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गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या ।[6M]

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Question 14 Marks
उछलते-कूदते एक दूसरे को धकियाते ये लोग गली में किसी दो महले मकान के सामने रुक जाते, पानी दे मैया, इंद्रसेना आई है। और जिन घरों में आखिर जेठ या शुरु आषाढ़ के उन सूखे दिनों में पानी की कमी भी होती थी, जिन घरों के कुएँ भी सूखे होते थे, उन घरों से भी सहेज कर रखे हुए पानी में से बाल्टी या घड़े भर-भर कर उन बच्चों को सर से पैर तक तर कर दिया जाता था। ये भीगे बदन मि‌ट्टी में लोट लगाते थे, पानी फेंकने से पैदा हुए कीचड़ में लथपथ हो जाते थे। हाथ, पाँव, बदन, मुँह, पेट सब पर गंदा कीचड़ मल कर फिर हाँक लगाते 'बोल गंगा मैया की जय' और फिर मैडली बाँधकर उछलते-कूदते अगले घर की ओर चल पड़ते बादलों को टेरते, 'काले मेघा पानी दे।'
Answer
self
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Question 24 Marks
दिन भर के कार्य-भार से छुट्टी पाकर जब में कोई लेख या भाव को छंदबद्ध करने बैठती हूँ, तब छात्रावास की रोशनी बुझ चुकती है, मेरी हिरनी सोना तख्त के पैताने फर्श पर बैठकर पागुर करना बंद कर देती है. कुत्ता वसंत छोटी मचिया पर पंजों में मुँह रखकर आँखें मूंद लेता है और बिल्ली गोधूलि मेरे तकिए पर सिकुड़ कर सो रहती है। पर मुझे रात की निस्तब्धता में अकेली ने छोड़ने के विचार से कोने में दरी के आसन पर बैठकर बिजली की चकाचौंध से आँखें मिचमिचाती हुई भक्तिन, प्रशांत भाव से जागरण करती है। वह ऊँघती भी नहीं, क्योंकि मेरे सिर उठाते ही उसकी धुँधली दृष्टि मेरी आँखों का अनुसरण करने लगती है। यदि मैं सिरहाने रखे रैक की ओर देखती हूँ, तो वह उठकर आवश्यक पुस्तक का रंग पूछती है, यदि मैं कलम रख देती हूँ, तो वह स्याही उठा लाती है और यदि में कागज एक और सरका देती हूँ, तो वह दूसरी फाइल टटोलती है।
Answer
self
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