एडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल, 1889 ई. को आस्ट्रिया के ब्रौना नामक शहर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उसका लालन-पालन सही तरह से नहीं हो सका। बचपन में वह चित्रकार बनना चाहता था परन्तु उसकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। अंततः उसने सेना में नौकरी कर ली । प्रथम विश्वयुद्ध में वह जर्मनी की तरफ से लड़ा और युद्ध में अभूतपूर्व वीरता के लिए उसे ‘आयरन क्रास’ प्राप्त हुआ था
हिटलर 1921 ई. में नाजी पार्टी की स्थापना की, और जर्मनी की सत्ता हथियाने का प्रयास करने लगा । पर असफल हो गया और जेल भेज दिया गया। जहाँ उसने मेन केम्फ (Mein Kemf) अर्थात ‘मेरा संघर्ष’ नामक पुस्तक की रचना की। जेल से बाहर आने के बाद, जर्मनी के राष्ट्रपति ने उसे 30 जनवरी, 1933 ई. को जर्मनी का चांसलर नियुक्त किया। 1934 ई. में जर्मन राष्ट्रपति हिंडेनवर्ग की मृत्यु हो गई। अब वह पूर्णतः तानाशाह बन गया । वे देश का फ्यूहरर (नेता) बन गया। उसने ‘एक राष्ट्र, एक देश और एक नेता’ (one people. one impire and one leader) का नारा दिया। 1945 ई. तक वह जर्मनी का भाग्य विध पता बन गया। हिटलर का आकर्षक और प्रभावोत्पादक व्यक्तित्व था। वह भाषण देने में अत्यंत निपुण था । अपने भाषणों से वह श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर अपनी ओर आकर्षित कर लेता था उसके सतारूढ़ होने में जनमत का उसके पक्ष में होना अत्यन्त सहायक सिद्ध हुआ । हिटलर जर्मन जाति की मनोभावना से भली भाँति परिचित था । वह जानता था कि जर्मन निवासी वर्साय की संधि के अपमान को नहीं भूले हैं । इसलिए वह अपने भाषणों से संधि और इसे करनेवाले’ ‘नवम्बर क्रिमिनल्स’ कहना नहीं भूलता था। जनता उसके विचारों से उसकी ओर आकृष्ट हुई। जर्मनी में उसकी धाक जम गई।