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काव्यांजलि - 5 महाकवि भूषणे question types

13 questions across 4 question groups — pick any mix to generate a Hindi [NON NCERT] paper with step-by-step answer keys.

13
Questions
4
Question groups
5
Question types
Sample Questions

काव्यांजलि - 5 महाकवि भूषणे questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

इतिवृत्तांत्मकता की प्रधानता’ किस युग की मुख्य विशेषता थी ?
  • A
    छायावाद काल
  • द्विवेदी युग
  • C
    भारतेन्दु युग
  • D
    प्रगति काल

Answer: B.

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इतिवृत्तात्मकता की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप किस वाद का प्रादुर्भाव हुआ ?
  • A
    मानववाद
  • छायावाद
  • C
    प्रगतिवाद
  • D
    प्रयोगवाद

Answer: B.

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आधुनिक युग की मीरा हैं
  • महादेवी वर्मा
  • B
    सुभद्राकुमारी चौहान
  • C
    सुमित्रा कुमारी सिन्हा
  • D
    इनमें से कोई नहीं

Answer: A.

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‘कवितावर्धिनी’ साहित्यिक संस्था की स्थापना की थी–
  • A
    जर्यशंकर प्रसाद ने
  • B
    महावीरप्रसाद द्विवेदी ने
  • C
    महादेवी वर्मा ने
  • भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने

Answer: D.

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भुज भुजगेस की वै संगिनी भुजंगिनी-सी,
खेदि खेदि खाती दीह दारुन दलन के ।
बखतर पाखरन बीच धेसि जाति मीन,
पैरि पार जात परवाह ज्यों जलन के ।।
रैयाराव चंपति, के छन्नसाले महाराज,
भूषन सकै करि बखान को बलन के ।
पच्छी पर छीने ऐसे परे पर छीने वीर,
तेरी बरछी ने बर छीने हैं खलन के ।।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) छत्रसाल की भुजा और बरछी को किसके समान बताया गया है?
(iv) छत्रसाल की बरछी ने किनको बलहीन कर दिया है?
(v) उपर्युक्त पंक्तियाँ किस रस का अनुपम उदाहरण हैं?
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बाने फहराने घहराने घंटा गजन के,
नाहीं ठहराने राव राने देस देस के ।।
नग भहराने ग्राम नगर पराने सुनि, ।
बाजत निसाने सिवराजजू नरेस के ।।
हाथिन के हौदा उकसाने कुंभ कुंजर के,
भौन को भजाने अलि छूटे लट केस के ।
दल के दरारन ते कमठ करारे फूटे,
केरा के से पात बिहराने फन सेस के ।।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइट।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) शिवाजी की सेना के नगाड़ों को क्या प्रभाव दिखाई पड़ता है?
(iv) बालों की लटों के समान क्या प्रतीत होते हैं?
(v) किस कारण शेषनाग के फल केले के पत्तों जैसे चिर गए हैं?
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साजि चतुरंग सैन अंग में उमंग धारि,
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं।
भूषन भनत नाद बिहद नगारन के,
नदी नद मद गैबरन के रलते हैं ।।
ऐलफैल खेलभैल खलक में गैलगैल,
गजन की वैल पैल सैल उसलत हैं ।।
तारा सो तरनि धूरि धारा में लगत जिमि,
थारा पर पारा पारावार यों हलत हैं।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) "सरजा' की उपाधि से कौन सुशोभित थे?
(iv) शिवाजी की सेना कहाँ के लिए प्रयाण करती है?
(v) सूर्य तारे के समान क्यों दिखायी देने लगता है?
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