औपचारिक संगठन का अर्थऔपचारिक संगठन से आशय एक ऐसे संगठन से है जिसके प्रत्येक स्तर के प्रबन्धकों के अधिकारों, कर्त्तव्यों एवं दायित्वों की स्पष्ट सीमा होती है। ऐसे संगठनों में अधिकारों का अन्तरण होता है तथा संगठन संरचना संस्था के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए की जाती है। दूसरे शब्दों में, औपचारिक संगठन से तात्पर्य किसी विशिष्ट कार्य को पूरा करने के लिए प्रबन्धकों द्वारा तैयार किये गये ढाँचे से है। यह अधिकार तथा उत्तरदायित्व की सीमाओं का स्पष्टीकरण करता है तथा संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु विभिन्न क्रियाओं में सामंजस्य स्थापित करता है। औपचारिक संगठन में ढाँचा कार्यात्मक अथवा प्रभागीय कोई भी हो सकता है।
लुईस ए. ऐलन के अनुसार, "औपचारिक संगठन, कार्यों की समुचित ढंग से परिभाषित पद्धति है जिसमें प्रत्येक के अधिकार, उत्तरदायित्व तथा जवाबदेही की निश्चित परिमाप होती है।"
चेस्टर आई. बर्नार्ड के अनुसार, "जब दो या दो से अधिक व्यक्तियों की क्रियाएँ समान उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जानबूझकर समन्वित की जाती हैं तो उसे औपचारिक संगठन कहते हैं।"
इस प्रकार स्पष्ट है कि औपचारिक संगठन में सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के आपसी सम्बन्धों तथा उनकी क्रियाओं का निर्धारण संगठन संरचना के आधार पर किया जाता है। संगठन में ऊपर से नीचे की ओर अधिकारों का प्रत्यायोजन किया जाता है और उपकरण के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए संगठित प्रयास किये जाते हैं।
औपचारिक संगठन के लाभ-औपचारिक संगठन के दो लाभ निम्नलिखित हैं-
1. उत्तरदायित्व निर्धारित करना आसानऔपचारिक संगठन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के उत्तरदायित्व निर्धारित करना आसान होता है, क्योंकि इस प्रकार के संगठनों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आपसी सम्बन्ध स्पष्ट रूप से समझाये हुए रहते हैं।
2. भ्रम की स्थिति नहीं-औपचारिक संगठनों का एक लाभ यह है कि इस प्रकार के संगठनों में प्रत्येक अधिकारी व कर्मचारी के अधिकार एवं कर्त्तव्य स्पष्ट किये हुए रहते हैं तथा उनके बीच आपसी सम्बन्ध भी स्पष्ट होते हैं कि वे किससे आदेश प्राप्त करेंगे और किसको आदेश देंगे। अतः ऐसे संगठनों में भ्रम की स्थिति नहीं रहती है।