Question
बढ़ते वाहन : घटता जीवन - धन ### वाहन - वृद्धि से स्वास्थ्य - हानि।

Answer

1. प्रस्तावना - मानव - सभ्यता का प्रगति - रथ पहले बैलगाड़ी, रथ, इक्का - ताँगा, बग्घी से आगे बढ़ा, तो फिर पालकी, रिक्शा आदि के रूप में चला। लेकिन यान्त्रिक युग के आते ही नये - नये द्रुतगामी वाहनों का निर्माण हुआ। आज तो स्कूटर, मोटर - साइकिल, कार, बस आदि अनेक तरह के द्रुतगामी यान्त्रिक वाहनों का निर्माण मानव - प्रगति की कथा बता रहे हैं। अब ऐसे लाखों वाहनों की रेल - पेल से सड़कों पर पैदल चलने की जगह नहीं रह गयी है। 

2. वाहन - वृद्धि के कारण - जनता के आवागमन एवं परिवहन को. सुविधायुक्त तथा द्रुतगामी बनाने के लिए यान्त्रिक वाहनों का आविष्कार हुआ। पहले स्कूटर के साथ कार और मोटर - वाहनों का निर्माण हुआ, फिर आवश्यकतानुसार ऑटोरिक्शा, मध्यम एवं भारी मालवाहक वाहनों का निर्माण हुआ। वस्तुतः जनसंख्या की वृद्धि एवं माँग के अनुपात से यान्त्रिक वाहनों का उत्पादन बढ़ा। इस तरह यान्त्रिक युग के विकास से तथा मानव की सुख सुविधाओं की दृष्टि से यान्त्रिक वाहनों की असीमित वृद्धि हो रही है। 

3. वाहन - वृद्धि से लाभ - वाहन - वृद्धि से आवागमन की सुविधा बढ़ी है। जो मार्ग पहले आठ - दस दिनों में चलने पर तय होता था, वह अब कुछ घण्टों में पार हो जाता है। माल ढोने के वाहनों की वृद्धि से अनाज या अन्य उत्पादन शीघ्रता से ढोया जाता है। अब दूर - दूर के स्थानों की यात्रा सुगम और सुविधाजनक हो गयी है। लोगों के पास छोटे - बड़े निजी वाहन होने से उन्हें दूसरों का मुँह नहीं ताकना पड़ता है। इससे जनता के समय, धन और श्रम की बचत हो रही है तथा वाहन निर्माण करने वाले उद्योगों में हजारों - लाखों लोगों को रोजगार मिल रह विकास में वाहन - वृद्धि से अनेक लाभ हैं।

4. बढ़ते वाहनों का कुप्रभाव - यान्त्रिक वाहनों के संचालन में पेट्रोल - डीजल का उपयोग होता है। इससे वाहनों द्वारा विषैली कार्बन - गैस छोड़ी जाती है, जिससे हृदय रोग, मस्तिष्क एवं चर्मरोग, श्वास - दमा रोग, तपैदिक, कैंसर आदि घातक रोग फैल रहे हैं। इनसे आम जनता की स्वास्थ्य - हानि हो रही है, उनका जीवन - काल घट रहा है। वाहनों की वृद्धि से सड़कों पर भीड़भाड़ रहती है, अनेक भयानक दुर्घटनाएँ घटित होती हैं और जिन्दगी अशान्त लगती है। पेट्रोल - डीजल की अधिक खपत से महंगाई बढ़ रही है, जिसका असर सभी पर पड़ता है। अब ऋण लेकर वाहन खरीदने की होड़ बढ़ रही है, जिससे ऋणग्रस्तता एवं मुद्रास्फीति देखने को मिल रही है। इस तरह बढ़ते वाहनों से लाभ के साथ ही हानि भी हो रही है। 

5. उपसंहार - यान्त्रिक वाहनों का विकास भले ही मानव - सभ्यता की प्रगति अथवा देशों के औद्योगिक विकास का परिचायक है, तथापि इनकी असीमित वृद्धि से मानव - जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जयपुर जैसे महानगरों में तो कई मार्ग ऐसे हैं जिन पर चलने से जीवन - हानि का भय बना रहता है। अतएव वाहनों की वृद्धि उसी अनुपात में अपेक्षित है, जिससे मानव - स्वास्थ्य पर बुरा असर न पड़े तथा यान्त्रिक प्रगति भी बाधित न हो।

Need a full question paper?

Generate a complete, print-ready paper with questions like this in minutes — across 16+ boards, with answer keys.

Start Generating Free

Similar questions

शिक्षा - सुधार में विद्यार्थियों की भूमिका
महँगाई : समस्या और समाधान ### बढ़ती महँगाई : घटता जीवन स्तर ### मूल्यवृद्धि की समस्या ### बढ़ती महँगाई में प्रदर्शन की होड़ ### महँगाई के कारण और निदान
मानव के लिए विज्ञान : वरदान या अभिशाप
शिक्षित नारी : सुख - समृद्धिकारी ### नारी - शिक्षा का महत्त्व ### नारी सशक्तीकरण
भ्रष्टाचार का महादानव . ### बढ़ता भ्रष्टाचार : गिरती नैतिकता ###  भ्रष्टाचार : कारण व निवारण ### भ्रष्टाचार : एक विकराल समस्या
राष्ट्र के प्रति हमारा नैतिक दायित्व
प्लास्टिक थैली : पर्यावरण की दुश्मन ### प्लास्टिक थैली : अल्प लाभ - दीर्घकालीन हानि ### प्लास्टिक कैरी बैग्स : असाध्य रोगवर्धक
मतदाता जागरण अभियान
मानवता के लिए चुनौती - कन्या - भ्रूण - हत्या ### कन्या - भ्रूण हत्या : मानवता पर एक कलंक  ### कन्या - भ्रूण हत्या : लिंगभेद का अपराध।
समाचार पत्र