निम्नलिखित समीकरणों को पूरा कीजिए-
i. $H _2(g)+ M _{ m } O _0(s) \xrightarrow{\Delta}$
ii. $CO ( g )+ H _2(g) \xrightarrow]{\Delta}$ उत्पेरक
iii. $C _3 H _8(g)+3 H _2 O ( g ) \xrightarrow{\Delta}$ उत्पेरक
iv. $Zn ( s )+ NaOH ( aq ) \xrightarrow{}$ ताप
जब ऐलुमिनियम (III) क्लोराइड एवं पोटैशियम क्लोराइड को अलग-अलग (i) सामान्य जल, (ii) अम्लीय जल एवं (iii) क्षारीय जल से अभिकृत कराया जाता है, तो आप किन-किन विभिन्न उत्पादों की आशा करेंगे? जहाँ आवश्यक हो, वहाँ रासायनिक समीकरण दीजिए।
परमाणु क्रमांक 15, 19, 23 तथा 44 वाले तत्व यदि डाइहाइड्रोजन से अभिक्रिया कर हाइड्राइड बनाते हैं, तो उनकी प्रकृति से आप क्या आशा करेंगे? जल के प्रति इनके व्यवहार की तुलना कीजिए।
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए-
i. PbS (s) $+ H _2 O _2$ (aq) $\longrightarrow$
ii. $MnO _4^{-}( aq )+ H _2 O _2( aq ) \longrightarrow$
iii. $CaO ( s )+ H _2 O ( g ) \longrightarrow$
iv. $AlCl _3(g)+ H _2 O ( l ) \longrightarrow$
v. $Ca _3 N_2(s)+ H _2 O ( l ) \longrightarrow$
निम्नलिखित को व्यवस्थित कीजिए-
i. $CaH _2$, BeH 2 , तथा $TiH _2$ को उनकी बढ़ती हुई विद्युतचालकता के क्रम में।
ii. $LHH , NaH$ तथा CsH को आयनिक गुण के बढ़ते हुए क्रम में।
iii. H-H, D-D तथा F-F को उनके बंध-वियोजन एन्थैल्पी के बढ़ते हुए क्रम में।
iv. $NaH , MgH _2$ तथा $H _2 O$ को बढ़ते हुए अपचायक गुण के क्रम में।
क्या आप आशा करते हैं कि $\left( C _n H _{2 n+2}\right)$ कार्बनिक हाइड्राइड्स लुईस अम्ल या क्षार की भाँति कार्य करेंगे? अपने उत्तर को युक्तिसंगत ठहराइए।
(a) कठोर तथा मृदु जल क्या होता है? समझाइये।
(b) कठोर जल साबुन के साथ अवक्षेप क्यों देता है?
Answer
(a) कठोर जल - वह जल जिसमें विलेयशील कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण कार्बोनेट क्लोराइड तथा सल्फेट के रूप में उपस्थित होते हैं, उसे कठोर जल कहते हैं। यह साबुन के साथ आसानी से झाग नहीं देता है। मृदु जल वह होता है जिसमें विलेयशील कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण नहीं होते। मृदु जल साबुन के साथ आसानी से झाग दे देता है।
(b) कठोर जल साबुन के साथ अवक्षेप देता है क्योंकि साबुन में उपस्थित सोडियम स्टीयरेट $\left( C _{17} H _{35} COONa \right)$ कठोर जल से क्रिया करके $Ca$ या $Mg$ स्टीयरेट का अवक्षेप बना देता है।
$ 2 C _{17} H _{35} COONa ( aq )+ M ^{2+}( aq ) \rightarrow\left( C _{17} H _{35} COO \right) 2 M +$
$\left( C _{17} H _{35} COO \right) 2 M \downarrow$
$M = Ca / Mg $
परम्यूटिट विधि द्वारा जल की स्थायी कठोरता को किस प्रकार दूर किया जाता है? संक्षेप में समझाइए।
Answer
परम्यूटिट विधि या आयन विनिमय विधि द्वारा (By Permutit Method or Ion Exchange Method): परम्यूटिट या जियोलाइट एक जलयुक्त सोडियम ऐलुमिनियम सिलिकेट ( $NaAlSiO _4 \cdot 3 H _2 O$ या $\left.Na _2 Al _2 Si _2 O _8 \cdot 6 H _2 O \right)$ है तथा इसका संकेत $Na _2$ है। यह जल की कठोरता उत्पत्र करने वाले आयनों को बाँध लेता है जिससे जल मृदु हो जाता है। इसमें निम्नलिखित धनायन विनिमय अभिक्रिया होती है:
$
Na _2 Al _2 Si _2 O _6 H _2 O + Mg ^{2+} \rightarrow MgAl _2 Si _2 O _6 H _2 O +2 Na ^{+}
$
या
$2 NaZ ( s )+ M ^{2+}( aq ) \rightarrow MZ _2( s )+2 Na ^{+}( aq )$
$M =( Mg , Ca )$
जब परम्यूटिट में उपस्थित सोडियम आयन पूर्ण रूप से समाप्त हो जाते हैं तब
जलीय सान्द्र (5 - 10\%) NaCl विलयन द्वारा उपचारित करके इसको पुनर्जनित (Regenerate) कर लिया जाता है।
$
MZ _2( s )+2 NaCl ( aq ) \rightarrow 2 NaZ ( s )+ MCl _2( aq )
$
विधि: कठोर जल को एक स्तम्भ में निक्षेपित परम्यूटिट की परतों पर से प्रवाहित किया जाता है जिससे उसमें उपस्थित कैल्सियम तथा मैग्रीशियम लवण परम्यूटिट से क्रिया करके सोडियम लवण व कैल्सियम तथा मैग्रीशियम के परम्यूटिट बना देते हैं इससे जल की कठोरता दूर हो जाती है।
जल की अस्थायी कठोरता को दूर करने की विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer
(i) उबालकर (By Boiling): जब जल को उबाला जाता है। तो $Mg \left( HCO _3\right)_2$ तथा $Ca \left( HCO _3\right)_2$ जैसे विलेयशील लवण, अविलेय $Mg ( OH )_2$ तथा $CaCO _3$ के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं। $MgCO _3$ की तुलना में $Mg ( OH )_2$ का विलेयता गुणनफल अधिक होता है अतः $Mg ( OH )_2$ अवक्षेप दे देता है। इसे छानकर पृथक् कर देते हैं तथा यह छनित ही मृदु जल होता है।
(ii) क्लार्क विधि (By Clarks Method): क्लार्क विधि में बुझे हुए चूने की परिकलित मात्रा को अस्थायी कठोरता युक्त जल में मिलाकर कुछ समय तक रखते हैं तथा इसे छान लेते हैं। ऐसा करने पर विलेय लवण, अविलेय लवणों में परिवर्तित हो जाते हैं तथा जल की कठोरता दूर हो जाती है। अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार से होती हैं:
भारी जल की निम्नलिखित के साथ अभिक्रिया के समीकरण लिखिए: (i) $Al _4 C _3$
(ii) $SO _3$
(iii) $CaC _2$
Answer
(i) $Al _4 C _3+12 D _2 O \rightarrow 4 Al ( OD )_3+3 CD _4$
(ii) $SO _3+ D _2 O \rightarrow D _2 SO _4$
(iii) $CaC _2+2 D _2 O \rightarrow C _2 D _2+ Ca ( OD )_2$
X-किरण अध्ययन से ज्ञात होता है कि बर्फ के क्रिस्टल में प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं से चतुष्फलकीय रूप से घिरा होता है। हाइड्रोजन बंध के कारण बर्फ की संरचना खुले हुए पिंजरे के समान होती है जिसमें बड़े छिद्र होते हैं, इसी कारण बर्फ का घनत्व जल से कम होता है तथा यह जल की सतह पर तैरती है। अतः बर्फ की एक सुव्यवस्थित, रंध्रयुक्त, त्रिविमीय हाइड्रोजन बंधित संरचना होती है।
अधिक विद्युतधनी प्रकृति के तत्त्व (क्षार धातु, क्षारीय मृदा धातु तथा La) हाइड्रोजन के साथ मिलकर रससमीकरणमितीय हाइड्राइड बनाते हैं, इन्हें लवणीय हाइड्राइड कहते हैं। इस प्रकार के हाइड्राइडों में मुख्यतः आयनिक गुण होता है अतः इन्हें आयनिक हाइड्राइड भी कहा जाता है । यद्यपि कुछ हाइड्राइडों $\left( LiH , BeH _2\right.$ तथा $MgH _2$ ) में थोड़ा सहसंयोजी गुण भी पाया जाता है। वास्तव में $LiH , BeH _2$ तथा $MgH _2$ बहुलकों के रूप में पाए जाते हैं। आयनिक हाइड्राइडों में हाइड्रोजन, $H$ के रूप में पायी जाती है।
सामान्यतः धातु तथा हाइड्रोजन की सीधे अभिक्रिया द्वारा आयनिक हाइड्राइड बनते हैं। जैसे
हाइड्रोजन की धातुओं, धातु आयनों तथा धातु ऑक्साइडों के साथ अभिक्रिया लिखिए।
Answer
(i) हाइड्रोजन धातुओं से क्रिया करके, संगत धातु हाइड्राइड बनाती है:
$ H _2( g )+2 K ( g ) \rightarrow 2 K ^{+} H ^{-}( s ) $
(ii) हाइड्रोजन, कुछ धातु आयनों के जलीय विलयन या उनके धातु ऑक्साइड (Fe से कम क्रियाशील) से क्रिया करके उन्हें धातुओं में अपचयित कर देती है।
$ H _2( g )+ Pd ^{2+}( aq ) \rightarrow Pd ( s )+2 H ^{+}( aq )$
$H _2( g )+ CuO ( s ) \rightarrow Cu ( s )+ H _2 O ( l ) $
ब्राइन विलयन के विद्युत अपघटन से हाइड्रोजन सहउत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। इस प्रक्रम में प्रयुक्त अभिक्रियाएँ लिखिए।
Answer
ब्राइन विलयन $( NaCl )$ के विद्युत अपघटन द्वारा $NaOH$ तथा $Cl _2$ का औद्योगिक उत्पादन किया जाता है। इसमें हाइड्रोजन भी सहउत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। विद्युत अपघटन में होने वाली अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं:
एनोड पर:
$2 Cl ^{-}( aq ) \rightarrow Cl _2( g )+2 e ^{-}$
कैथोड पर:
$
2 H _2 O ( l )+2 e ^{-} \rightarrow H _2( g )+2 OH ( aq )
$
कुल अभिक्रिया इस प्रकार होती है:
$
2 Na ^{+}( aq )+2 Cl ^{-}( aq )+2 H _2 O ( l ) \rightarrow Cl _2( g )+ H _2( g )+2 Na ^{+}( aq )+2 OH ^{-}
$
(aq)
आयनिक यौगिकों के लिए जल एक आदर्श विलायक होता है। क्यों?
Answer
जल में ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन के मध्य विद्युत ऋणता में अन्तर अधिक होने के कारण इसमें ध्रुवता पायी जाती है। परिणामस्वरूप यह उच्च परावैद्युत स्थिरांक (६ = 78.4) रखता है अतः यह आयनिक यौगिकों के लिए एक आदर्श विलायक का कार्य करता है।