भारत की जनसंख्या की प्रमुख विशेषताओं को निम्न बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) आयु संरचना-किसी देश में, जनसंख्या की आयु संरचना वहाँ की जनसंख्या की मूल विशेषताओं में से एक है। यह विभिन्न आयु समूहों के लोगों की संख्या को बताता है।
आय संरचना की दष्टि से भारत की आबादी को निम्न तीन भागों में बाँटा गया है
(i) बच्चे ( सामान्यतः 15 वर्ष से कम)-ये आर्थिक रूप से उत्पादनशील नहीं होते हैं तथा इनको भोजन, वस्त्र एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की आवश्यकता होती है। भारत की कुल जनसंख्या में इनका भाग लगभग एक-तिहाई है।
(ii) वयस्क ( 15 से 59 वर्ष)-ये आर्थिक रूप से उत्पादनशील तथा जैविक रूप से प्रजननशील होते हैं। यह जनसंख्या का कार्यशील वर्ग है। भारत में ये कुल जनसंख्या के आधे से अधिक हैं।
(iii) वृद्ध ( 59 वर्ष से अधिक)-ये आर्थिक रूप से उत्पादनशील या अवकाश प्राप्त हो सकते हैं। ये स्वैच्छिक रूप से कार्य कर सकते हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया के द्वारा इनकी नियुक्ति नहीं होती है। कुल जनसंख्या का लगभग 7% इस वर्ग में आता है।
(2) लिंग अनुपात-प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को लिंग अनुपात कहा जाता है। लिंगानुपात समाज में पुरुषों एवं महिलाओं के बीच समानता की सीमा मापने के लिए एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक सूचक है।
सन् 2001 में भारत में लिंगानुपात 933 था जो 2011 में बढ़कर 943 हो गया। पूरे देश में इसमें भिन्नता पाई जाती है। 2011 में केरल में प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 1,084 है, पुडुच्चेरी में प्रति 1,000 पर 1,038 है, जबकि दिल्ली में प्रति 1,000 पर 866 तथा हरियाणा में प्रति 1,000 पर केवल 877 है।
(3) साक्षरता-साक्षरता की दृष्टि से भारत अभी कई देशों से पिछड़ा हुआ है। लेकिन अब भारत की साक्षरता के स्तर में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश की साक्षरता दर 73 प्रतिशत है, जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 80.9 प्रतिशत एवं महिलाओं की 64.6 प्रतिशत है।
(4) व्यावसायिक संरचना-किसी देश की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना से उस देश के विकास स्तर की जानकारी मिलती है। विकसित एवं विकासशील देशों में विभिन्न क्रियाकलापों में कार्य करने वाले लोगों का अनुपात अलग अलग होता है। विकसित देशों में अधिकांश जनसंख्या द्वितीयक एवं तृतीयक व्यवसायों में संलग्न होती है, जबकि विकासशील या अविकसित देशों में प्राथमिक व्यवसायों में।
भारत में कुल कार्यशील जनसंख्या का 67 प्रतिशत भाग प्राथमिक व्यवसायों में संलग्न है, जिसमें 64 प्रतिशत लोग तो केवल कृषि कार्य करते हैं। द्वितीयक एवं तृतीयक व्यवसायों में कार्यरत लोगों की संख्या का अनुपात क्रमशः 13 तथा 20 प्रतिशत है।
वर्तमान में देश में औद्योगीकरण तथा शहरीकरण में वृद्धि के साथ-साथ द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों में व्यावसायिक परिवर्तन हुआ है।
(5) स्वास्थ्य-स्वास्थ्य भी जनसंख्या की संरचना का एक महत्त्वपूर्ण घटक है जो कि विकास की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। भारत में सरकारी कार्यक्रमों के निरन्तर प्रयास के द्वारा जनसंख्या के स्वास्थ्य स्तर में महत्त्वपूर्ण सुधार हुआ है। जन स्वास्थ्य, संक्रामक बीमारियों से बचाव एवं रोगों के इलाज में आधुनिक तकनीकों के प्रयोग के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में विकास हुआ है। 1951 से अब तक मृत्यु दर में भारी कमी आई है। औसत आयु जो कि 1951 में 36.7 वर्ष थी, बढ़कर 2001 में 64.6 वर्ष तथा 2012 में 67.9 वर्ष से अधिक हो गई है।