Question
कर भला, होगा भला ।

Answer

कहते हैं कि जैसी करनी, वैसी भरनी। जैसा हम करेंगे, वैसा ही पाएंगे। आम के बीज बोएंगे तो आम के मीठे स्वादिष्ट फल मिलेंगे और बबूल बोएँगे तो काँटे मिलेंगे। देने और पाने की यह शाश्वत परम्परा हैं, इसलिए यदि हम किसी का भला करेंगे तो निश्चित रूप से हमारा भी भला होगा। भलाई का बीज कभी व्यर्थ नहीं जाता।

यदि हमने भलाई का बीज बोया है तो हमें उसके वृक्ष से भलाई के फल ही मिलेंगे। चींटी ने शिकारी के पैर में काटकर तोते की जान बचाई, तो तोते ने उसे डूबने से बचाया। एक ग्रीक गुलाम ने सिंह के पैर से काँटा निकालकर उसे राहत दी तो सिंह ने उस पर आक्रमण न करके उसे गुलामी के जीवन से मुक्त करवा दिया। इस प्रकार की हुई भलाई, भलाई के रूप में ही वापस आती है।

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