स्वास्थ्य सुविधाएँ मानव पूँजी निर्माण हेतु अति आवश्यक हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार से देश में मानव पूँजी निर्माण को बढ़ावा मिलता है। एक स्वस्थ व्यक्ति अधिक उत्पादक एवं अधिक कार्यकुशल होता है। भारत में विभिन्न पंचवर्षीय पोजना में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करने को प्राथमिकता दी गई है। हमारी राष्ट्रीय नीति का लक्ष्य भी जनसंख्या के अल्प सुविधा प्राप्त वर्गों पर विशेष ध्यान देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं, परिवार कल्याण और पौष्टिक सेवा तक इनकी पहुंच को बेहतर बनाना है।
देश में विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं में स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार हेतु अनेक प्रयास किए हैं जिसके अनेक सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं । इन प्रयासों से देश में जीवन प्रत्याशा बढ़कर वर्ष 2014 में 68.3 वर्ष से अधिक हो गई है जो आजादी के समय काफी कम थी। शिशु-मृत्यु-दर 1951 में 147 थी, वह वर्ष 2016 में 34 रह गई है। इसी प्रकार देश में जन्म-दर एवं मृत्यु-दर में भी काफी कमी आई है।
देश में स्वास्थ्य सुविधाओं में भी काफी विस्तार हुआ है जिसे निम्न तालिका से स्पष्ट किया जा सकता है-
स्रोत : राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल 2013, 2014, 2015, 2016, 2017, 2018, केन्द्रीय स्वास्थ्य गुप्तचर ब्यूरो, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय।
उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट है कि आजादी के पश्चात् देश में स्वास्थ्य सुविधाओं में तीव्र गति से वृद्धि हुई है।