साहित्यिक परिचय - भाव-पक्ष-घनानंद मूलतः प्रेम-पीड़ा के कवि हैं। उन्होंने वियोग श्रृंगार का मनोहर वर्णन अपने काव्य में किया है। उनकी रचनाओं में प्रेम का गम्भीर, निर्मल, आवेगपूर्ण तथा व्याकुल कर देने वाला उदास रूप मिलता है। उनकी रचनाओं में भावों की जो गहराई है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।
कला-पक्ष-उनके काव्य में लाक्षणिकता, वाग्विदग्धता, वक्रोक्ति के साथ अलंकारों का प्रयोग कुशलता से हुआ है। उनकी काव्य-कला में सहजता के साथ ही वचन-वक्रता भी मिलती है। घनानंद ने परिष्कृत और साहित्यिक ब्रजभाषा में काव्य रचा है। उनकी भाषा व्यंजकता, कोमलता और मधुरता के गुणों से सम्पन्न है। वह सर्जनात्मक काव्य-भाषा के प्रणेता हैं। उन्होंने कवित्त, सवैया आदि छन्दों को अपनाया है।
कृतियाँ - 1. सुजान सागर, 2. विरह लीला, 3. कृपाकंड निबन्ध, 4. रसकेलि वल्ली।