Question
घनानंद का साहित्यिक परिचय लिखिए।

Answer

     साहित्यिक परिचय - भाव-पक्ष-घनानंद मूलतः प्रेम-पीड़ा के कवि हैं। उन्होंने वियोग श्रृंगार का मनोहर वर्णन अपने काव्य में किया है। उनकी रचनाओं में प्रेम का गम्भीर, निर्मल, आवेगपूर्ण तथा व्याकुल कर देने वाला उदास रूप मिलता है। उनकी रचनाओं में भावों की जो गहराई है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।
     कला-पक्ष-उनके काव्य में लाक्षणिकता, वाग्विदग्धता, वक्रोक्ति के साथ अलंकारों का प्रयोग कुशलता से हुआ है। उनकी काव्य-कला में सहजता के साथ ही वचन-वक्रता भी मिलती है। घनानंद ने परिष्कृत और साहित्यिक ब्रजभाषा में काव्य रचा है। उनकी भाषा व्यंजकता, कोमलता और मधुरता के गुणों से सम्पन्न है। वह सर्जनात्मक काव्य-भाषा के प्रणेता हैं। उन्होंने कवित्त, सवैया आदि छन्दों को अपनाया है। 
कृतियाँ - 1. सुजान सागर, 2. विरह लीला, 3. कृपाकंड निबन्ध, 4. रसकेलि वल्ली।

Need a full question paper?

Generate a complete, print-ready paper with questions like this in minutes — across 16+ boards, with answer keys.

Start Generating Free

Similar questions

औद्योगीकरण ने पर्यावरण का संकट पैदा कर दिया है, क्यों और कैसे?###औद्योगीकरण ने पर्यावरण को कैसे प्रभावित किया है? जहाँ कोई वापसी नहीं' पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।###औद्योगीकरण ने प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच आपसी संबंधों को कैसे प्रभावित किया है? 'जहाँ कोई वापसी नहीं' पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
बनारस कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
निम्न पंक्तियों के भावपक्ष एवं कलापक्ष पर अपने विचार प्रकट कीजिए - 
श्रृंगार, रहा जो निराकार, 
रस कविता में उच्छ्वसित-धार 
गाया स्वर्गीया-प्रिया-संग 
भरता प्राणों में राग-रंग, 
रति-रूप प्राप्त कर रहा वही, 
आकाश बदल कर बना मही। 
यह दीप अकेला' एक प्रयोगवादी कविता है। इस कविता के आधार पर लघु मानव' के अस्तित्व और महत्त्व पर प्रकाश डालिए। ###'यह दीप अकेला स्नेह भरा' कविता के प्रतीकार्थ को लिखिए। ###'यह दीप अकेला' कविता का मूलभाव लिखिए।
देवी सरस्वती की उदारता का गुणगान क्यों नहीं किया जा सकता? ###केशवदास ने 'बानी जगरानी' की प्रशंसा में जो उद्गार व्यक्त किए हैं, उनका भाव अपने शब्दों में लिखिए।
इस कहानी से हमारी व्यवस्था पर जो व्यंग्य किया गया है, उसे स्पष्ट कीजिए। ###
'शेर' कहानी के आधार पर हमारी सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी कीजिए।
###'शेर' लघुकथा के व्यंग्य को आज के सामाजिक राजनीतिक संदर्भो में स्पष्ट कीजिए।
अगहन मास की विशेषता बताते हुए विरहिणी (नागमती) की व्यथा-कथा का चित्रण अपने शब्दों में कीजिए।
मैं तुम्हारा विरोधी प्रतिद्वन्द्वी या हिस्सेदार नहीं
मुझे कुछ देकर या न देकर भी तुम 
कम से कम एक आदमी से तो निश्चित रह सकते हो।
डॉ. रामविलास शर्मा का साहित्यिक परिचय लिखिए।
"बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह लड्डू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं" कथन के आधार पर बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।