Question
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत ।
एक ही परीक्षा में कई बार असफल होकर अंत में सफल हुए व्यक्ति देखे गए हैं। इसका कारण यही है कि वे मन से निराश नहीं हुए, मन से नहीं हरि हैं। व्यक्ति का ऐसा मनोबल ही उसकी हार को भी जीत में बदल देता है। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी जैसे पुरुष ऐसे ही योद्धा थे जो मन से कभी नहीं हारे थे। उनकी दृढ़ आत्मशक्ति ने ही उनकी पराजयों को भी विजय में बदल दिया था। इसीलिए कहा गया है कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
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