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Question 15 Marks
लोकतन्त्र में नागरिक गरिमा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer
लोकतन्त्र में नागरिक गरिमा का बहुत महत्त्व है। व्यक्ति की गरिमा के मामले में लोकतन्त्र किसी भी अन्य शासन प्रणाली से श्रेष्ठ है। यह निम्न प्रकार स्पष्ट है-
(1) महिलाओं की गरिमा व स्वतन्त्रता-दुनिया के अधिकांश समाज पुरुष-प्रधान समाज रहे हैं। लेकिन लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था ने महिलाओं के लिए समानता के अवसर प्रदान किये हैं। आज विश्व के अधिकांश लोकतन्त्र महिलाओं के साथ समानता का व्यवहार करते हैं तथा उन्हें सभी अधिकार प्रदान करते हैं। एक बार जब सिद्धान्त के रूप में महिलाओं के साथ समानता के व्यवहार को स्वीकार कर लिया गया है तो अब महिलाओं के लिए वैधानिक और नैतिक रूप से अपने प्रति गलत मान्यताओं और व्यवहारों के विरुद्ध संघर्ष करना आसान हो गया है। अलोकतान्त्रिक शासन व्यवस्थाओं में यह सब सम्भव न था क्योंकि वहाँ व्यक्तिगत स्वतन्त्रता एवं गरिमा को न तो वैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त है और न ही नैतिक रूप से।
(2) जातिगत समानता-भारत में कानून द्वारा जातिगत समानता की स्थापना की गई है। यहाँ लोकतान्त्रिक व्यवस्था ने कमजोर और भेदभाव की शिकार हुई जातियों के लोगों को समान दर्जे व समान अवसर के दावे को बल दिया है। यद्यपि आज भी जातिगत भेदभाव और दमन के उदाहरण देखने को मिलते हैं, लेकिन उनके पक्ष में कानूनी या नैतिक बल नहीं होता है। सम्भवतः इसी एहसास के चलते लोग अपने लोकतान्त्रिक अधिकारों के प्रति अधिक सतर्क हुए हैं।
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Question 25 Marks
भारत के सन्दर्भ में सामाजिक विविधता में सामंजस्य की विवेचना कीजिए।
Answer
भारत ने लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को अपनाया है। इसलिए भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था ने सामाजिक विविधता में सामंजस्य स्थापित करने में सफलता पाई है। यद्यपि कोई भी समाज अपने विभिन्न समूहों के बीच के टकरावों को पूरी तरह और स्थायी रूप से खत्म नहीं कर सकता, लेकिन भारत ने इन अन्तरों और विभेदों का आदर करना सीख लिया है। भारतीय संविधान में सभी नागरिकों को स्वतंत्रता व समानता का अधिकार, धर्मनिरपेक्ष शासन की व्यवस्था, संघवादी शासन व्यवस्था, अनुसूचित जातियों, जनजातियों तथा महिलाओं व अन्य पिछड़े वर्गों की आरक्षण की व्यवस्था, भाषायी आधार पर राज्यों का गठन आदि के माध्यम से भारत ने सामाजिक विविधता में सामंजस्य स्थापित किया है।
भारत में सरकार जनसामान्य की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है तथा यहाँ बहुमत, अल्पमत की राय की भी कद्र करता है। यद्यपि यहाँ बहुमत का शासन है, लेकिन बहुमत के शासन का अर्थ धर्म, नस्ल अथवा भाषायी आधार के बहुसंख्यक समूह का शासन नहीं होता। बहुमत के शासन का अर्थ है-हर फैसले या चुनाव में अलग-अलग लोग और समूह बहुमत का निर्माण कर सकते हैं। इसमें प्रत्येक नागरिक को किसी न किसी अवसर पर बहुमत का हिस्सा बनने का मौका मिलता है।
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Question 35 Marks
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के कार्यों पर प्रकाश डालिए।
Answer
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के कार्य लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के कार्यों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
1. प्रभावी और उपयोगी फैसले लेना-लोकतांत्रिक सरकारों में यद्यपि अलोकतांत्रिक सरकारों की तुलना में देर से निर्णय लिये जाते हैं क्योंकि उसे फैसले लेते वक्त विधायिका का सामना करना होता है; उसे बहुसंख्यक और अल्पसंख्यकों के दृष्टिकोणों को ध्यान में रखना पड़ता है । लेकिन इसमें जो निर्णय किये जाते हैं, लोग उन्हें स्वीकार करते हैं तथा वे अधिक प्रभावी होते हैं।
2. निर्णय कायदे-कानून के अनुसार तथा पारदर्शी एवं जवाबदेह कार्यप्रणाली-लोकतंत्र में इस बात की पक्की व्यवस्था होती है कि निर्णय कुछ कायदे-कानून के अनुसार होंगे। इसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता पाई जाती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी सरकार का गठन होता है जो कायदे-कानूनों को मानेगी और लोगों के प्रति जवाबदेह होगी। लोकतांत्रिक सरकार नागरिकों को निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने और खुद को उनके प्रति जवाबदेह बनाने वाली कार्यविधि भी विकसित कर लेती है।
3. नियमित और निष्पक्ष चुनाव तथा नए कानूनों पर खुली सार्वजनिक चर्चा-नियमित और निष्पक्ष चुनाव कराने और खुली सार्वजनिक चर्चा के लिए उपयुक्त स्थितियाँ बनाने के मामले में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ ज्यादा सफल हुई हैं।
4. सामाजिक विविधताओं में सामंजस्य की स्थापना-लोकतांत्रिक सरकारें आमतौर पर अपने अन्दर की प्रतिद्वन्द्विताओं को संभालने की प्रक्रिया विकसित कर लेती हैं। इससे इन सामाजिक विविधताओं में सामंजस्य बना रहता हैं।
5. व्यक्ति की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा-व्यक्ति की गरिमा और स्वतंत्रता के मामले में लोकतांत्रिक व्यवस्था अन्य शासन प्रणाली की तुलना में अधिक अच्छा कार्य करती है। साथ ही लोकतांत्रिक सरकारों ने स्त्रियों की गरिमा और समानता के व्यवहार को आगे बढ़ाया है।
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Question 45 Marks
लोग लोकतंत्र को क्यों अधिक पसन्द करते हैं? चार कारण देकर स्पष्ट कीजिए।
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Question 55 Marks
व्यक्ति की गरिमा और आजादी के प्रोत्साहन में लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी अन्य शासन प्रणाली से किस प्रकार अधिक श्रेष्ठ है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer
(1) व्यक्ति की गरिमा-लोकतंत्र हमेशा व्यक्ति की गरिमा को सम्मान देता है। लोकतंत्र में सिद्धान्त रूप में व्यक्ति की गरिमा को स्वीकार किया जाता है और जब एक बार किसी बात को सिद्धान्त रूप में स्वीकार कर लिया जाता है तो व्यवहार में उसे पाना अधिक आसान हो जाता है। अलोकतांत्रिक सरकारों में व्यक्ति की गरिमा न तो वैधानिक रूप से मान्य है और न नैतिक रूप से।
(2) व्यक्ति की आजादी-लोकतंत्र में सभी व्यक्तियों को राजनीतिक, व्यावसायिक, धार्मिक स्वतंत्रताएँ प्रदान की जाती हैं। भारत के संविधान में नागरिकों को ये स्वतंत्रताएँ प्रदान की गई हैं ताकि नागरिक अच्छा जीवन जी सकें। गैर-लोकतांत्रिक देशों में नागरिकों को ये स्वतंत्रताएँ नहीं दी जाती हैं; यदि दी जाती हैं तो केवल सैद्धान्तिक दृष्टि से, व्यवहार में वे नहीं मिलती हैं।
(3) उत्तरदायी सरकार-लोकतंत्र में सरकार अपने कार्यों के लिए जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। जनता सरकार आगामी चुनाव में बदल भी सकती है।
(4) क्रान्ति की सम्भावना का अभाव-लोकतंत्र में मत द्वारा बिना क्रान्ति के सरकार को बदला जा सकता है। इसलिए लोकंतत्र में सरकार को बदलने के लिए हिंसक क्रान्ति की आवश्यकता नहीं होती।
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Question 65 Marks
"शिकायतों को लोकतंत्र की सफलता का प्रमाण किस प्रकार माना जाता है?" चार तथ्यों की सहायता से स्पष्ट कीजिये।
Answer
शिकायतों को लोकतंत्र की सफलता का प्रमाण निम्न प्रकार माना जाता है-
लोकतन्त्र में अगर सरकार से किसी प्रकार की शिकायत की जाए तो इससे सरकार उस शिकायत को दूर करने का प्रयास करती है। इससे सरकार उत्तरदायी बनती है।
शिकायत करने से सरकार नागरिकों के कल्याण के प्रयास शुरू कर देती है जिससे लोकतंत्र सफल होता है।
शिकायतों का बने रहना भी लोकतंत्र की सफलता की गवाही देता है। इससे पता चलता है कि लोग सचेत हो गये हैं और वे सत्ता में बैठे लोगों के कामकाज का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने लगे हैं।
लोकतंत्र के कामकाज से लोगों का असंतोष जताना लोकतंत्र की सफलता को तो बताता है, साथ ही यह लोगों से प्रजा से नागरिक बनने की गवाही भी देता है।
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Question 75 Marks
लोकतंत्र और आर्थिक विकास के मध्य अन्तर्सम्बन्ध स्पष्ट करें।
Answer
लोकतंत्र और आर्थिक विकास के मध्य अन्तर्सम्बन्ध लोकतंत्र और आर्थिक विकास के मध्य अन्तर्सम्बन्ध निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है-
(1) आर्थिक संवृद्धि और लोकतंत्र-आर्थिक संवृद्धि के मामले में लोकतंत्र की तुलना में तानाशाही का रिकॉर्ड , थोड़ा बेहतर है। उच्चतर आर्थिक संवृद्धि हासिल करने में लोकतांत्रिक शासन की अक्षमता सामने आई है, लेकिन आर्थिक विकास (संवृद्धि) कई कारकों पर निर्भर करता है; जैसे-देश की जनसंख्या का आकार, वैश्विक स्थिति, अन्य देशों से सहयोग और देश द्वारा तय की गई प्राथमिकताओं आदि पर निर्भर करता है। दूसरे, कम विकसित देशों के बीच लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले देश आर्थिक विकास के मामले में तानाशाही देश से कहीं पिछड़े हैं।
(2) आर्थिक संवृद्धि और आर्थिक असमानता का बढ़ना-लोकतांत्रिक देशों में जब आर्थिक संवृद्धि होती है तो उसके साथ ही साथ आर्थिक असमानता भी बढ़ती जाती है। वास्तविक जीवन में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ आर्थिक असमानताएँ कम करने में सफल नहीं हो पाई हैं।
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Question 85 Marks
लोकतंत्र में आर्थिक समानता की अवधारणा की विवेचना कीजिए।
Answer
लोकतंत्र में आर्थिक समानता की अवधारणा लोकतांत्रिक व्यवस्था राजनीतिक समानता पर आधारित होती है। प्रतिनिधियों के चुनाव में हर व्यक्ति का वजन बराबर होता है, क्योंकि व्यक्तियों को राजनीतिक क्षेत्र में परस्पर बराबरी का दर्जा मिल जाता है, लेकिन लोकतंत्र में आर्थिक समानता की स्थापना नहीं हो पाती है।
लोकतंत्र में हम आर्थिक असमानता को बढ़ता हुआ पाते हैं। मुट्ठीभर धन-कुबेर आय और सम्पत्ति में अपने अनुपात से ज्यादा हिस्सा पाते हैं । देश की कुल आय में उनका हिस्सा बढ़ता गया है। समाज के सबसे निचले हिस्से के लोगों को जीवन बसर करने के लिए काफी कम साधन मिलते हैं। उनकी आमदनी गिरती गई है। कई बार उन्हें भोजन, कपड़ा, मकान, शिक्षा और इलाज जैसी बुनियादी जरूरतें पूरा करने में मुश्किल आती है।
वास्तविक जीवन में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ आर्थिक असमानताओं को कम करने में ज्यादा सफल नहीं रही हैं। दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे देशों में ऊपरी 20 फीसदी लोगों का ही कुल राष्ट्रीय आय के लगभग 60 फीसदी हिस्से पर कब्जा है जबकि नीचे के 20 फीसदी लोग राष्ट्रीय आय के मात्र 3 फीसदी हिस्से पर जीवन-बसर करते हैं। डेनमार्क और हंगरी जैसे देशों में भी ऊपर के 20% लोगों के पास राष्ट्रीय आय का लगभग 35% हिस्सा है, जबकि नीचे के 20% लोगों के पास 10% हिस्सा ही है।
लोकतंत्र में गरीब वर्ग के आगे हमेशा अवसरों की असमानता बरकरार रहती है।
अतः आय के समान वितरण और आर्थिक प्रगति के आधार पर देखें तो लोकतंत्र में आर्थिक समानता की स्थिति अच्छी नहीं रही है। वह आर्थिक असमानताओं को कम करने में अधिक सफल नहीं रहा है। आर्थिक संवृद्धि का काम सबको बराबर नहीं मिलता है।
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