(1) जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि के कारण प्रदूषण तेज गति से बढ़ रहा है।
(2) प्रदूषकों की बढ़ती सघनता के परिणामस्वरूप कुछ पदार्थों की सान्द्रता बढ़ने से पारिस्थितिक तंत्र पर विषैले प्रभाव पड़ रहे हैं।
(3) एक करोड़ दस लाख ज्ञात रसायनों में से लगभग 60,000-70,000 रसायन नियमित प्रयोग में आते हैं।
(4) पर्यावरण को विषाक्त करने वाले इन रसायनों के प्रभाव का आंकड़ा धीमा है परन्तु फिर भी कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनसे सिद्ध होता है कि भारी धातु, उपधातु, कीटनाशक, कपड़े, धोने वाले साबुन, डिटर्जेन्ट, गंध, पॉलीक्लोरीन युक्त यौगिक तथा अग्निशामक रसायन जल स्रोतों से मिलकर उनको विषाक्त बना रहे हैं।