भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसलिए कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। लगभग दो तिहाई जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है। जहाँ विश्व की 11% प्रतिशत भूमि कृषि योग्य है, वहीं भारत की कुल भूमि का 51% भाग कृषि योग्य है । ‘कृषि’ भारत के कुल राष्ट्रीय आय का लगभग 35% योगदान करता है। भारत के पास विशाल स्थल क्षेत्र, उपजाऊ भूमि का उच्च प्रतिशत है।
भारत में कृषि जीवन की रीढ़ है । भारत में कृषि परम्परागत ढंग से होती रही । अतः स्वतंत्रता की प्राप्ति के बाद इस पहलू पर विचार किया गया कि समग्र आर्थिक विकास के साथ-साथ कृषि का विकास होना आवश्यक है । भूव्यवस्था में परिवर्तन, सिंचाई के साधनों आदि में विकास से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है।
1960 के दशक में भारत सरकार ने ‘हरित क्रान्ति’ को लाया। इसके कारण खाद्यान उत्पादन में आशातीत बढ़ोत्तरी हुई । यहाँ से कृषि में उच्च तकनीकी एवं वैज्ञानिक पद्धति का प्रवेश होता है। पादप-संकरण द्वारा उच्च प्रकार के बीजों के किस्मों का विकास किया गया । उर्वरक, पीड़क, नाशी, खरफतवार नाशी के प्रयोग एवं बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं के द्वारा सिंचाई में विकास तथा आधुनिक यंत्रों द्वारा कृषि कार्य के कारण कृषि एक व्यवसाय के रूप में विकसित हुआ है।
कृषि की प्रधानता होने के कारण ही भारत सरकार बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं में कृषि पर अधिक बल दिया गया और दिया जा रहा है।