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BOARD SAMPLE PAPER question types

50 questions across 13 question groups — pick any mix to generate a Hindi [NON NCERT] paper with step-by-step answer keys.

50
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Sample Questions

BOARD SAMPLE PAPER questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

दामी पिजरे की देख-रेख में राजा के भानजे बहुत व्यस्त रहने लगे। इतने व्यस्त कि व्यस्तता की कोई सीमा न रही। मरम्मत के काम भी लगे ही रहते। फिर झाड़-पोंछ और पालिश की धूम भी मची ही रहती थी। जो भी देखत्ता, यही कहती कि "उन्नति हो रही है।" इन कामों में अनेक लोग लगवाएँ गए। सब महीने -महीने मोटे-मोटे वेतन ले लेकर बड़े-बड़े सन्दूक भरने लगे।
(अ) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) किसी उन्नति होने की बात कही जा रही थी तथा कैसे ? स्पष्ट कीजिए।
(स) पिंजरे की देख-रेख में कौन व्यस्त रहते थे ?
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यदि हम वैद्य होते तो कफ और पित के सहवर्ती बात की व्याख्या करते तो भूगोलवेता होते तो किसी देश के जलबात का वर्णन करते, किन्तु दोनों विषयों में से हमें एक बात कहने का भी प्रयोजन नहीं है। हम तो केवल उसी बात के ऊपर दो-चार बातें लिखते हैं, जो हमारे तुम्हारे संभाषण के समय मुख से निकल-निकल के परस्पर हृदयस्थ भाव को प्रकाशित करती रहती है।
(अ) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ अथवा पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक क्या कहना चाहता है?
(स) यदि लेखक वैद्य होता एवं भूगोलवेता होता तो वह क्या करता ?
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सतगुर हम सूँ रीझि करि, एक कह्य प्रसंग।
बरस्या बादल प्रेम का, भीजि गया सब अंग ।।
(अ) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ अथवा शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।
(ब) क्या सुनकर कवि के हृदय में सच्चा प्रेम उत्पन्न हो गया ?
(स) 'बरस्या बादल' में कौन-सा अलंकार है?
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प्रभु जी तुम चन्दन हम पानी। जाकी अंग-अंग बास समानी ।।
प्रभु जी तुम घन वन हम मोरा। जैसे चितवत चंद चकोरा ।।
प्रभु जी तुम दीपक हम बाती। जाकी जोति बरै दिन राती ।।
प्रभु जी तुम मोती हम धागा। जैसे सोनहिं मिलत सोहागा ।।
प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा। ऐसी भक्ति करै रैदासा ।।
(अ) राती, सोनहिं, मोती शब्द के तत्सम रूप लिखिए।
(ब) "जैसे चितवन चंद चकोरा में कौन-सा अलंकार है?
(स) 'जाकी जोति बरै दिन राती' का आशय स्पष्ट कीजिए।
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सतां सज्जनाम् आचारः सदाचारः। ये जनाः सद् एव विचारयन्ति, सद् एवं वदन्ति, सद् एव आचरन्ति च, ते एव सज्जनाः भवन्ति, सज्जनाः यथा आचरन्ति तथैवाचरणं सदाचारः भवति। सदाचारणेव सज्जनाः स्वकीयानि इन्द्रियाणि वशे कृत्वा सर्वे: सह शिष्ट व्यवहारं कुर्वन्ति ।
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विश्वविश्रुतः स्वामी विवेकानन्द अस्यैव महाभागस्य शिष्यः आसीत्। तेन न केवलं भारतवर्षे अपितु पाश्चात्य देशेष्वपि व्यापकस्य मानवधर्मस्य डिण्डिमघोषः कृतः । तेन अन्येश्रृ शिष्यै जनानां कल्याणार्थं स स्थाने-स्थाने रामकृष्णसेवाश्रमाः स्थापितः। ईश्रृरानुभवः दुःखितानां जनानां सेवया पुष्यति, इति रामकृष्णस्य महान सन्देशः ।
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अपने प्रधानाचार्य को सम्बोधित करते हुए एक प्रार्थना-पत्र लिखिए जिसमें अस्वस्थ होने के कारण एक दिन का आकस्मिक अवकाश माँगा गया हो।
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