिर उभर आते हैं। 
संस्कृति का बाह्य पक्ष भी होता है और आंतरिक भी। उसका बाह्य पक्ष आंतरिक प्रतिबिम्ब नहीं तो उससे संबंधित अवश्य होता है। हमारे बाह्य आचार हमारे विचारों और मनोवृत्तियों के परिचायक होते हैं। संस्कृति एक देश-विशेष की उपज होती है, उसका संबंध देश के भौतिक वातावरण और उसमें पालित, पोषित एवं परिवर्द्धित विचारों से होता है। 
(i) 'संस्कृति' का संबंध किससे है ? 
(ii) संस्कृति किसे कहते हैं ? 
(iii) संस्कृति के बाह्य पक्ष का संबंध किससे है ? 
(iv) व्यक्ति के संस्कार किस रूप में परिलक्षित होते हैं ? 
(v) मनुष्य में संस्कार कब दब जाते हैं ? 
(vi) गद्यांश का उचित शीर्षक क्या होगा ? 
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प्रबंधक, जिला परिषद्, जयपुर की ओर से विभिन्न पदों पर नियुक्ति हेतु समाचार पत्र में एक विज्ञप्ति या विज्ञापन दीजिए।
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