जीवन परिचय -देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसम्बर 1884 ई. में बिहार राज्य के छपरा जिले के जीरादेई ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम महादेव सहाय था। इन्होंने कलकत्ता (कोलकाता) विश्वविद्यालय से एम. ए. एल. एल. वी. की परीक्षा उतीर्ण की थी। ये प्रतिभासम्पन्न और मेधावी रहे और परीक्षा में प्रथम अति थे। मुजफ्फरपुर कालेज में कुछ दिन अध्यापन का कार्य करने के पश्चात ये पटना और कलकता में वकील रहे। इनका लगाव छात्र जीवन से राष्ट्र की ओर था। सन् 1917 ई. में गांधी जी के आदर्शी और सिद्धान्तो से प्रभावित होकर इन्होंने चम्पारन के आन्दोलन में सक्रिय भाग लिया और वकालत छोड़कर पूर्ण रूप से राष्ट्रीय स्वतन्त्रता संग्राम में कुद पड़े। ये तीन बार अखिल भारतीय कांग्रेस के सभापति तथा भारत के संविधान का निर्माण करने वाली सभा के सभापति चुने गये ।
इनको भारत गणराज्य का प्रथम राष्ट्रपति बनाया गया। इस पद पर ये कई सालो तक सुशोभित रहे। भारत सरकार ने इनकी सेवाओं से प्रभावित होकर इन्हें सन् 1962 में भारत रत्न से अलंकृत किया। जीवन भर 'राष्ट्र की निःस्वार्थ सेवा करते हुए ये 28 फरवरी सन् 1963 ई. को ये स्वर्गवासी हो गये।
रचनाएँ:-चम्पारन में महात्मा गांधी, बापू के कदमों में, मेरी आत्मकथा, शिक्षा भौर संस्कृति, भारतीय शिक्षा, साहित्य आदि