Question
अस्पताल में एक घंटा

Answer

पिछले सप्ताह मेरा प्रिय मित्र मोटर दुर्घटना में घायल हो गया था। उसे पुणे के सरदार पटेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार को में उसे देखने अस्पताल गया था। अस्पताल में मरीजों से मिलने का समय शाम के चार से छह बजे का था। मैं उसके लिए अपने साथ कुछ फल भी ले गया था।
सरदार पटेल अस्पताल की इमारत विशाल और स्वच्छ थी। प्रवेश द्वार के सामने ही पूछताछ-कक्ष से जानकारी प्राप्त करके मैं अपने मित्र के कमरे में पहुँचा। कमरे में प्रकाश और हवा की समुचित व्यवस्था थी। सौभाग्य से मेरे मित्र को गंभीर चोट नहीं आई थी। मैंने उससे कुछ देर बातें कीं। उसे साथ लाए हुए फल दिए। उसके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर मैं कमरे से बाहर आ गया।
अस्पताल में भिन्न-भिन्न प्रकार के कई वॉर्ड थे। एक वॉर्ड में दुर्घटना में घायल लोगों का उपचार किया जा रहा था। दूसरे वॉर्ड में अग्निकांड में जले हुए मरीजों को रखा गया था। एक बड़े-से वॉर्ड में भिन्न-भिन्न प्रकार के मरीज थे। किसी को ऑक्सीजन दिया जा रहा था। किसी को ग्लूकोज, तो किसी को खून चढ़ाया जा रहा था। वहाँ मरीजों की दशा देखकर मेरा दिल भर आया।
डॉक्टरों और परिचारिकाओं की दौड़-धूप देखते ही बनती थी। उनके चेहरों पर कर्तव्य-पालन और सेवा के भाव थे। श्वेत गणवेशधारी परिचारिकाएँ तो साक्षात् दया की देवियाँ लग रही थीं।
ऑपरेशन थियेटर के बाहर मरीजों के संबंधियों की काफी भीड़ थी। सभी खामोश थे। वे अपने सगे-संबंधियों को ऑपरेशन के बाद थिएटर से सकुशल बाहर आने की राह देख रहे थे। अस्पताल में देखे हुए दृश्यों पर विचार करते-करते उदास मन से मैं बाहर निकल आया।

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