

रामनगर को मिला स्वच्छ-ग्राम का पुरस्कार
रामनगर में कूड़ा-करकट जमा करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। लोग अकसर अपने घरों का कूड़ा-करकट बाहर फेंक दिया करते थे। एक बार बहुत बरसात हुई। गाँव में पानी जमा हो गया। कूड़ा- करकट सड़ने से गाँव में हैजा और मलेरिया की बीमारी फैल गई। इससे कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
पानी उतरा तो लोगों को गाँव की सफाई का ध्यान आया। सफाई के लिए गाँव के युवक आगे आए। देखते-देखते गाँव का सारा कूड़ा-करकट साफ हो गया। जगह-जगह कूड़ेदान रखवा दिए गए। गाँव के बाहर कूड़ा जमा करने का स्थान निश्चित कर दिया गया।
रामनगर गाँव की स्वच्छता की चारों ओर चर्चा होने लगी। धीरे-धीरे जिले के स्वास्थ्य अधिकारी तक बात पहुँची। उन्होंने गाँव के युवकों का सम्मान किया। गाँव को 'स्वच्छ ग्राम' पुरस्कार भी मिला। रामनगर के युवकों ने अब दूसरे गाँवों की सफाई का भी बीड़ा उठा लिया है। वे गाँववालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। अब एक के बाद एक गाँव रामनगर होते जा रहे हैं।
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