विभिन्न सूक्ष्म तत्वों के विषैले प्रभाव निम्नलिखित हैं-
(1) लोहा-पादप वृद्धि अवरुद्ध होना, जड़ों में भूरापन, सूखापन, ब्रांजिंग (ताँबे जैसा रंग) तथा जड़ों में गलन पैदा होना।
(2) मैंगनीज-पत्तियों में कुंचन, अनाजों (जई) में व्हिप टेल (लोमड़ी रंग), बादामी अथवा नीललोहित पत्तियाँ तथा तने, अनाजों की पत्तियों पर भूरे धब्बे तथा जड़ों का रंग भूरा होना।
(3) ताँबा नवीन पत्तियों में हरिमहीनता, पुरानी पत्तियों पर लाल व गुलाबी धब्बे, पत्तियों में स्फीति अभाव, जड़ों का लाल-बादामी होकर चटकना व गलना तथा लोहे की सुलभता कम होना।
(4) जस्ता-पत्तियाँ लाल भूरी होकर सूख जाती हैं तथा कागज जैसी प्रतीत होती हैं। पत्तियाँ किनारों की ओर से मुड़कर गोल हो जाती है जिससे शिराओं पर लाल-भूरे धब्बे दिखाई देते हैं। फॉस्फोरस की सुलभता घट जाती है।
(5) मोलिब्डेनम-पत्तियों पर सुनहरे पीले तथा नीले धब्बे हो जाते हैं तथा टमाटर, आलू आदि के तने भी सुनहरे पीले हो जाते हैं।
(6) बोरॉन-जी व मक्का में नवीन पत्तियों में अत्यधिक हरिमहीनता, विरंजन होकर मध्य से लटक जाना तथा कलियों का रंग उड़ जाना तथा फूलों का रंग हल्का होना।
(7) क्लोरीन-पत्तियों की संख्या व आकार में कमी तथा मोटा होना एवं पत्तियों के किनारे बादामी होकर फटना।