Question 14 Marks
उछलते-कूदते एक दूसरे को धकियाते ये लोग गली में किसी दो महले मकान के सामने रुक जाते, पानी दे मैया, इंद्रसेना आई है। और जिन घरों में आखिर जेठ या शुरु आषाढ़ के उन सूखे दिनों में पानी की कमी भी होती थी, जिन घरों के कुएँ भी सूखे होते थे, उन घरों से भी सहेज कर रखे हुए पानी में से बाल्टी या घड़े भर-भर कर उन बच्चों को सर से पैर तक तर कर दिया जाता था। ये भीगे बदन मिट्टी में लोट लगाते थे, पानी फेंकने से पैदा हुए कीचड़ में लथपथ हो जाते थे। हाथ, पाँव, बदन, मुँह, पेट सब पर गंदा कीचड़ मल कर फिर हाँक लगाते 'बोल गंगा मैया की जय' और फिर मैडली बाँधकर उछलते-कूदते अगले घर की ओर चल पड़ते बादलों को टेरते, 'काले मेघा पानी दे।'
Answer
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