खाद्य रंग (Edible Colour)-वे प्राकृतिक एवं रासायनिक पदार्थ जिनका प्रयोग मूल्य-संवर्धित खाता पदार्थ को अधिक सुंदर एवं रंगीन बनाने के लिये किया जाता है, खाद्य रंग कहलाता है।
खाद्य रंग की उत्तम गुणवत्ता के अन्तर्गत यह नुकसान देह नहीं होना चाहिए तथा यह खाद्य पदार्थ की प्रकृति को स्थिर बनाये रखे।
विश्व खाद्य संगठन (W.H.O.) द्वारा मान्य रासायनिक खाद्य रंग मुख्य रूप से कोलतार रंजक (Coal-tar dyes) है। मुख्य रूप से प्रयुक्त खाद्य रंग (ऐजोरजंक) लाल, नारंगी, हरा एवं नीला है। विभिन्न देशों में खाद्य पदार्थों में रंगों के प्रयोग हेतु विशेष नियम बनाये गये हैं।
वर्तमान में नारंगी रंग सर्वाधिक प्रयुक्त होता है। जिसका उपयोग मिठाइयों को आकर्षक बनाने में किया जाता है।
प्राकृतिक खाद्य रंग के रूप में कैरोटीन, केसर (पीला) एवं चुकंदर रस (गहरा लाल) का प्रयोग किया जाता है। रासायनिक खाद्य रंगों का प्रयोग ठंडे पेय, डिब्बाबंद फल एवं सब्जी, बेकरी, माँस एवं मछली उत्पादों में किया जाता है। मुख्य रूप से प्रयुक्त खाद्य रंग है-टेट्राजीन, इरिथ्रोसिन, सनसेट थैलो, इन्डीगोकार्मिन आदि है।
औद्योगिक खाता संवर्धित उत्पादों में नियमानुसार खाद्या रंग का सीमित प्रयोग किया जाता है। लेकिन आज-कल लोभवश मनुष्य ताजी सब्जियों एवं फलों को भी अधिक आकर्षक एवं रंगीन बनाने हेतु रासायनिक रंजकों का प्रयोग करता है, जो सेहत के लिए अत्यधिक नुकसानदेह है। अतः फल एवं सब्जियों को प्रयोग में लाने से पहले अच्छी तरह से उन्हें धो लेना चाहिए।
मूल्य संवर्धित खाद्य-उत्पादों जैसे अचार, जैम, जैली, प्राकृतिक एवं संश्लेषित व पेय पदार्थ में तो मानक खाद्य रंग
उत्पाद को अधिक आकर्षक बनाने के लिए किया जाना एक सीमा तक उचित हो सकता है। लेकिन दवा के रूप में मुख्य में कैप्सूल को रंगीन बनाने के लिये प्रतिबंधित किया जाना चाहिये।